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तालिबान का राज: ये हैं 6 रास्ते जिनसे कसी जाएगी अफगानिस्तान में नए शासन की नकेल
Fri, 03 Sep 2021 07:01 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला रिसर्च टीम
अमर उजाला रिसर्च टीम
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 03 Sep 2021 07:01 AM IST
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सार
- अफगान का खाने-पीने, ईंधन और कपड़ों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है
- तालिबान भले ही किसी भी देश से जोड़-तोड़ कर ले पर पैसों के लिए उसे अमेरिका का ही मुंह देखना पड़ेगा
- अफगानिस्तान के प्रवासी कामगारों द्वारा भेजी जाने वाली रकम (रेमिटेंस) पर भी काफी निर्भरता है
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बैंकों के बाहर लाइन में लगे लोग
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अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका और उसके सहयोगियों ने अफगानिस्तान को भले ही तालिबान के हाथों में छोड़ दिया हो लेकिन उनके पास अब भी दबाव बनाने के कई तरीके मौजूद हैं। अमेरिकी और पश्चिमी नेताओं का मानना है कि अफगानिस्तान की खाने-पीने के सामानों से लेकर ऊर्जा और विदेशी मदद पर अत्यधिक निर्भरता के चलते तालिबान को 90 के दशक जैसा हिंसक रवैया छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
1- अमेरिका के पास खजाना
तालिबान भले ही किसी भी देश से जोड़-तोड़ कर ले पर पैसों के लिए उसे अमेरिका का ही मुंह देखना पड़ेगा। अफगान के नौ अरब डॉलर के स्वर्ण और विदेशी मुद्रा भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण है। इसमें से सात अरब डॉलर तो अकेले उसके पास रखा है। अमेरिकी सरकार ने अफगान केंद्रीय बैंक की संपत्तियों और आईएमएफ ने अपने पास रखे संसाधनों तक तालिबान की पहुंच रोक दी है।
2- आयात पर अतिनिर्भरता
अफगान का खाने-पीने, ईंधन और कपड़ों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। विश्व बैंक के मुताबिक, अकेले 2019 में इसने 8.6 अरब डॉलर का सामान मंगाया था। 70 फीसदी बिजली बाहर से आती है। तालिबान अपने दम पर इतना आयात खर्च नहीं उठा सकता।
3- विदेशी मदद
विश्व बैंक और आईएमएफ में दखल के कारण अमेरिका की इसमें भी बड़ी भूमिका है। 15 अगस्त से पहले अफगानिस्तान को कुल 8.5 अरब डॉलर की सालाना मदद मिली, जो सकल घरेलू उत्पाद का 43 फीसदी है। इस मदद की वापसी तालिबान के बर्ताव पर ही निर्भर करेगी।
4- वित्तीय प्रतिबंध
तालिबान और उसके नेता अमेरिकी व संयुक्त राष्ट्र वित्तीय संस्थानों के प्रतिबंधों के अधीन हैं। पश्चिमी संस्थान पहले से ही उसके साथ कारोबार नहीं करना चाह रहे हैं। अमेरिकी राजकोष अधिकारियों का कहना है कि ज्यादा लेनदेन की छूट उसके उदार शासन और मानवाधिकार रक्षा पर ही दी जा सकती है।
5- नकदी प्रवाह
अफगान के 12 बैंकों को डॉलर में लेनदेन के लिए विदेशी बैंकों की जरूरत है। प्रतिबंध उल्लंघन से बचने के लिए विदेशी बैंकों ने अफगान बैंकों की मदद बंद कर दी है। ऐसे में अफगान-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स ने अमेरिका से सीमित नकदी प्रवाह की इजाजत देने की आग्रह किया है।
6- बाहर से भेजी जाने वाली रकम
अफगानिस्तान की प्रवासी कामगारों द्वारा भेजी जाने वाली रकम (रेमिटेंस) पर भी काफी निर्भरता है, जिसका जीडीपी में चार फीसदी योगदान है। पैसा ट्रांसफर करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी फर्म, वेस्टर्न यूनियन और मनीग्राम ने अफगानिस्तान के लिए सेवाएं बंद कर दी हैं। काफी परिवार इसी पैसे से अपना गुजारा करते हैं। लेकिन इन सेवाओं को खोलने के लिए अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंधों में ढील की जरूरत पड़ेगी , जो तालिबान पर शर्तों के साथ ही मुमकिन है।
अगले 48 घंटे में संचालित होने लगेगा काबुल एयरपोर्ट
तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के उप प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई ने दावा किया, काबुल स्थित हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 48 घंटे में हवाई संचालन शुरू हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैध यात्रा दस्तावेज वाले लोगों को देश छोड़कर जाने की इजाजत दी जाएगी। एयरपोर्ट को पूरी तरह सही करने में करीब 2.5 से 3 करोड़ डॉलर का खर्च आएगा। कतर एयरपोर्ट के संचालन में मदद कर रहा है।