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रूस-यूक्रेन जंग: साबित हो गई 'सत्य मर जाता है' की थ्योरी, यूक्रेन की गलियों में तबाही मचाने के लिए तैयार हैं 'ड्रोन'
सार
विशेषज्ञ के मुताबिक, यूक्रेन में एयर पावर को लेकर कोई ठोस रणनीति दिखाई नहीं पड़ रही। हवाई जहाजों की मदद पहुंचाने के लिए पश्चिम देशों ने अब प्लान बनाया है। कहा जा रहा है, दूसरे देशों से यूक्रेन के पायलट एयरक्राफ्ट लाएंगे। यहां बड़ी बात ये है कि अगर वे एयरक्राफ्ट ले भी आए तो उन्हें कहां से उड़ाएंगे। रूस की सेना ने यूक्रेन के सारे एयर फील्ड नष्ट कर दिए हैं।
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रूस-यूक्रेन युद्ध।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रूस-यूक्रेन की लड़ाई में एयर स्ट्राइक, टैंक और कथित तौर से वैक्यूम बम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यूक्रेन में वह थ्योरी साबित हो गई है, जिसमें कहा गया है कि लड़ाई में 'सत्य मर जाता है'। ये लड़ाई अब किस तरह से आगे बढ़ेगी, इसे लेकर ले. जन. शंकर प्रसाद (रिटायर्ड) का कहना है कि यूक्रेन की गलियों में अब बड़े पैमाने पर 'ड्रोन' हमला होने की संभावना है। वजह, यूक्रेन के नागरिक छोटे ठिकानों से रूस की सेना पर गोलीबारी कर सकते हैं। यूक्रेन में अब पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी हिस्से में लड़ाई चल रही है। भारतीय मूल के और राष्ट्रपति पुतिन की पार्टी के विधायक डॉक्टर अभय कुमार सिंह ने मंगलवार को मीडिया से कहा है कि रूस की आर्मी को निर्देश है कि वे धैर्य से काम लें। स्थानीय लोगों को बचाने का प्रयास करें। यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ बैठक हुई है। ऐसी कई बैठकें हो सकती हैं। अभी तो यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंसकी के पास बैठक और बातचीत का समय है। डॉक्टर अभय कुमार ने कहा, जेलेंसकी टीवी पर पुराना वीडियो डाल रहे हैं।
प्रसाद के मुताबिक, यूक्रेन में एयर पावर को लेकर कोई ठोस रणनीति दिखाई नहीं पड़ रही। हवाई जहाजों की मदद पहुंचाने के लिए पश्चिम देशों ने अब प्लान बनाया है। कहा जा रहा है, दूसरे देशों से यूक्रेन के पायलट एयरक्राफ्ट लाएंगे। यहां बड़ी बात ये है कि अगर वे एयरक्राफ्ट ले भी आए तो उन्हें कहां से उड़ाएंगे। रूस की सेना ने यूक्रेन के सारे एयर फील्ड नष्ट कर दिए हैं। सारे एयरपोर्ट खत्म हो गए हैं। यूक्रेन का एयर स्पेस पूरी तरह से रूस के हाथ में आता जा रहा है। भले ही रूस और यूक्रेन में बातचीत चल रही है, लेकिन अब रूस को खदेड़ना बहुत मुश्किल है। वह काफी आगे बढ़ चुका है। अब तो ग्राउंड पर वेस्टर्न साइड की तरफ रूस आ गया है। वहां बमबारी कर रहा है। उस इलाके को अलग थलग करने का प्रयास कर रहा है। वेस्टर्न क्षेत्र भी अब लड़ाई का केंद्र बन गया है।
उन्होंने कहा, "अब यह लड़ाई गलियों में होगी। छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंचेगी। इसके लिए रूस की सेना अब 'ड्रोन' का इस्तेमाल करेगी। अभी तक की लड़ाई में कोई भी 'ड्रोन' हमला सामने नहीं आया है। ले. जन. शकर प्रसाद (रिटायर्ड) कहते हैं, जब मिलिट्री रणनीति की बात हो रही है तो रूस हर तरह के हथियार और उपकरणों का इस्तेमाल करेगा। हालांकि रूस 'कीव और खारकीव' को पूरी तरह से खत्म नहीं करना चाहता। उसे इतना तो मालूम है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति की अपील पर स्थानीय लोग देश छोड़ कर नहीं जा रहे। उन्होंने हथियार भी उठा लिए हैं। ऐसे में जब पूरी तरह के कब्जे की बात होगी तो रूस को दिक्कत आएगी। उस वक्त 'गली' की लड़ाई खतरनाक होगी। वहां पर रूस ड्रोन अटैक कर सकता है।"
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एक अन्य रक्षा विशेषज्ञ ले.जन. संजय कुलकर्णी (रिटायर्ड) ने कहा है कि पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को बहकाया जा रहा है। रूस ने यूक्रेन की पूरी तरह से घेराबंदी कर ली है। यूक्रेन में मार्शल लॉ लगा है। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर भेजा जा रहा है। महिलाओं बच्चों को बाहर भेजा गया है। कीव में हालत नाजुक हैं। बिल्डिंग में मशीनगन लगी हैं। अर्बन वॉरफायर का नंबर आ गया है। मौजूदा हालात बताते हैं कि एक सप्ताह में रूस का कब्जा हो जाएगा। रूस मौका दे रहा है कि शहर खाली करो। रूस में 'सत्य मर जाता है' की थ्योरी साबित हो गई है। नेताओं के बयानों में झूठ दिखाई पड़ता है। यूक्रेन ने रूस पर वैक्यूम बम इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इसका दूसरा नाम 'मदर ऑफ ऑल बम' है। अमेरिका ने अफगानिस्तान में इसका इस्तेमाल किया था।
