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Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन में बात आगे बढ़ी है, लेकिन अंतिम समझौते की राह में हैं कई रुकावटें

Wed, 30 Mar 2022 06:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 30 Mar 2022 06:28 PM IST
सार

रूसी पक्ष की तरफ से कहा गया कि यूक्रेन नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) में शामिल न होने पर सहमत हो गया है। इसके अलावा वह क्राइमिया और दोनबास इलाकों पर से अपना दावा छोड़ने पर भी राजी है। इसे देखते हुए रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास अपनी सैनिक गतिविधियां घटा देने का फैसला किया है...

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Russia and Ukraine talks in Turkish in positive atmosphere, no bitterness between them like earlier talks
तुर्की में रूस-यूक्रेन के बीच वार्ता - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच टर्की में हुई बातचीत में प्रगति होने के बावजूद युद्धविराम का समझौता होने की राह में अभी कई रुकावटें हैं। ये राय विशेषज्ञों ने जताई है। मंगलवार को टर्की के शहर इस्तांबुल में जब रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधि मिले, तो बताया जाता है कि वहां माहौल सकारात्मक रहा। दोनों पक्षों में पिछली वार्ताओं जैसी कड़वाहट देखने को नहीं मिली।

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नाटो में शामिल न होने को लेकर यूक्रेन राजी

रूसी पक्ष की तरफ से कहा गया कि यूक्रेन नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) में शामिल न होने पर सहमत हो गया है। इसके अलावा वह क्राइमिया और दोनबास इलाकों पर से अपना दावा छोड़ने पर भी राजी है। इसे देखते हुए रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास अपनी सैनिक गतिविधियां घटा देने का फैसला किया है।

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लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेंस्की के सलाहकार मिखाइलो पोदोलयाक ने कहा कि क्राइमिया और दोनबास के बारे में बातचीत 15 साल तक टालने पर सहमति बनी है। उसके बाद दोनों पक्ष बातचीत कर यह तय करेंगे कि वे क्षेत्र किस देश का हिस्सा रहेंगे।

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अंतिम युद्धविराम तक पहुंचना कठिन

चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस्तांबुल में हुई वार्ता के परिणाम से कुछ पर्यवेक्षकों को अचरज जरूर हुआ है, लेकिन चीनी विश्लेषकों की ये राय है कि अंतिम युद्धविराम तक पहुंचना अभी भी बहुत कठिन लक्ष्य है। ईस्ट चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी स्थित रूसी अध्ययन केंद्र में फेलॉ कुई हेंग ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में रविवार को प्रकाशित जेलेंस्की के एक इंटरव्यू का जिक्र किया। उन्होंने कहा- ‘जेलेंस्की ने तटस्थता और परमाणु हथियार से यूक्रेन के दूर रहने की बात के साथ ही संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा पर भी जोर दिया है। इसका अर्थ है कि यूक्रेन दोनबास क्षेत्र पर अंतिम रूप से अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ है।’


अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि यूक्रेन ने नाटो का सदस्य न बनने की बात के साथ यह शर्त भी जोड़ी है कि उसकी सुरक्षा की लिखित गारंटी दी जाए। सीएनएन के टीकाकार टिम लिस्टर ने लिखा है कि यह पेचीदा मामला है। उन्होंने लिखा है- ‘निश्चित रूप से अभी लंबी दूरी तय करनी होगी। अभी सिर्फ सिद्धांत तय हुए हैं, लेकिन उनसे संबंधित विवरण, क्रम, और समझौते की भाषा तय नहीं हुए हैँ। ये सारे विस्फोटक पहलू हैं।’

इस रिपोर्ट में दोनों पक्षों की तरफ से दिए गए बयानों में मौजूद अंतर की तरफ ध्यान खींचा गया है। मसलन, पोदोलयाक ने कहा- ‘बेशक सुरक्षा गारंटियों के बारे में इस संधि पर तभी दस्तखत होंगे, जब युद्धविराम हो जाएगा और रूसी सेनाएं लौट कर उस जगह पर चली जाएंगी, जहां वे 23 फरवरी 2022 को थीं।’


विश्लेषकों का कहना है कि यूक्रेन की तटस्थ स्थिति कैसे निर्धारित होगी और व्यवहार में इसे कैसे लागू किया जाएगा, यह भी एक पेचीदा सवाल है। ऐसे में किसी तीसरे पक्ष को जज बनाने की मांग भी उठेगी, ताकि यूक्रेन भविष्य में खुद को सुरक्षित महसूस कर सके। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि बाकी चुनौतियों को देखते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अभी जेलेंस्की से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। उनकी तरफ से कहा गया है कि यह मुलाकात तभी होगी, जब समझौते की सभी बारिकियों पर सहमति बन जाएगी।

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