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बीते दस सालों में कितना बदला चीन?
बीबीसी
Updated Fri, 15 Mar 2013 01:05 PM IST
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एक दशक पहले जब हू जिंताओ कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चुने गए थे तो वो हिवेई के एक गांव में गए थे।
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उनके इस गांव की यात्रा से यह संदेश गया था कि वो पार्टी के ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से फिर जुड़ना चाहते हैं। इससे वो यह भी दिखाना चाहते थे कि पार्टी नेतृत्व, देश की असमानताओं को लेकर कुछ करने की इच्छा रखता है।
वर्ष 2013 में पीछे मुड़कर हू जिंताओ और वेन जियाबाओ के कार्यकाल को देखें तो लगता है कि इस महत्वाकांक्षा के पीछे अच्छी नीयत थी।
लेकिन पिछले दशकों की तुलना में चीन में आज असमानता बढ़ी है और सरकार द्वारा नियंत्रित अर्थव्यस्था के बाद भी यह बढ़ते हुए अब असहनीय स्तर पर पहुंच गई है।
कैसा रहा कार्यकाल?
सबसे अच्छी चीज़ जो राष्ट्रपति हू जिंताओ और उनके प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के कार्यकाल बारे में कही जा सकती है वह यह है कि अंतिम तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने असमानता को स्थिर रखा या बढ़ने नहीं दिया।
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लेकिन वर्ष 2005 में आयोजित पार्टी की एक बैठक में आर्थिक विकास की जगह व्यापक विकास को गंतव्य बनाकर चलने की जो चर्चा हुई थी, लगता है वह अब कहीं खो गई है।
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हू जिंताओ अब सार्वजनिक जीवन से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनके कार्यकाल की उपलब्धियां हैं क्या-क्या?
इसका उत्तर देना आसान नहीं है, उन्होंने जो किया वह कठिन राजनीतिक परिश्रम और धैर्यपूर्ण प्रशासन का परिणाम है।
यह अतिमहत्वपूर्ण है, लेकिन ये किसी को भी रोमांचित करने में नाकाम रहा है, यहां तक की इतिहासकारों को भी।
करिश्माई नेतृत्व
दीर्घकालिक रूप से देखेंगे तो हम पाएंगे कि हू जिंताओ और वेन जियाबाओ का कार्यकाल सफल रहा है। इसने चीन को सही मायने में धनवान और महत्वपूर्ण देश बनाया है।
इस कार्यकाल ने 2008 के आर्थिक संकट के ख़तरों का सामना किया और देश की अस्मिता और महत्व का निर्माण करने में सफल रहा।
हू जिंताओ इस दौरान आम सहमति बनाने और समाज में पार्टी की विशेष जगह बनाए रखने में सफल रहे।
चीन आज 2002 की तुलना में चार गुना बड़ी आर्थिक ताकत बन चुका है। इसने हर प्रमुख क्षेत्र में विकास किया है। इसकी भू-राजनीतिक स्थिति जो भी हो लेकिन यह एक आर्थिक महाशक्ति बन चुका है।
जिन्होंने भी चीन की यात्रा की है, उन्होंने देखा होगा कि आज चीन के हर क्षेत्र में काम हो रहा है, बुनियादी संरचना से लेकर घर बनाने तक, कार का उपयोग करने वालों की बढ़ती संख्या से लेकर प्रमुख शहरों में मध्यवर्ग के बढ़ते प्रभाव और उपभोक्तावाद को दुनिया के किसी भी दूसरे हिस्से की तरह देखा जा सकता है।
हू जिंताओ और वेन जियाबाओ की इसलिए भी सराहना की जा सकती है कि उन्होंने संकट के दौर में काम किया।
वे 2008 के शुरू में आए बर्फीले तूफ़ान से निपटे, 2009 में निर्यात में आई गिरावट का सामना किया और 2008-2009 में तिब्बत और जेनिंग में भड़के असंतोष से भी निपटे।
बीजिंग ओलंपिक खेल उनके समय का महत्वपूर्ण आयोजन था लेकिन यह जियांग जेमिन की सफलता थी।
हू जिंताओं के कार्यकाल की एक उल्लेखनीय उपलब्धि जिससे उनका राजनीतिक क़द बढ़ा वह था ताइवान के साथ राजनीतिक रिश्तों में आया नाटकीय सुधार और 2008 में हुआ राष्ट्रवादी पार्टी का चुनाव।