विंग कमांडर अभिषेक मतिमान (रिटायर्ड) के अनुसार, विश्व के देशों में लड़ाई रोकने की बात कोई नहीं कर रहा। ऐसी बातचीत का क्या फायदा, जिसमें लड़ाई नहीं रोकी जा सकी। पुतिन को रोका जाए। इसके लिए विश्व के सभी बड़े नेताओं को फोन करना चाहिए। अभी दो चार नेता पुतिन को फोन कर रहे हैं। इससे काम नहीं चलेगा। खासतौर से, बड़े देश आगे आएं तो अच्छा है। वे नेता लड़ाई को बंद करा सकते हैं।
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प्रसाद के मुताबिक, यूक्रेन में एयर पावर को लेकर कोई ठोस रणनीति दिखाई नहीं पड़ रही। हवाई जहाजों की मदद पहुंचाने के लिए पश्चिम देशों ने अब प्लान बनाया है। कहा जा रहा है, दूसरे देशों से यूक्रेन के पायलट एयरक्राफ्ट लाएंगे। यहां बड़ी बात ये है कि अगर वे एयरक्राफ्ट ले भी आए तो उन्हें कहां से उड़ाएंगे। रूस की सेना ने यूक्रेन के सारे एयर फील्ड नष्ट कर दिए हैं। सारे एयरपोर्ट खत्म हो गए हैं। यूक्रेन का एयर स्पेस पूरी तरह से रूस के हाथ में आता जा रहा है। भले ही रूस और यूक्रेन में बातचीत चल रही है, लेकिन अब रूस को खदेड़ना बहुत मुश्किल है। वह काफी आगे बढ़ चुका है। अब तो ग्राउंड पर वेस्टर्न साइड की तरफ रूस आ गया है। वहां बमबारी कर रहा है। उस इलाके को अलग थलग करने का प्रयास कर रहा है। वेस्टर्न क्षेत्र भी अब लड़ाई का केंद्र बन गया है।
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उन्होंने कहा, "अब यह लड़ाई गलियों में होगी। छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंचेगी। इसके लिए रूस की सेना अब 'ड्रोन' का इस्तेमाल करेगी। अभी तक की लड़ाई में कोई भी 'ड्रोन' हमला सामने नहीं आया है। ले. जन. शकर प्रसाद (रिटायर्ड) कहते हैं, जब मिलिट्री रणनीति की बात हो रही है तो रूस हर तरह के हथियार और उपकरणों का इस्तेमाल करेगा। हालांकि रूस 'कीव और खारकीव' को पूरी तरह से खत्म नहीं करना चाहता। उसे इतना तो मालूम है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति की अपील पर स्थानीय लोग देश छोड़ कर नहीं जा रहे। उन्होंने हथियार भी उठा लिए हैं। ऐसे में जब पूरी तरह के कब्जे की बात होगी तो रूस को दिक्कत आएगी। उस वक्त 'गली' की लड़ाई खतरनाक होगी। वहां पर रूस ड्रोन अटैक कर सकता है।"
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एक अन्य रक्षा विशेषज्ञ ले.जन. संजय कुलकर्णी (रिटायर्ड) ने कहा है कि पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को बहकाया जा रहा है। रूस ने यूक्रेन की पूरी तरह से घेराबंदी कर ली है। यूक्रेन में मार्शल लॉ लगा है। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर भेजा जा रहा है। महिलाओं बच्चों को बाहर भेजा गया है। कीव में हालत नाजुक हैं। बिल्डिंग में मशीनगन लगी हैं। अर्बन वॉरफायर का नंबर आ गया है। मौजूदा हालात बताते हैं कि एक सप्ताह में रूस का कब्जा हो जाएगा। रूस मौका दे रहा है कि शहर खाली करो। रूस में 'सत्य मर जाता है' की थ्योरी साबित हो गई है। नेताओं के बयानों में झूठ दिखाई पड़ता है। यूक्रेन ने रूस पर वैक्यूम बम इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इसका दूसरा नाम 'मदर ऑफ ऑल बम' है। अमेरिका ने अफगानिस्तान में इसका इस्तेमाल किया था।
विंग कमांडर अभिषेक मतिमान (रिटायर्ड) के अनुसार, विश्व के देशों में लड़ाई रोकने की बात कोई नहीं कर रहा। ऐसी बातचीत का क्या फायदा, जिसमें लड़ाई नहीं रोकी जा सकी। पुतिन को रोका जाए। इसके लिए विश्व के सभी बड़े नेताओं को फोन करना चाहिए। अभी दो चार नेता पुतिन को फोन कर रहे हैं। इससे काम नहीं चलेगा। खासतौर से, बड़े देश आगे आएं तो अच्छा है। वे नेता लड़ाई को बंद करा सकते हैं।