क्लिंटन से ट्रंप तक: 25 साल में पांच अमेरिकी राष्ट्रपति देख चुके हैं पुतिन, जानें किससे-कब-क्या हुई चर्चा?
पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपतियों की मुलाकात का जो सिलसिला साल 2000 में शुरू हुआ था, वह 2025 तक किस तरह जारी रहा है? किस अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष के साथ पुतिन ने कब-कहां और किस तरह से बातचीत को अंजाम दिया? रूसी राष्ट्रपति के अमेरिका से सबसे बेहतर रिश्ते किस दौर में रहे हैं? इसके अलावा ट्रंप के पहले कार्यकाल में दोनों के बीच कैसा रिश्ता रहा था? आइये जानते हैं...
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विस्तार
गौरतलब है कि पुतिन रूस में अपने 25 साल के शासन के दौरान पांच अमेरिकी राष्ट्रपति का सामना कर चुके हैं। इनमें बिल क्लिंटन, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन जैसे नाम शामिल हैं। जहां पुतिन की अमेरिकी राष्ट्रपतियों से शुरुआती कुछ मुलाकातें शीत युद्ध के बाद दोस्ती और सौहार्द बढ़ाने पर केंद्रित थीं, तो वहीं ओबामा और बाइडन के दौर में उनका रुख थोड़ा रूखा रहा है।
पहला चरण: पुतिन का शासन शुरू, अमेरिकी राष्ट्रपति से पहली मुलाकात
व्लादिमीर पुतिन को राष्ट्रपति बने महज तीन महीने ही हुए थे। इस दौरान ही उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का मॉस्को में स्वागत किया। रूसी राष्ट्रप्रमुख ने इस दौरान क्लिंटन को न सिर्फ क्रेमलिन (रूस सरकार का कार्यालय) का दौरा कराया, बल्कि रूसी जैज ग्रुप ने दोनों के सामने एक कार्यक्रम भी पेश किया। इस दौरान क्लिंटन ने पुतिन को दो हथियार नियंत्रण संधियों पर हस्ताक्षर करने के लिए बधाई दी। क्लिंटन ने तब कहा था, "राष्ट्रपति येल्तसिन (पुतिन से पहले रूस के राष्ट्रपति) ने रूस को आजादी दिलाई। राष्ट्रपति पुतिन के अंतर्गत रूस के पास समृद्धि और मजबूती पाने का मौका है। वह भी अपनी स्वतंत्रता और कानून का शासन बरकरार रखते हुए।"
इस बीच क्लिंटन ने रूस के चेचेन्या में संघर्ष को लेकर चिंता जताई थी। दरअसल, रूस में एक अपार्टमेंट ब्लास्ट में 300 लोगों की मौत हो गई थी। तब रूसी सरकार ने चेचेन्या के अलगाववादियों को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया था और चेचेन्या में सख्ती लागू कर दी थी।
पुतिन और क्लिंटन इसके बाद तीन बार और मिले। हालांकि, इसी साल नवंबर में बिल क्लिंटन को चुनाव में हार मिली और उनकी जगह रिपब्लिकन नेता जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने ले ली।
दूसरा चरण: पुतिन का शासन कायम और बुश बन गए अमेरिकी राष्ट्रपति
अमेरिका पर सितंबर 2001 में आतंकी हमला हुआ। इस हमले के बाद रूसी राष्ट्रपति उन पहले नेताओं में से थे, जिन्होंने बुश को फोन कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया था। इसके दो महीने बाद बुश ने अपने टेक्सास के क्रॉफोर्ड में स्थित रैंच में पुतिन की मेजबानी की। इस दौरान बुश ने रूस से रिश्तों को लेकर सकारात्मकता दिखाई और कहा, "जब मैं हाईस्कूल में था, तब रूस एक दुश्मन देश था। अब हाईस्कूल के छात्र जान सकते हैं कि रूस एक दोस्त है। हम पुराने संबंधों से इतर साथ काम कर रहे हैं, ताकि सहयोग और भरोसे की नई भावना पैदा की जा सके और दुनिया को शांतिपूर्ण बनाया जा सके।" इस दौरान की एक तस्वीर काफी वायरल होती है। इसमें बुश ने पुतिन को अपने पिक अप ट्रंक में बिठाकर रैंच पर स्थित झरने का दौरा कराया था।
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तीसरा चरण: बुश के दूसरे कार्यकाल में फिर दिखी करीबी
अलग-अलग मुद्दों पर विवाद के बावजूद पुतिन और बुश के बीच कड़वाहट कभी देखने को नहीं मिली। इसी का असर था कि जॉर्ज बुश ने एक बार फिर मेन के केनिबंकपोर्ट स्थित अपने माता-पिता के घर पर मेहमान के तौर पर पुतिन को बुलाया। दोनों ने इस दौरान यह माना कि कुछ मुद्दों पर उनका रुख बिल्कुल उलट है, लेकिन इस पारदर्शिता को लेकर दोनों ने एक-दूसरे की तारीफ भी की। बुश इस दौरान एक बार फिर पुतिन को मछली पकड़ने (फिशिंग ट्रिप पर) ले गए। मजेदार बात यह है कि इस दौरान पुतिन के जाल में एक मछली फंसी भी, हालांकि उन्होंने इसे छोड़ दिया था।
