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धर्म के नाम पर क्यों बढ़ रही दुनिया भर में तकरार

Mon, 20 Jan 2014 03:22 PM IST
Updated Mon, 20 Jan 2014 03:22 PM IST
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Why in the name of religion is growing worldwide wrangling

अमेरिकी शोध संस्था पिउ रिसर्च सेंटर के एक अध्ययन के मुताबिक़ दुनिया भर में मज़हब की वजह से पैदा होने वाले सामाजिक तकरार में बढ़ोतरी हुई है। इस शोध में विश्व के 198 देशों को आधार बनाया गया था और इसमें साल 2007 से 2012 के आंकड़ों को शामिल किया गया। शोध में पाया गया कि इनमें से अब एक तिहाई मुल्क ऐसे हैं जहां धर्म के आधार पर पनपा सामाजिक विद्वेष बढ़ा है।

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साल 2011 में ऐसे देशों या क्षेत्रों की संख्या महज़ 29 फीसद थी। शोध में ये भी पाया गया कि कई क्षेत्र जैसे यूरोप के कुछ ऐसे मुल्क हैं जहां धर्म पर लगाई गई सरकारी पाबंदी में भी इज़ाफा हुआ है।
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रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाले मुल्कों में पाकिस्तान, बर्मा, मिस्र, इंडोनेशिया और रूस में लोगों को साल 2012 में सबसे ज़्यादा धार्मिक विद्वेष का सामना करना पड़ा।
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एशिया के मुल्कों में बर्मा में मज़हब की बुनियाद पर सामाजिक विद्वेष के मामलो में बहुत तेज़ी से उछाल आया।

अल्पसंख्यकों पर हमले

Why in the name of religion is growing worldwide wrangling

बर्मा के पश्चिमी तट पर बसे राखीन सूबे में मुस्लिमों पर स्थानीय बौद्धों के हमले लगातार होते रहे हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कम से कम एक लाख लोग बेघर हो चुके हैं।

एशिया के एक दूसरे बौद्ध बाहुल्य देश श्रीलंका भी में अल्पसंख्यक मुस्लिम और ईसाई समुदाय पर हमलों की तादाद मे तेज़ी आई।

अप्रैल 2012 में दंबुला की एक मस्जिद को निशाना बनाया गया तो कुछ ही महीने बाद देनियाया में मौजूद एक चर्च पर हमला कर उसे बौद्ध मंदिर में तबदील कर दिया गया।

उधर अफ्रीकी देशों में, जहां मौजूद सत्ता के ख़िलाफ़ विद्रोह के झंडे बुलंद हो रहे थे, ईसाई धार्मिक स्थलों, क्लिक करें अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक संस्थानों पर हमले किए गए और लोगों की हत्याएं भी हुईं।

मिस्र में सरकार के माध्यम से धार्मिक पाबंदियां लगाने का मामला सबसे ज़्यादा नज़र आया।

पाकिस्तान में पीड़ित हिंदू

Why in the name of religion is growing worldwide wrangling

भारत के कर्नाटक में युवाओं की एक डांस पार्टी पर हिंदू जागरण वैदिक के हमले का जिक्र उन मामलों के बीच किया गया है जिनमें संस्कृति या अपनी मान्यता मनवाने के नाम पर जोर जबरदस्ती की गई। इस तरह के मामलों का जिक्र सोमालिया और वियतनाम के संबंध में भी किया गया है।

पाकिस्तान में धर्म के आधार पर फैले सामाजिक विद्वेष में पहले के मुकाबले कोई कमी नहीं आई और वो इस तरह के देशों की सूची में साल 2012 में भी सबसे ऊपर रहा। वहां हिंदुओं की लड़कियों को जबरन मुसलमान बनाकर शादी करवाए जाने के एक मामले में धनबाई नाम की एक महिला ने बीबीसी को बताया कि उनकी बेटी एक दिन काम पर कई तो वापस ही नहीं आई। बाद में पता चला कि उसकी शादी हो गई।

मजबहबी विद्वेष की वजह से क्लिक करें औरतों को निशाना बनाये जाने के मामले में चीन का भी जिक्र हुआ है जहां चंद मुस्लिम औरतों के नकाब को मुंह से नोच लिया गया। शोध में ये भी पाया गया कि मुसलमानों और यहूदियों पर होने वाले हमलों में तेज़ी आई है।

पाकिस्तान को विश्व की बड़ी आबादी वाले उन देशों में बताया गया है जहां लोगों को 2012 में सबसे ज़्यादा धार्मिक विद्वेष का सामना करना पड़ा।

लाहौर स्थित मानवधिकार कार्यकर्ता ए रहमान का कहना है कि पाकिस्तान की जनता और सरकार इस मामले को लेकर चिंतित है। दीगर बात है कि वहां के कई कानून भी अल्पसंख्यको और कई लोगों के ख़िलाफ़ हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सरकार बहुसंख्यकों की नाराजगी के डर से कोई सख्त फैसले नहीं लेती।

जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के पूर्व प्रोफेसर पुष्पेश पंत का कहना था कि बर्मा में पहले इस तरह के मामले सामने नहीं आते थे क्योंकि वहां मीडिया पर कई तरह की पाबंदिया थीं।

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