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अमेरिकी मंत्री के बयान से भड़की हिंसा, सात मरे
बीबीसी
Updated Tue, 16 Jul 2013 10:18 PM IST
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मिस्र की राजधानी काहिरा में सोमवार रात से सुरक्षा बलों और अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों के बीच जारी संघर्ष में सात लोगों की मौत हो गई है।
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काहिरा के एक मुख्य मार्ग को बाधित कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव भी किया।
मुर्सी को सत्ता से बेदख़ल किए जाने के बाद से उनके समर्थक उनकी बहाली की मांग कर रहे हैं।
ताज़ा झड़पें उस वक़्त शुरू हुईं जब मिस्र के दौरे पर गए अमेरिका के विदेश उप मंत्री विलियम बर्न्स ने कहा कि मिस्र में लोकतंत्र को एक “दूसरा मौका” मिला है।
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अपने दौरे में बर्न्स अंतरिम सरकार के नेताओं से मिले लेकिन मुस्लिम ब्रदरहुड समेत विपक्षी नेताओं ने उनकी आलोचना की।
तीन जुलाई को एक सैन्य तख़्तापलट में मुर्सी को पद से हटा दिया गया था। सेना का कहना था कि वो मुर्सी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों की आवाज़ सुनकर ऐसा कर रही है।
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हिंसक संघर्ष
सोमवार को सैकड़ों लोगों ने नील नदी के ऊपर बने 'अक्टूबर पुल' और मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया था। इसमें ज़्यादातर लोग मुर्सी के संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य थे।
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी। प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंककर इसका जवाब दिया।
मिस्र की आपातकालीन सेवा के प्रमुख मोहम्मद सुल्तान के अनुसार दो लोग पुल के पास और पांच लोग गीज़ा में मारे गए।
सरकारी मीडिया ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खालिद अल-ख़तीब के हवाले से बताया है कि मंगलवार सुबह तक चले संघर्ष में 261 लोग घायल हुए हैं। ख़तीब के अनुसार 124 लोग अब भी अस्पताल में हैं।
मोहम्मद सुल्तान के अनुसार घायल लोगों में सुरक्षाकर्मी भी थे। मुस्लिम ब्रदरहुड का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हमला किया और गोलियां चलाईं।
वहीं सरकारी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि 401 लोगों को “शांति भंग” करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है।
पिछले हफ़्ते मुर्सी के 50 समर्थक रिपब्लिकन गार्ड कंपाउंड के बाहर सुरक्षा बलों से संघर्ष में मारे गए थे। उन लोगों को यकीन था कि अपदस्थ राष्ट्रपति को वहीं रखा गया है।
'सीसी हमें दे दो'
मिस्र की अंतरिम सरकार ने अपनी भावी योजना की घोषणा कर दी है। अगले हफ़्ते एक पैनल बनाया जाएगा जो संविधान में संशोधन की रूपरेखा बनाएगा और नए चुनाव की तारीखें तय करेगा।
लेकिन ब्रदरहुड का कहना है कि वह अस्थाई सरकार में शामिल नहीं होगा।
मुर्सी समर्थक उनकी बहाली की मांग कर रहे हैं और काहिरा के पूर्व में स्थित रबा अल-अदाविया मस्जिद और गीज़ा में काहिरा विश्वविद्यालय के बाहर चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं।
सोमवार को अमरीकी विदेश उप मंत्री ने मस्जिद का दौरा किया तो बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए।
भीड़ में से कुछ लोग चिल्लाए, “सीसी को हमें सौंप दो।” उनका आशय सेना प्रमुख अब्देल फतह अल-सीसी से था जिन्होंने मुर्सी के तख़्तापलट का नेतृत्व किया था।
बर्न्स अंतरिम राष्ट्रपति अदली मंसूर और प्रधानमंत्री हाज़ेम अल-बेब्लावी के साथ ही जनरल सीसी से भी मिले।
अमेरिका से नाराज़गी
बर्न्स ने पिछले दो हफ्तों की घटनाओं को “क्रांति के वायदे को याद करने दूसरा मौका” बताया। इससे मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों में गहरी नाराज़गी है।
उन्होंने सेना को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित गिरफ़्तारियों' से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका “स्थिर, लोकतांत्रिक, सहनशील और मिलजुल कर रहने वाले” मिस्र के लिए प्रतिबद्ध है।
लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका “किसी को उपदेश देने नहीं आया है। हम मिस्र पर अपना मॉडल थोपने की कोशिश नहीं करेंगे।”
बीबीसी संवाददाता के अनुसार अमेरिकी मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिस्र में दोनों राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों में अमेरिका के प्रति ग़ुस्सा बढ़ रहा है।
अमेरिका मिस्र में सैन्य हस्तक्षेप को तख़्तापलट कहने से बच रहा है, क्योंकि ऐसा करने पर अमेरिका की ओर से हर साल मिस्र को दी जाने वाली डेढ़ अरब डॉलर की मदद पर क़ानूनी रूप से रोक लगानी होगी। इसका मुख्य हिस्सा सैन्य सहायता के रूप में होता है।