चौथा चरण: रूस-अमेरिका में तल्खी, लेकिन पुतिन-बुश में नहीं
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की आखिरी मुलाकात रूस के सोच्ची में हुई थी। दरअसल, इस दौर में अमेरिका अपने मिसाइल डिफेंस सिस्टम को यूरोप तक बढ़ाना चाहता था। हालांकि, रूस इसके सख्त विरोध में था। दोनों ही नेता इस बैठक में किसी समझौते पर नहीं पहुंचे और अमेरिका-रूस के रिश्तों में भी खटास दिखने लगी, लेकिन इसका असर दोनों के निजी बर्ताव पर नहीं दिखा।
2000 से लेकर 2008 तक बुश के अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर कार्यकाल के दौरान पुतिन उनसे कुल 28 बार मिले। बुश ने इससे ज्यादा मुलाकातें सिर्फ अमेरिका के सबसे खास मित्र देश- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से की थीं।

पांचवां चरण: रूस का जॉर्जिया पर हमला, ओबामा का दौर शुरू
2008 में जॉर्ज बुश सत्ता से हट चुके थे और उनकी जगह बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए। दूसरी तरफ व्लादिमीर पुतिन इसी साल रूस के प्रधानमंत्री बन चुके थे। उन्होंने राष्ट्रपति पद पर अपने साथी दिमित्री मेदवेदेव को बिठाया। हालांकि, रूस में सत्ता का केंद्र पुतिन के पास ही था। इस बीच रूस ने जॉर्जिया पर हमला बोल दिया था और अमेरिका ने इसकी भरसक निंदा की थी।
ऐसे में जब अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा की रूस के पीएम व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात हुई तो दोनों देशों के बीच अच्छी-खासी तल्खी पैदा हो चुकी थी। ओबामा ने इस बैठक में पुतिन से कहा था, "हम शायद हर बात पर राजी न हों, लेकिन मुझे लगता है कि हमारी भाषा आपसी सम्मान और परामर्श की रह सकती है। इससे अमेरिकी और रूसी नागरिकों का ही लाभ होगा।"
छठा चरण: जी8 में रहकर आखिरी बार मिले रूस-अमेरिका के राष्ट्रपति
पुतिन 2012 में एक बार फिर रूस के राष्ट्रपति बन गए। इसी के साथ इस बार जी8 समिट में वे राष्ट्राध्यक्ष के तौर पर जुड़े। हालांकि, अमेरिका और रूस की दूरियां इस दौर तक इतनी बढ़ चुकी थीं कि सम्मेलन के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, वह तक अखबारों की सुर्खियां बन गईं।
दोनों देशों में तब तक सीरिया भी विवाद का मुद्दा बन गया था। जहां अमेरिका और उसके सहयोगी सीरिया में गृह युद्ध की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से हटाना चाहते थे, तो वहीं रूस असद का समर्थक रहा था और उसके साथ डटकर खड़ा था। इसी संबंध में ओबामा ने जी8 में कहा था, "सीरिया के संबंध में हमारे अलग-अलग परिप्रेक्ष्य हैं। लेकिन हम हिंसा घटाने को लेकर साझा हित रखते हैं। इसके अलावा रासायनिक हथियारों का प्रयोग रोकने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।"
सातवां चरण: पुतिन और ओबामा की आखिरी मुलाकात और दुश्मनी
पुतिन और ओबामा की नौवीं और आखिरी मुलाकात पेरू में एपेक (APEC) सम्मेलन के दौरान हुई। हालांकि, दोनों ही देश और नेता लगभग पूरी तरह दुश्मनी को स्वीकार चुके थे। रूस ने अमेरिका पर 2014 में यूक्रेनी राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच (रूस के सहयोगी) के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लगा दिया। वहीं अमेरिका 2014 में क्रीमिया पर कब्जे को लेकर रूस पर प्रतिबंध लगा चुका था। इसमें यूरोप ने भी अमेरिका का साथ दिया था।
पुतिन और ओबामा ने तब सम्मेलन से इतर महज चार मिनट ही बात की थी। तब ओबामा ने पुतिन से कहा था कि वे मिन्स्क समझौते के तहत प्रतिबद्ध रहें, जिससे यूक्रेन में शांति स्थापित की जा सके। इसी महीने ओबामा का राष्ट्रपति के तौर पर कार्यकाल खत्म हुआ और डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव में जीत मिली।
