रूस ने बनाई कोरोना की दूसरी वैक्सीन EpiVacCorona, दुष्प्रभाव न होने का किया दावा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को Updated Sun, 23 Aug 2020 10:36 AM IST
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कोरोना वायरस वैक्सीन (फाइल फोटो)
कोरोना वायरस वैक्सीन (फाइल फोटो) - फोटो : social media

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दुनिया की पहली कोरोना वायरस विकसित करने का दावा करने करने के बाद रूस का कहना है कि उसने वायरस की दूसरी वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल कर ली है। इसके नैदानिक परीक्षण सितंबर में पूरे हो जाएंगे। इस वैक्सीन का नाम एपिवैककोरोना (EpiVacCorona) है। रूस का दावा है कि इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है।
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इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पुतनिक वी (Sputnik V) नाम की कोरोना वायरस वैक्सीन बनाने की घोषणा की थी। हालांकि इस वैक्सीन के कई दुष्प्रभावों को लेकर उसकी कड़ी आलोचना हुई थी। देश की दूसरी वैक्सीन को लेकर भी संदेह पैदा हो सकता है। इस वैक्सीन को साइबेरियन वेक्टर अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित किया जा रहा है।



इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा था कि कोरोना वायरस की कोई भी वैक्सीन 2021 के पहले नहीं आ पाएगी। रूस एपिवैककोरोना वैक्सीन का निर्माण साइबेरिया में सोवियत संघ के एक पूर्व टॉप सीक्रेट बॉयोलॉजिकल हथियारों के प्लांट में कर रहा है।

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स्पूतनिक न्यूज के अनुसार रूस के उपभोक्ता अधिकार संरक्षण और मानव कल्याण वाचडॉग रोसोट्रेबनादजोर ने कहा, 'पहले चरण के दौरान 14 और दूसरे चरण के दौरान 43 और लोगों को वैक्सीन दिया गया था।' वाचडॉग ने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन के नैदानिक परीक्षणों में भाग लेने वाले सभी स्वयंसेवक अच्छा महसूस कर रहे हैं। उसने कहा कि स्वयंसेवकों को केवल इंजेक्शन देने वाली जगह पर संवेदनशीलता का अनुभव हुआ लेकिन इसके अलावा वैक्सीन का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।



वैज्ञानिकों ने बताया कि नई वैक्सीन को जिन स्वयंसेवकों को दिया गया उन्हें 23 दिनों तक अस्पताल में रखा गया था ताकि उनका परीक्षण किया जा सके। समाचार एजेंसी इंटरफैक्स ने बताया, 'सभी वॉलंटियर अच्छा महसूस कर रहे हैं। कोई भी दुष्प्रभाव अब तक नहीं मिला है।'

इस बीच घरेलू विनियामक अनुमोदन प्राप्त करने के लिए देश के पहले संभावित कोविड-19 वैक्सीन के सामूहिक परीक्षण में 40,000 से अधिक लोग शामिल होंगे। अगले हफ्ते से एक विदेशी अनुसंधान निकाय द्वारा इसकी देखरेख की जाएगी। एक अधिकारी ने कहा कि वैक्सीन का डाटा इस महीने के आखिर तक एक शैक्षणिक पत्रिका में प्रकाशित किया जाएगा।

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