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जहां 'आई लव यू' कहना नामुमकिन है...

Sat, 31 Aug 2013 10:50 AM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Sat, 31 Aug 2013 10:50 AM IST
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where impossible to say i love you

बिल हेयटन वियतनाम में बीबीसी के संवाददाता थे लेकिन कम्युनिस्ट देश में विद्रोहियों पर उनकी रिपोर्टिंग के चलते उन्हें वियतनाम छोड़ना पड़ा। लेकिन इस देश के बारे में वो कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं।

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वियतनामी भाषा में 'आई लव यू कहना' नामुमकिन है और इसकी वजह यह भी नहीं है कि वियतनामी लोगों में इश्क के जज़्बात नहीं होते।

यह जान कर आपको हैरत हो सकती है कि उनकी जुबान में 'मैं' और 'तुम' जैसे कोई शब्द ही नहीं हैं।

लोग एक दूसरे से बात करते वक्त सामने वाले की उम्र और रिश्ते के लिहाज से संबोधन की शुरुआत के लिए शब्दों का चयन करते हैं।

इसे कुछ उदाहरणों से समझा जा सकता है। वियतनाम में बड़े भाई के लिए 'अन्ह', बड़ी बहन के लिए 'ची' और छोटे भाई बहनों के लिए 'एम' शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
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यही वजह है कि ज्यादातर वियतनामी अजनबियों से जल्दी से उनकी उम्र पूछ लेते हैं ताकि वे उन्हें उम्र के लिहाज़ से वाजिब तरीके से इज्जत देकर बातचीत की जा सके।
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चालीस शब्द
वियतनाम में लोग कुछ इस तरह से अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं, "बड़ा भाई छोटी बहन के लिए स्नेह रखता है।"

किसी स्थिति में अगर स्त्री बड़ी हुई तो भावनाएँ इस तरह से व्यक्त की जाएंगी, "बड़ी बहन छोटे भाई को मानती हैं।"

लेकिन ऐसा माना जाता है कि महिलाएँ 'एम' से ही पुकारा जाना पसंद करती हैं चाहे उनकी उम्र कुछ भी क्यों न हो।

वियतनाम की बोलचाल की भाषा में 40 ऐसे शब्द हैं जो लोगों के रिश्ते बयान करते हैं। इन शब्दों से लोगों की उम्र और उनकी स्थिति का पता चलता है।

इनमें से ज्यादातर का उच्चारण अंग्रेजी की तुलना में वियतनामी में बेहतर होता है।

पैरिस फैशन शो
लम्बी जुल्फों और रेशमी परिधान पहन कर करीने से साइकिल चलाती हुई वियतनामी महिलाओं की तस्वीरें लाखों पोस्ट कार्डों और पेंटिंग्स में छपी और लोगों ने इसे खरीदा होगा।

वियतनामी महिलाओं के इन कपड़ों को 'ओ ज़िह' कह कर पुकारा जाता है। महिलाएँ इसे औपचारिक मौकों पर या होटलों या किसी ऐसी ही जगहों पर काम करते वक्त पहनती हैं।


इस कपड़े का चलन 18वीं सदी में शुरू हुआ था और वक्त के साथ इनके लिबास में कई बदलाव भी हुए। इसके मौजूदा स्वरूप की प्रेरणा 1920 के पैरिस फैशन शो से ली गई है।

ये वो जमाना था जब वियतनाम फ्रांस का उपनिवेश हुआ करता था।

राष्ट्रीय पोशाक
हनोई स्थित 'इंडोचाइना स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स' के फ्रांस में ट्रेनिंग पाए एनसी त्वांग ने 1925 में इस फ्रांसीसी शैली वाले परिधान को फिर से संवारा।

इसके जरिए उन्होंने विययतनामी महिलाओं की छवि को नए जमाने के मुताबिक बनाने की कोशिश की।

उनके डिजाइन किए हुए लिबास को राष्ट्रीय पोशाक की तौर पर बढ़ावा दिया गया और 50 व 60 के दशकों में इसका चलन कमोबेश पूरे देश में देखने को मिला।

हालांकि वियतनाम युद्ध के बाद के दौर में इस लिबास को पहनने का चलन कम हुआ लेकिन अब वह फिर से फैशन में लौट आया है।

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