खतरे में दुनियाभर के 93 प्रतिशत बच्चों का स्वास्थ्य, छह लाख बच्चों की हो चुकी मौत : डब्ल्यूएचओ
देश की राजधानी दिल्ली में पिछले दो हफ्तों के दौरान पीएम 2.5 खतरनाक स्तर पर चला गया है। इस बीच सोमवार को जारी हुई विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में भारत जैसे कम और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में पांच साल से कम उम्र के 98 फीसदी बच्चे अतिसूक्ष्म कण (पीएम) से पैदा वायु प्रदूषण के शिकार हुए।
डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी इस रिपोर्ट का नाम ‘एयर पॉल्यूशन एंड चाइल्ड हेल्थ : प्रिस्क्राइबिंग क्लीन एयर’ है। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में 15 साल से कम उम्र के 6 लाख बच्चों की मौत घरेलू और बाहरी वायु प्रदूषण के संयुक्त प्रभावों के कारण हुई थी।
उच्च आय वर्ग देशों में 52 फीसदी बच्चे इसकी जद में
डब्ल्यूएचओ ने अपने अध्ययन में कहा कि निम्न और मध्यम आय वर्ग के देशों में पांच साल से कम उम्र के 98 फीसदी बच्चे जबकि उच्च आय वर्ग के देशों में 52 फीसदी बच्चे डब्ल्यूएचओ वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों के सामान्य से ऊपर के स्तर पर पीएम 2.5 का सामना कर रहे हैं।
वहीं वैश्विक स्तर पर, दुनिया भर के 18 साल से कम उम्र के 98 फीसदी बच्चे डब्ल्यूएचओ वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों के सामान्य से ऊपर के स्तर पर घर से बाहर पीएम 2.5 का सामना कर रहे हैं। इनमें पांच साल की उम्र के 63 करोड़ बच्चे और 15 साल से कम उम्र के 1.8 अरब बच्चे शामिल हैं।