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ली कचीयांग: कड़ी मेहनत से शीर्ष तक का सफर
बीबीसी
Updated Sun, 19 May 2013 05:43 PM IST
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ली कचीयांग का राजनीतिक करियर बेहद दिलचस्प रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के एक साधारण मजदूर के रूप में अपना सफ़र पूरा करने वाले ली कचीयांग की पहचान अब दुनिया की सबसे ज़्यादा घनी आबादी वाले देश चीन के प्रमुख नेताओं में दूसरे पायदान के नेता के तौर पर की जाती है।
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57 साल के कचीयांग का ताल्लुक भी एक सामान्य परिवार से रहा है और उन्हें समाज के पिछड़े तबके का ख़्याल रखने वाला माना जाता है। उन्हें चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ का क़रीबी माना जाता है क्योंकि दोनों पार्टी की युवा लीग के कार्यकर्ता थे।
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पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति का एक सदस्य रहने के साथ ही वह उप प्रधानमंत्री भी रहे। वेन जियाबाओ के बाद उन्होंने चीन के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली।
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'ख़राब किस्मत वाला'
ली का जन्म वर्ष 1955 में अनख्वे प्रांत में हुआ और वह एक स्थानीय अधिकारी के पुत्र थे।
ऐसा माना जाता है कि उनके पिता ने स्थानीय पार्टी के नेतृत्व के लिए उन्हें तैयार करने की पेशकश की जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। उन्होंने एक कम्यून में वक्त बिताने के बाद कानून की पढ़ाई करने के लिए बेजिंग के प्रतिष्ठित पीकिंग विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।
वह 1976 में पार्टी में शामिल हुए और 1978 से 1982 तक विश्वविद्यालय के छात्र संघ के प्रमुख के तौर पर वह छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए।
स्नातक करने के बाद उन्होंने पार्टी के शीर्ष स्तर तक पहुंचने के लिए धीरे-धीरे काम करना शुरू कर दिया। कचीयांग अंग्रेजी भाषा के भी अच्छे जानकार हैं और उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी की है।
1980 के दशक में वह पार्टी की युवा लीग की शीर्ष श्रेणी में शामिल हुए थे जब हू जिंताओं संगठन के प्रमुख थे। ली को 1998 में हेनान प्रांत में पार्टी के उप सचिव के तौर पर चुना गया और वह 2004 में ल्याओनिंग प्रांत में पार्टी के सचिव बने।
वह चीन के सबसे युवा प्रांतीय गवर्नर बने जब उन्हें हेनान प्रांत की जिम्मेदारी दी गई।
ग्रामीण और सघन आबादी वाले प्रांत में उनके कार्यकाल के दौरान कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं जिनमें आग लगने, दूषित रक्त से एचआईवी फैलने जैसे हादसे शामिल हैं। इसी वजह से उन्हें ख़राब किस्मत वाला माना गया।
हालांकि वह हेनान प्रांत की अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने में सफल रहे। चीन में आर्थिक सुधार शुरू होने पर औद्योगिक प्रांत ल्याओनिंग की दिक़्कतें शुरू हुई तो कचीयांग ने इस प्रांत को नए सिरे से उभारने की कोशिश की जिससे कई लोग प्रभावित हुए।
आम धारणा यही थी कि हू जिंताओं की नज़र में उनकी जगह लेने वाले सबसे पसंदीदा उम्मीदवार ली ही थे लेकिन शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति बन गए।
‘सचेत’ नेता
ली को वेन जियाबाओं की तरह ही दोस्ताना ताल्लुक रखने वाले राजनीतिज्ञ के तौर पर माना जाता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि चीन को आर्थिक सुधार के मसलों से जुड़ी उनकी समझ की जरूरत पड़ सकती है।
लेकिन दूसरी ओर उनकी छवि बेहद सक्रिय नेता वाली नहीं रही है।
सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के ईस्ट एशियन इंस्टीट्यूट के एक वरिष्ठ शोधार्थी का कहना है, “शी जिनपिंग की तुलना में ली कचीयांग कुछ ज्यादा ही सचेत हैं। दोनों के काम करने की अलग शैली है।”
उनका कहना है कि कुलीन घराने से ताल्लुक रखने वाले शी में जहां आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा है वहीं ली ज़्यादा सख़्त नहीं माने जाते हैं। शायद यही वजह है कि कचीयांग अभी जिस जगह पर हैं उन्हें वहां तक पहुंचने के लिए सालों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
व्हिसल ब्लोइंग वेबसाइट विकीलीक्स ने अमरीकी दस्तावेज़ों के हवाले से ली को दिलचस्प और पक्की जानकारी रखने वाला बताया है। वर्ष 2007 में उन्होंने अमरीकी राजदूत के साथ एक निजी बातचीत में कहा कि चीन के आर्थिक आंकड़े भरोसेमंद नहीं हैं और यह चेतावनी दी कि आम जनता के गुस्से और नाराज़गी की प्रमुख वजह भ्रष्टाचार है।
जनवरी में उनका यूरोप दौरा भी सुर्खियों में रहा और बाद में चीन ने यूरोप के साथ गठजोड़ कायम करने की शुरुआत भी कर दी। उन्होंने अपना संदेश दिया कि अगर चीन और यूरोप अपने अनुकूल विकास मॉडलों के जरिये सफलता हासिल करते हैं तो दुनिया में और सौहार्द और संपन्नता क़ायम होगी।
ली के निजी जीवन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है। स्थानीय मीडिया का कहना है कि उन्होंने बेजिंग की एक प्रोफेसर से शादी की है और उनकी एक बेटी भी है जो अमरीका में पढ़ाई कर रही है।