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'नए शीत युद्ध के मुहाने पर है दुनिया'
Updated Sun, 09 Nov 2014 08:00 AM IST
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पूर्व सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोफ का कहना है कि दुनिया एक और शीत युद्ध के मुहाने पर खड़ी है और रूस से बातचीत करके विश्वास बहाल किया जाना चाहिए।
बर्लिन की दीवार गिराए जाने की पचीसवीं बरसी पर आयोजित एक सामरोह में बोलते हुए 83 वर्षीय गोर्बाचोफ ने कहा, "पश्चिमी देशों ने अपनी कामयाबी की अति के आगे घुटने टेक दिए हैं।"
उन्होंने कहा कि इसी वजह से वैश्विक शक्तियां यूगोस्लाविया, मध्य पूर्व और अब यूक्रेन के संघर्षों से निबटने में नाकाम रही हैं।
गोर्बाचोफ ने रूस के साथ बातचीत के ज़रिए विश्वास बहाल किए जाने और यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूसी नेताओं और उद्योगपतियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने पर भी जोर दिया।
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उन्होंने मध्यपूर्व एशिया और यूरोप में जारी ताजा संघर्षों को चेतावनी करार दिया। सोवियत संघ का हिस्सा रहे यूक्रेन को लेकर पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव है।
रूस समर्थक लड़ाकों और यूक्रेन की सेनाओं के बीच जारी हिंसा में अब तक चार हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। रूस समर्थक लड़ाकों ने पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क और लोहांस्क इलारके पर कब्जा कर लिया है।
सितंबर से एक नाजुक संघर्षविराम भी जारी है लेकिन पिछले हफ़्ते विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाकों में हुए चुनाव के बाद फिर से हिंसा शुरू होने का खतरा बढ़ गया है।
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बर्लिन की दीवार गिराए जाने की पचीसवीं बरसी पर आयोजित एक सामरोह में बोलते हुए 83 वर्षीय गोर्बाचोफ ने कहा, "पश्चिमी देशों ने अपनी कामयाबी की अति के आगे घुटने टेक दिए हैं।"
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उन्होंने कहा कि इसी वजह से वैश्विक शक्तियां यूगोस्लाविया, मध्य पूर्व और अब यूक्रेन के संघर्षों से निबटने में नाकाम रही हैं।
गोर्बाचोफ ने रूस के साथ बातचीत के ज़रिए विश्वास बहाल किए जाने और यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूसी नेताओं और उद्योगपतियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने पर भी जोर दिया।
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उन्होंने मध्यपूर्व एशिया और यूरोप में जारी ताजा संघर्षों को चेतावनी करार दिया। सोवियत संघ का हिस्सा रहे यूक्रेन को लेकर पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव है।
रूस समर्थक लड़ाकों और यूक्रेन की सेनाओं के बीच जारी हिंसा में अब तक चार हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। रूस समर्थक लड़ाकों ने पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क और लोहांस्क इलारके पर कब्जा कर लिया है।
सितंबर से एक नाजुक संघर्षविराम भी जारी है लेकिन पिछले हफ़्ते विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाकों में हुए चुनाव के बाद फिर से हिंसा शुरू होने का खतरा बढ़ गया है।