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अरब में दाढ़ी रखने के क्या हैं मायने

Sat, 02 Feb 2013 09:10 PM IST
बीबीसी हिंदी/अशरफ़ ख़लील
बीबीसी हिंदी/अशरफ़ ख़लील Updated Sat, 02 Feb 2013 09:10 PM IST
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what meanign beard in arab

कुछ साल पहले मैं अपने माता-पिता के साथ शिकागो के नज़दीक एक मस्जिद में गया था। उन्होंने मुझे अपनी एक पुरानी पारिवारिक मित्र से मिलवाया। वह महिला मुझे बचपन से जानती थीं लेकिन उन्होंने कई सालों से मुझे नहीं देखा था।

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मुलाक़ात के वक़्त उन्होंने मेरी मां को स्नेह से गले लगा लिया और मेरे पिता से बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया। लेकिन मेरी तरफ़ मुड़ते ही उन्होंने मुझसे कुछ दूरी बना ली। उन्होंने मुझसे हाथ भी नहीं मिलाया लेकिन बड़े अजीब तरीक़े से हाथ हिला दिया।
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मेरे पिता ने उनसे पूछा कि वह मुझसे इतनी दूर क्यों खड़ी हैं तो उनका जवाब था कि वह मेरी दाढ़ी की वजह से ऐसा कर रही हैं। उन्होंने यह मान लिया था कि मेरे चेहरे की दाढ़ी इस्लामी धार्मिकता का प्रतीक है और अगर वह मुझसे हाथ मिलाने की कोशिश करेंगी तो मैं उन्हें ऐसा करने से रोक दूंगा। वैसे तो मेरे पिता को यह मालूम है कि मैं गैर-धार्मिक व्यक्ति हूं और अब भी उन्हें यह वाक़्या सबको सुनाने में मज़ा आता है।
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अरब और मुस्लिम जगत में दाढ़ी रखने का अर्थ महज़ एक स्टाइल या ख़ुद को अच्छा दिखाने की कोशिश से कहीं ज्यादा है। इसका एक समाजशास्त्रीय महत्व भी है। दाढ़ी रखने वाले लोगों से बात किए बग़ैर यह अंदाज़ा मिलता है कि आपको किनके साथ कैसे पेश आना है और वे कैसे हो सकते हैं।

अलग-अलग शैली
दाढ़ी रखने का भी अपना अंदाज़ और अलग-अलग शैली होती है। एक पत्रकार के तौर पर आपको इसकी समझ ज़रूर होनी चाहिए। मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य अमूमन संवरी हुई लंबी दाढ़ी और मूंछ रखते हैं।

बेहद रुढ़िवादी और कट्टर मुसलमान माने जाने वाले सलफ़ी लोग बेतरतीब तरीक़े से अपनी दाढ़ी बढ़ाते हैं और अक्सर वे मूंछ भी नहीं रखते। दरअसल वे पैगंबर मोहम्मद का अनुसरण करने का दावा करते हैं जो 1,400 साल पहले शायद ऐसी ही दाढ़ी रखते थे।

सलफ़ी विचारधारा के कुछ लोग थोड़ी ज़हमत उठाकर अपनी दाढ़ी को कई रंग की हिना से भी रंगते हैं। उनकी दाढ़ी कभी गहरे भूरे रंग तो कभी चमकीले नारंगी रंग की दिखती है।

मिस्र में होस्नी मुबारक का शासन ख़त्म होने के बाद दाढ़ी रखने का चलन बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है। कई सालों तक दाढ़ी को इस्लामी आंदोलन के प्रतीक के तौर पर देखा जाता था जिसे मुबारक अपनी सत्ता के लिए गंभीर ख़तरा मानते थे। उनके शासनकाल में सरकारी कर्मचारियों जिनमें पुलिस अधिकारी से लेकर इजिप्ट एयर के पायलट शामिल हैं, उन्हें दाढ़ी रखने की मनाही थी।

