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Russia-Ukraine War: युद्ध रोकने के लिए चीन का शांति प्रस्ताव क्या है? क्या खत्म होगा एक साल से चल रहा संघर्ष?
Fri, 24 Feb 2023 09:09 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 24 Feb 2023 09:09 PM IST
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चीन का शांति प्रस्ताव
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AMAR UJALA
विस्तार
यूक्रेन-रूस युद्ध को शुरू हुए एक साल हो गए लेकिन अभी भी संघर्ष खत्म होने की कोई उम्मीद नहींं दिख रही है। इसी बीच चीन ने लड़ाई खत्म करने के लिए 12 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। यहां के शीर्ष राजनयिक के मुताबिक, इस सप्ताह जर्मनी में एक सम्मेलन में प्रस्ताव लाया गया। चीन के इस शांति पहल पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। इससे पहले भी चीन ने कहा था कि वह युद्ध में मध्यस्थ के रूप में कार्य करने की कोशिश कर रहा है।रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए चीन का शांति प्रस्ताव क्या है? प्रस्ताव के अहम बिंदु कौन से हैं? रूस-यूक्रेन समेत अन्य देश प्रस्ताव को कैसे देखते हैं? आइये जानते हैं...
चीन के राष्ट्रपति
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अमर उजाला
चीन का शांति प्रस्ताव क्या है और कब जारी किया गया?
रूस-यूक्रेन युद्ध के एक साल होने पर चीन ने शुक्रवार को एक 12-सूत्रीय शांति प्रस्ताव जारी किया। इसे जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में पेश किया गया। 'यूक्रेन संकट के राजनीतिक समाधान पर चीन की स्थिति' शीर्षक वाले इस शांति प्रस्ताव में 12 बिंदु हैं। सबसे अहम बिंदु के रूप में इसमें युद्धविराम, शांति वार्ता और रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को खत्म करने को कहा गया है।
प्रस्ताव के माध्यम से चीन ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों से कहा है कि इनको एकतरफा प्रतिबंधों का दुरुपयोग बंद करना चाहिए और रूस-यूक्रेन संकट को कम करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। रूस या यूक्रेन का उल्लेख किए बिना कहा गया कि सभी देशों की संप्रभुता को बरकरार रखा जाना चाहिए। अन्य बिंदुओं में संघर्ष विराम, शांति वार्ता, युद्ध के कैदियों के लिए सुरक्षा और नागरिकों पर हमलों को रोकने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को सुरक्षित रखने और अनाज निर्यात को सुविधाजनक बनाने के लिए कहा गया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के एक साल होने पर चीन ने शुक्रवार को एक 12-सूत्रीय शांति प्रस्ताव जारी किया। इसे जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में पेश किया गया। 'यूक्रेन संकट के राजनीतिक समाधान पर चीन की स्थिति' शीर्षक वाले इस शांति प्रस्ताव में 12 बिंदु हैं। सबसे अहम बिंदु के रूप में इसमें युद्धविराम, शांति वार्ता और रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को खत्म करने को कहा गया है।
प्रस्ताव के माध्यम से चीन ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों से कहा है कि इनको एकतरफा प्रतिबंधों का दुरुपयोग बंद करना चाहिए और रूस-यूक्रेन संकट को कम करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। रूस या यूक्रेन का उल्लेख किए बिना कहा गया कि सभी देशों की संप्रभुता को बरकरार रखा जाना चाहिए। अन्य बिंदुओं में संघर्ष विराम, शांति वार्ता, युद्ध के कैदियों के लिए सुरक्षा और नागरिकों पर हमलों को रोकने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को सुरक्षित रखने और अनाज निर्यात को सुविधाजनक बनाने के लिए कहा गया है।
इन 12 बिंदुओं में जानें शांति प्रस्ताव...
1. सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करना।
2. शीत युद्ध की मानसिकता का छोड़ना।
3. दुश्मनी को रोकना।
4. शांति वार्ता दोबारा शुरू करना।
5. मानवीय संकट का समाधान करना।
6. नागरिकों और युद्धबंदियों की सुरक्षा करना।
7. परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को सुरक्षित रखना।
8. रणनीतिक खतरों को कम करना।
9. अनाज के निर्यात को सुविधाजनक बनाना।
10. एकतरफा प्रतिबंधों को रोकना।
11. औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर रखना।
12. संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण को बढ़ावा देना।
1. सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करना।
2. शीत युद्ध की मानसिकता का छोड़ना।
3. दुश्मनी को रोकना।
4. शांति वार्ता दोबारा शुरू करना।
5. मानवीय संकट का समाधान करना।
6. नागरिकों और युद्धबंदियों की सुरक्षा करना।
7. परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को सुरक्षित रखना।
8. रणनीतिक खतरों को कम करना।
9. अनाज के निर्यात को सुविधाजनक बनाना।
10. एकतरफा प्रतिबंधों को रोकना।
11. औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर रखना।
12. संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण को बढ़ावा देना।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की
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यूक्रेन इस प्रस्ताव को कैसे देखता है?
