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जी-20 देशों का शिखर सम्मेलन: पुतिन को बुलाएं या नहीं, इस असमंजस ने घेर लिया है मेजबान इंडोनेशिया को

Sat, 19 Mar 2022 06:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 19 Mar 2022 06:14 PM IST
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सार
विश्लेषकों का कहना है कि जी-20 शिखर बैठक भले अक्तूबर में होने वाली हो, लेकिन उसके पहले जून में ही जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक तय है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक मौजूदा तनाव का असर बैठक में ही दिख जाएगा...
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Russia Ukraine war has put Indonesia in dilemma, which is hosting the summit of the G20 countries
जी-22 शिखर सम्मेलन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी में जुटे इंडोनेशिया को यूक्रेन युद्ध ने सांसत में डाल दिया है। जी-20 दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले 20 देशों का समूह है। इसका अगला शिखर सम्मेलन इंडोनेशिया के टूरिस्ट एन्कलेव नुसा दुआ में होना तय है। हालांकि इसके आयोजन में भी छह महीने से ज्यादा का समय है, लेकिन इसको लेकर अभी से अनिश्चिय गहराने लगा है। रूस भी जी-20 का सदस्य है, जिस पर पश्चिमी देशों ने बेहद सख्त पाबंदियां लगा दी हैं।

चीन और भारत के कदम पर नजर

इंडोनेशिया के सामने बड़ा सवाल यह है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को वह औपचारिक आमंत्रण भेजे या नहीं। पुतिन से पश्चिमी देशों के रिश्ते जिस हद तक कड़वे हो गए हैं, उसे देखते हुए ये आम अनुमान है कि पुतिन के शिखर सम्मेलन में आने की स्थिति में लगभग 15 देशों के नेता इसका बहिष्कार कर देंगे। उनमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भी शामिल हैं। लेकिन अगर पुतिन को नहीं बुलाया गया, तो संभावना है कि चीन और यहां तक कि संभवतया भारत भी इसमें अपने प्रतिनिधित्व का स्तर गिरा देगा। यानी उन देशों के सर्वोच्च नेता इसमें नहीं आएंगे।



इंडोनेशियाई मीडिया में चल रही चर्चा के मुताबिक ऐसी संभावनाओं को लेकर राष्ट्रपति जोको विडोडो असमंजस में हैं। वैसे इंडोनेशिया के भी रूस से एतिहासिक संबंध रहे हैं। यूक्रेन पर हमले के बाद इंडोनेशिया ने जो बयान जारी किया, उसमें बिना रूस का नाम लिए हमले की आलोचना की गई। संयुक्त राष्ट्र में इंडोनेशिया ने रूस की निंदा करने वाले प्रस्ताव के पक्ष में जरूर मतदान किया। लेकिन उसने रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है।

रूसी कंपनी रोसनेफ्ट इंडोनेशिया के जावा में 1.4 अरब बिलियन डॉलर की लागत से एक रिफाइनरी बना रही है। इसके अलावा रूस नॉर्थ नतुना सागर में तेल और गैस की खोज में भी इंडोनेशिया की मदद कर रहा है। इन संबंधों का असर इंडोनेशिया के रुख पर दिखा है। इंडोनेशियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- हम किसी दूसरे देश के कदम का आंख मूंद कर अनुसरण नहीं करते। हम अपने हितों का ख्याल करते हुए और इस सवाल पर विचार करते हुए अपना रुख तय करेंगे कि क्या प्रतिबंध से किसी समस्या का हल होता है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री पुतिन के खिलाफ

विश्लेषकों का कहना है कि जी-20 शिखर बैठक भले अक्तूबर में होने वाली हो, लेकिन उसके पहले जून में ही जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक तय है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक मौजूदा तनाव का असर बैठक में ही दिख जाएगा। नजर यह देखने पर टिकी रहेगी कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव यहां आते हैं या नहीं और अगर वे आए, तो उनके प्रति पश्चिमी विदेश मंत्री कैसा नजरिया दिखाते हैं।


ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन यह कह चुके हैं कि वे पुतिन को जी-20 शिखर बैठक में बुलाने के खिलाफ हैं। इंडोनेशिया सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एशिया टाइम्स से कहा कि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के इस बयान को गंभीरता से लिया गया है। इस बीच टीकाकारों ने कहा है कि दुनिया में शुरू हो रहे शीत युद्ध का जी-20 जैसे सहयोग के लिए बने मंचों पर असर दिखना लाजिमी ही है।

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