आठवां चरण: ट्रंप को मिली अमेरिका की सत्ता, पुतिन के साथ बढ़ाई करीबी
बराक ओबामा के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन को उम्मीदवार बनाया। हालांकि, उन्हें इस चुनाव में हार मिली। इस बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की तरफ से ऐसी रिपोर्ट्स सामने आईं कि रूस ने क्लिंटन को हराने के लिए चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ की। इसके जरिए ही ट्रंप को जीत मिली। जहां इस तरह की रिपोर्ट्स को अमेरिकी राष्ट्रपति ने कोरी बकवास करार दिया था तो वहीं रूस ने भी ऐसे किसी हस्तक्षेप से इनकार किया।
इन घटनाक्रमों के बीच डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन की पहली मुलाकात जून 2017 में जी-20 सम्मेलन के दौरान हुई। तब ट्रंप ने पुतिन से मुलाकात को गौरवपूर्ण करार दिया था। इसके बाद दोनों नेता एपीईसी सम्मेलन में भी मिले। हालांकि, सबसे विस्फोटक मुलाकात जुलाई 2018 में आई, जब दोनों नेता पहली बार फिनलैंड के हेलसिंकी में द्विपक्षीय वार्ता के लिए मिले। इस दौरान दोनों ने अकेले मुलाकात की। दोनों के साथ सिर्फ उनके इंटरप्रेटर मौजूद थे।
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जहां पुतिन का बयान काफी सधा हुआ था तो वहीं ट्रंप के बयान ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हस्तक्षेप पर बात की। ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या वे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की इस बात पर भरोसा करते हैं कि मॉस्को ने चुनाव में दखल दिया तो ट्रंप ने कहा कि मुझे समझदार लोगों पर भरोसा है। लेकिन मैं आपको बताना चाहूंगा कि राष्ट्रपति पुतिन ने आज दखल जैसी किसी भी बात से काफी मजबूती से इनकार किया। उन्होंने साफ कहा कि यह रूस ने नहीं किया है। मैं कहूंगा कि मुझे भी इसकी वजह समझ नहीं आती।
ट्रंप के पहले कार्यकाल में पुतिन उनसे कुल छह बार मिले।
नौवां चरण: डेमोक्रेट नेता के कार्यकाल में फिर बिगड़े अमेरिका-रूस के रिश्ते
अमेरिका और रूस के किसी राष्ट्रपति की आखिरी मुलाकात जून 2021 में हुई थी। तब जो बाइडन अमेरिकी राष्ट्रपति थे। बाइडन ने ट्रंप को हराने के बाद जनवरी में ही शपथ ली थी और कई मौकों पर राष्ट्रपति चुनाव में रूसी हस्तक्षेप के मुद्दे पर रूस को घेर चुके थे। इतना ही नहीं बाइडन ने ट्रंप को भी पुतिन को बार-बार सही ठहराने के लिए घेरा था। खैर मार्च 2021 में एक मौके पर बाइडन ने पुतिन को कातिल करार दे दिया था। इसके चलते रूस ने अपने राजदूत को अमेरिका से वापस बुला लिया। पलटवार में अमेरिका ने भी यही किया।
आखिरकार दोनों देशों के राष्ट्रपति जून 2021 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मिले। दोनों ही देशों ने अपने राजदूत वापस तैनात करने पर सहमति जताई। हालांकि, बाइडन ने यहां भी अमेरिकी चुनाव में रूसी दखल और साइबर हमलों का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने धमकी दी कि अगर मॉस्को अपनी हरकतों से बाज नहीं आता तो अमेरिका जवाबी साइबर हमले करेगा।
हालांकि, आठ महीने बाद ही रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जंग का एलान कर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यह यूरोप में छिड़ी दूसरी बड़ी जंग है। फरवरी 2022 के बाद से अब तक इस जंग में न तो पुतिन और न ही जेलेंस्की झुके हैं। वहीं, अमेरिका में इस दौरान बाइडन भी सत्ता से बाहर हो चुके हैं और एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने हैं। ट्रंप को उम्मीद है कि वे अलास्का में 15 अगस्त को होने वाली बैठक में रूस को यूक्रेन के खिलाफ जंग से रोक सकते हैं। हालांकि, समय के गर्भ में क्या छिपा है, ये तो बाद में ही पता चलेगा।