यूक्रेन ने इस शांति प्रस्ताव का स्वागत किया है। हालांकि, रिपोर्ट्स की मानें तो प्रस्ताव के लिए यूक्रेन से परामर्श नहीं किया गया था। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शांति वार्ता में चीन के शामिल होने को एक महत्वपूर्ण पहला कदम बताया। चीन मामलों की यूक्रेनी प्रभारी, हन्ना लेशचिंस्का ने प्रस्ताव को एक अच्छा संकेत करार दिया और कहा कि वह उम्मीद करती हैं कि चीन उनके देश के समर्थन में अधिक सक्रियता दिखाएगा। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि वो रूस से भी युद्ध रोकने और अपने सैनिकों को वापस बुलाने का आग्रह करेंगे।'
यूक्रेन ने इस शांति प्रस्ताव का स्वागत किया है। हालांकि, रिपोर्ट्स की मानें तो प्रस्ताव के लिए यूक्रेन से परामर्श नहीं किया गया था। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शांति वार्ता में चीन के शामिल होने को एक महत्वपूर्ण पहला कदम बताया। चीन मामलों की यूक्रेनी प्रभारी, हन्ना लेशचिंस्का ने प्रस्ताव को एक अच्छा संकेत करार दिया और कहा कि वह उम्मीद करती हैं कि चीन उनके देश के समर्थन में अधिक सक्रियता दिखाएगा। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि वो रूस से भी युद्ध रोकने और अपने सैनिकों को वापस बुलाने का आग्रह करेंगे।'
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव
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रूस ने क्या कहा?
रूस ने भी इस योजना पर प्रतिक्रिया दी है। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'चीनी भागीदारों ने हमें यूक्रेनी संकट के मूल कारणों के साथ-साथ इसके राजनीतिक समाधान के दृष्टिकोण के बारे में अपने विचारों से अवगत कराया। अन्य किसी शांति योजना की कोई बात नहीं हुई।'
रूस ने भी इस योजना पर प्रतिक्रिया दी है। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'चीनी भागीदारों ने हमें यूक्रेनी संकट के मूल कारणों के साथ-साथ इसके राजनीतिक समाधान के दृष्टिकोण के बारे में अपने विचारों से अवगत कराया। अन्य किसी शांति योजना की कोई बात नहीं हुई।'
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन
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अन्य देश प्रस्ताव पर क्या बोले?
अमेरिकी अधिकारियों और कुछ विश्लेषकों ने इस प्रस्ताव की आलोचना भी की है। म्यूनिख बैठक में, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने प्रस्ताव जारी होने से पहले चीन की स्थिति के बारे में संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा दी गई गैर-घातक सहायता रूस के युद्ध के प्रयासों का समर्थन करती है। हालांकि, चीन ने आरोप को गलत बताया और कहा कि इसमें सबूतों की कमी है।
उधर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने प्रस्ताव की अधिकांश सामग्री को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'मेरी पहली प्रतिक्रिया यह है कि युद्ध एक बिंदु पर रुक सकता है जब सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाए।'
जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने चीन के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में, चीन का दायित्व है कि वह विश्व शांति को सुरक्षित रखने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करे।'
अमेरिकी अधिकारियों और कुछ विश्लेषकों ने इस प्रस्ताव की आलोचना भी की है। म्यूनिख बैठक में, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने प्रस्ताव जारी होने से पहले चीन की स्थिति के बारे में संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा दी गई गैर-घातक सहायता रूस के युद्ध के प्रयासों का समर्थन करती है। हालांकि, चीन ने आरोप को गलत बताया और कहा कि इसमें सबूतों की कमी है।
उधर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने प्रस्ताव की अधिकांश सामग्री को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'मेरी पहली प्रतिक्रिया यह है कि युद्ध एक बिंदु पर रुक सकता है जब सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाए।'
जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने चीन के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में, चीन का दायित्व है कि वह विश्व शांति को सुरक्षित रखने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करे।'