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सीरिया, यूक्रेन के बाद रूस की नजर अफगानिस्तान पर टिकी
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन/ काबुल
Updated Thu, 05 Jan 2017 04:59 AM IST
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- फोटो : getty image
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सीरिया और यूक्रेन में अपना परचम लहराने से उत्साहित रूस की नजरें अब अफगानिस्तान पर टिक गई हैं। अफगानिस्तान में रूस की बढ़ती इस दिलचस्पी से कई विश्लेषक हैरान हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के मुताबिक कई सालों तक अफगानिस्तान में जारी संकट से दूरी बनाने के बाद रूस द्वारा अचानक यहां रूचि लेना भविष्य में अमेरिका के साथ संकट खड़े कर सकता है। इस क्षेत्र में नए
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भू-राजनीतिक समीकरण संकेत देते हैं कि रूस ने अब तटस्थ ना रहने का फैसला किया है।
हाल में अफगानिस्तान के मुद्दे पर मॉस्को में रूस, चीन और पाकिस्तान की बैठक के दौरान अफगानिस्तान पर रूस की बढ़ती दिलचस्पी का इस बात का साफ संकेत है। संकेत हैं कि रूस इन दिनों तालिबान के संपर्क में है। विश्लेषकों के मुताबिक रूस को लगता है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी नीतियां नाकाम हो गई हैं और इसीलिए वह हस्तक्षेप कर रहा है। रूस को आशंका है कि इराक और सीरिया के बाद अफगानिस्तान अब इस्लामिक स्टेट के लिए नई सुरक्षित पनाहगाह बन सकता है और रूस नहीं चाहता है कि मध्य एशिया के पड़ोस में आईएस दोबारा पनपे।
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प्रसिद्ध अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने अफगान और पश्चिमी अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि रूस अफगान सरकार और तालिबान से अलग हो चुके गुलबुद्दीन हिकमतयार के बीच समझौता नहीं होने दे रहा था, लेकिन उसने पिछले साल अफगान सरकार के साथ यह शांति समझौता कर लिया।
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अब अफगानिस्तान चाहता है कि हिकमतयार का नाम संयुक्त राष्ट्र की काली सूची से हटा दिया जाए, लेकिन रूसी अधिकारी इसमें बाधा डाल रहे हैं। वॉशिंगटन स्थित वूड्रो विल्सन इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्कॉलर्स के विशेषज्ञ माइकल कूगलमेन ने बताया कि रूस अब अफगानिस्तान में चल रहे घटनाक्रम का दोबारा हिस्सा बनना चाहता है। पश्चिमी अधिकारियों का कहना है कि रूस और तालिबान के रिश्ते बहुत आगे निकल चुके हैं।