'नागरिक अधिकार'
लेकिन अब देश भर में नागरिक सेवा से जुडे़ लोग ऐसे प्रतिबंध को ख़त्म करने की मांग कर रहे हैं। अचानक ही मिस्र में दाढ़ी रखना नागरिक अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा बन गया है।

दाढ़ी राजनीतिक संदर्भ का केंद्रबिंदु भी बन गया है। पिछले कुछ महीने से राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है जो लंबे समय से मुस्लिम ब्रदरहुड अधिकारी रह चुके हैं। इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक नारा सामान्य तौर पर सुना गया, “मोरसी की दाढ़ी साफ़ करो जिसके नीचे आपको मुबारक मिलेंगे।”

दाढ़ी रखने का ताल्लुक़ केवल मुस्लिम समुदाय से ही नहीं है। ज्यादातर कॉप्टिक ईसाई पादरी और चर्च से जुड़े लोग भी लंबी दाढ़ी रखते हैं। इस साल जब नए कॉप्टिक पोप तावाद्रोस द्वितीय को चुना गया तो दाढ़ी से जुड़ा मज़ाक़ इंटरनेट पर शुरू हो गया। तावाद्रोस की दाढ़ी सबसे बड़ी सलफ़ी पार्टी के पूर्व प्रमुख इमाद अब्दल-गफ़ूर की तरह दिखती है।

दाढ़ी, मर्दानगी और सम्मान का भी एक प्रतीक है। मैं ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ द इस्लामिक कॉन्फ्रेंस के एक सत्र की मिसाल को कभी नहीं भूल सकता हूं। यह बात मार्च 2003 की है। अमरीका और ब्रिटेन के गठजोड़ वाली सेना इराक़ पर हमला बोलने ही वाली थी और तनाव काफ़ी बढ़ गया था।

उसी दौरान इराक़ का एक शख़्स और कुवैत के राजनयिक एक मैच देख रहे थे जहां काफ़ी शोर हो रहा था। इराक़ का वह व्यक्ति चीख़ते हुए बोला, “तुम्हारी मूंछों पर लानत है।” यह मेरे लिए अब तक का सबसे पसंदीदा अपमान है।

चेहरे की दाढ़ी सामाजिक पहचान से ज्यादा जीने की युक्ति भी हो सकती है। मैंने सद्दाम हुसैन के तख्तापलट के बाद इराक़ में लॉस एंजलिस टाइम्स के लिए दो साल तक रिपोर्टिंग की। वहां मेरे लिए यह बेहद अहम था कि मैं कैसा दिखता हूं क्योंकि तभी मैं कहीं भी सुरक्षित जा सकता था।

मिस्र मूल के एक अमेरिकी नागरिक होने की वजह से मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ इराक़ी उच्चारण की नक़ल नहीं कर पाता था लेकिन अनौपचारिक क़िस्म के निरीक्षण के दौरान मुझ पर किसी को कोई संदेह नहीं होता था।

मैं घंटों तक यह सोचता रहता था कि मेरी उम्र के इराक़ी पुरुष किस तरह के कपड़े और जूते पहनते हैं और उनकी दाढ़ी कैसी होती है। इराक़ के लोगों की बड़ी-बड़ी मूंछें होती हैं। मैंने भी कई महीने तक अपनी दाढ़ी बनानी छोड़ दी और इराक़ के लोगों की तरह मूंछे रखने की कोशिश की।


मुझे एहसास हुआ कि मैं सद्दाम हुसैन की तरह घनी मूंछ कभी नहीं रख सकता। मेरा यह प्रयोग तब ख़त्म हुआ जब मैंने अमरीका की यात्रा की और मेरे भाई ने मुझ पर एक निगाह डालते ही कहा कि मैं ब्रिटेन के एक संगीतकार, गायक और गीतकार फ्रेडी मरकरी की तरह दिख रहा हूं।

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