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क्या वाकई फायदेमंद साबित होगा मोदी का दिया उपहार?

Fri, 12 Dec 2014 01:16 PM IST
Updated Fri, 12 Dec 2014 01:16 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया है।

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योग दिवस का सुझाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण में दिया था और उसके तीन महीने के अंदर ही संयुक्त राष्ट्र ने भारी बहुमत से योग को गले लगा लिया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत अशोक मुखर्जी ने बताया कि जिस तरह का समर्थन इस प्रस्ताव को मिला वो अपने आप में एक कीर्तिमान है।

उनका कहना था, ''जब हम ये प्रस्ताव लेकर आए तभी 130 देश हमारे साथ आ गए थे और अब जब ये पारित हो गया है तो हमारे साथ 175 देश हैं। ये दिखाता है कि इस मामले पर साथ आने की बड़ी दबी इच्छा थी।''
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संयुक्त राष्ट्र में एक और उच्च भारतीय अधिकारी प्रकाश गुप्ता ने बताया कि अब समर्थक देशों की संख्या 177 हो गई है और अभी कुछ अन्य देश भी जुड़ सकते हैं।

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'भारत का उपहार'

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प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में योग को दुनिया के नाम भारत का उपहार कहा था। उन्होंने योग को जलवायु परिवर्तन के हल की तरह भी पेश किया था।

लेकिन जहां मोदी का योग प्रकृति के साथ लय बिठाने वाली जीवनशैली की बात करता है और उसी के ज़रिए जलवायु परिवर्तन की समस्या पर लगाम कसने की बात करता है, वहीं दुनिया के कई हिस्सों में ये लुलुलेमन पैंट्स और चमकदार स्टूडियोज़ में चल रहा अरबों डॉलर का उद्योग है।

न्यूयॉर्क शहर के बीचोबीच बने गणेश मंदिर में योग कक्षाएं बिल्कुल पारंपरिक अंदाज़ में चलती हैं। सुबह के वक्त बिल्कुल अंधेरा सा है और उसी रोशनी में काले, गोरे, भूरे, महिला-पुरूष सभी योग के जटिल आसनों पर महारत हासिल करने में लगे हैं।

उन्हीं में से एक हैं हिंदू अमेरिकन फ़ाउंडेशन की शीतल शाह। उनका कहना है कि बदलते मौसम को रोकने में वही योग कामयाब हो सकता है जिसकी जड़ें हिंदू दर्शन से निकलती हों।

वो कहती हैं, ''मुझे नहीं लगता कि सभी अलग-अलग योग के तरीके सही मायने में योग हैं। गीता में चार तरह के योग का ज़िक्र है जिसमें से एक है कर्मयोग। उसके तहत हम क्या करते हैं, किस तरह की सोच के साथ करते हैं वो सही मायने में जलवायु पर असर डाल सकता है।''

योग और जलवायु परिवर्तन

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इस तरह के बहुत सारे योग स्कूल हैं जो काफ़ी हद तक मोदी के योग दर्शन से मेल खाते हुए नज़र आते हैं, लेकिन कई ऐसे भी हैं जिन्होंने योग की भारतीय जड़ों को उखाड़ फेंका है। ऐसे में योग के ज़रिए बदलते मौसम को काबू में लाने के बारे में उनकी क्या सोच है?

तारा स्टाइल्स योग की दुनिया में एक तरह की बागी कहलाती हैं। वो एक सफल मॉडल और अमेज़न पर सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताबों में से एक—'स्लिम, काम ऐंड सेक्सी' की लेखिका तो हैं ही, उन्होंने स्ट्राला के नाम से योग का एक अलग ब्रांड ही लॉन्च कर रखा है।

उनका कहना है, ''जब मैं और मेरे दोस्त बड़े हो रहे थे, योग के बारे में कंफ़्यूज़न सा था, क्या इसमें लचीलापन है, इसमें हमारे धर्म के साथ टकराव तो नहीं है। मैंने योग किया था और इसके फ़ायदों से परिचित थी कि ये कैसे हमें एक-दूसरे से सकारात्मक तरीके से जोड़ता है और इसलिए मैं कुछ ऐसी चीज लाना चाहती थी जो मेरे दोस्तों और परिवार के लिए हो।''

तारा स्टाइल्स का कहना है कि योग लोगों को अपने आस-पास की जिंदगी के प्रति सजग बनाता है और इसलिए जलवायु परिवर्तन को रोकने में कारगर हो सकता है।

कहती हैं, ''जलवायु परिवर्तन कोई ऐसा अजूबा नहीं है जिसके बारे में हम कुछ कर नहीं सकते। हमने जो चीजें चुनी हैं ये उस वजह से है और और अगर हम उन्हें बदल सकें तो ये बड़ी बात होगी।''

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