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स्टैगफ्लेशन की आशंका: रूस पर चली प्रतिबंधों की तलवार से यूरोप भी हो रहा है जख्मी

Sat, 30 Apr 2022 03:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 30 Apr 2022 03:51 PM IST
सार

शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक यूरो जोन में मुद्रास्फीति की दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अप्रैल में इस ज़ोन में आने वाले 19 देशों में ये दर 7.5 फीसदी रही। महंगाई की ऊंची दर से इस क्षेत्र में स्टैगफ्लेशन की आशंका गहरी हो गई है। स्टैगफ्लेशन उस स्थिति को कहते हैं, जब मुद्रास्फीति की दर वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर से ऊंची बनी रहे...

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Russia Ukraine News Update: Fear of stagflation in Europe after impose the sanctions on Russia
रूस प्राकृतिक गैस - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूरोप को अब इस बात का अहसास हो रहा है कि रूस को दंडित करने की कोशिश में उसने प्रतिबंधों को जो तलवार चलाई, वह दोधारी है। इस तलवार से खुद यूरोपीय देश भी चोटिल हुए हैं। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक यूरो जोन में मुद्रास्फीति की दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अप्रैल में इस ज़ोन में आने वाले 19 देशों में ये दर 7.5 फीसदी रही। महंगाई की ऊंची दर से इस क्षेत्र में स्टैगफ्लेशन की आशंका गहरी हो गई है। स्टैगफ्लेशन उस स्थिति को कहते हैं, जब मुद्रास्फीति की दर वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर से ऊंची बनी रहे।

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इंग्लैंड और वेल्श में कंपनिय़ां हो रहीं दिवालिया

उधर ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि इंग्लैंड और वेल्श में कंपनियों के दिवालिया होने की दर 60 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। 2022 के पहले तीन महीनों में यहां 4,900 कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित किया। यह 1960 के बाद ऐसा कभी नहीं हुआ था। मार्केट स्ट्रेटेजी बनाने वाली फर्म ईवाई-पार्थेनॉन से जुड़ी विशेषज्ञ सामंता कीन ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया- कॉमोडिटी और ऊर्जा की महंगाई और सप्लाई चेन संबंधी दिक्कतों के कारण कंपनियों को एक बड़े तूफान का सामना करना पड़ रहा है। बहुत सी छोटी कंपनियों को अब अपने भविष्य के बारे में कठिन निर्णय लेना पड़ रहा है।

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वेबसाइट ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के बदले सिर्फ रूसी मुद्रा रुबल में भुगतान स्वीकार करने की अपनी नीति से रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने यूरोप की दुखती रग पर चोट कर दी है। इससे यूरोपीय देशों में जो आर्थिक समस्याएं पैदा हुई हैं, उस कारण नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) की एकता में दरार पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। इस बिंदु पर एडजस्ट करने के लिए यूरोपीय देश तैयार नहीं थे।

 

इस रिपोर्ट में कहा गया है- ‘यूरोप को ऊर्जा के वैकल्पिक इंतजाम करने में वर्षों लगेंगे, ताकि वहां औद्योगिक उपयोग और घरों को गर्म करने की जरूरत पूरी की जा सके। इस बीच पुतिन ने पिछले महीने अचानक यह घोषणा कर दी कि एक अप्रैल से उनका देश सिर्फ रूबल में ही भुगतान स्वीकार करेगा।’

जर्मनी करेगी रूबल में भुगतान!

रूबल में भुगतान के लिए तैयार न होने पर पोलैंड और बल्गारिया की गैस सप्लाई रूस रोक चुका है। मई में कई दूसरे देशों के भुगतान की तारीख तय है। रूस के सख्त रुख को देखते हुए अब कई यूरोपीय देश और कंपनियां रूबल भुगतान की शर्त स्वीकार करने को तैयार दिख रही हैं। इससे यूरोप को नुकसान पहुंचाने और उसकी एकता तोड़ने की रूस की मंशा पूरी होती नजर आ रही है। हंगरी ने साफ एलान कर दिया है कि वह रूबल में भुगतान कर गैस की खरीदारी जारी रखेगा। कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जर्मनी भी ऐसा करने की तैयारी में है।

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सामने उसकी मुद्रा यूरो के भाव में लगातार आ रही गिरावट की चुनौती भी है। डॉलर की तुलना में यूरो का भाव रिकॉर्ड स्तर तक गिर चुका है। यूरोप में बढ़ी महंगाई और ऊर्जा संकट का तुरंत कोई समाधान ना दिखने के कारण निवेशकों का यूरो में भरोसा कमजोर पड़ा है।

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