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Video: ईरान पर 'आईएस का पहला हमला' टकराव की शुरुआत

Thu, 08 Jun 2017 05:33 PM IST
bbc
bbc Updated Thu, 08 Jun 2017 05:33 PM IST
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Video: first Terrorist Attacks in Iran, Start of confrontation
- फोटो : bbc
ईरान में पहली बार इस तरह का हमला हुआ है। हमेशा से ही ईरान को एक सुरक्षित देश माना जाता रहा है। ऐसा भी माना जाता है कि ईरान ने अपने आप को चारों ओर से सुरक्षित कर रखा है। ईरान में कोई भीतरी विद्रोह भी कभी नहीं रहा। कुछ राजनीतिक विरोध की शिकायतें जरूर आती रहीं, लेकिन ऐसी हिंसा कभी देखने को नहीं मिली। ईरान खुलकर सीरिया और इराक की सरकारों को समर्थन देता रहा है। इससे 'इस्लामिक स्टेट' जैसे बागी चरमपंथी संगठनों पर दबाव बढ़ा है। इराक और सीरिया के सुरक्षाबलों ने इस्लामिक स्टेट के कब्जे से काफी इलाका खाली भी करा लिया है। इस गठजोड़ को जवाब देने के लिए ही शायद ईरान में यह हमला हुआ है।
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लेकिन सवाल ये है कि इस्लामिक स्टेट ईरान में घुस कहां से आया?

Video: first Terrorist Attacks in Iran, Start of confrontation

क्या वो चरमपंथी अफगानिस्तान से घुसे या पाकिस्तान से? ये ही दो सीमाएं ऐसी हैं, जहां से वो आ सकते हैं। या फिर एक जरिया इराक है, जहां से वो आ सकते हैं। लेकिन इराक से ईरान में घुसना मुश्किल है। इस समय इस्लामिक स्टेट पर बहुत दबाव है और मैं समझता हूं कि इसी दबाव के कारण उन्होंने ईरान को निशाना बनाया है। दुनिया भर में शिया-सुन्नी विवाद बढ़ रहे हैं जो आने वाले समय में और भी गंभीर रूप लेंगे। ये झगड़ा कम होता दिखाई नहीं दे रहा है।

मध्यपूर्व में इस समय सुन्नियों में दो तरह की विचारधाराएं हैं- एक वहाबी सलाफी और दूसरी है अख़्वाने मुसलमीन यानी मुस्लिम ब्रदरहुड। दोनों में ही काफी प्रतिद्वंदिता है और दोनों का ही प्रभाव बढ़ रहा है। सऊदी अरब नहीं चाहता है कि इस क्षेत्र में मुस्लिम ब्रदरहुड का प्रभाव बढ़े। कतर के साथ भी राजनयिक संबंध मुस्लिम ब्रदरहुड की वजह से ही खत्म किए गए हैं, क्योंकि कतर लगातार मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन करता रहा है दूसरी ओर सऊदी अरब इराक में शिया सरकार को मान्यता नहीं देना चाहता है। भले ही वहां शिया बहुसंख्यक हों। सऊदी का मानना है कि यह क्षेत्र सुन्नियों के प्रभाव वाला है।

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ईरान समर्थित 'हिजबुल्लाह' खुले तौर पर सीरिया में अल-कायदा के खिलाफ लड़ रहा है

Video: first Terrorist Attacks in Iran, Start of confrontation
सऊदी शासक ये भी मानते हैं कि इराक का प्रजातंत्र उसके सरकार चलाने के कबायली तरीके पर असर डाल रहा है। ईरान का प्रभाव सीरिया, इराक, यमन और लेबनान में हाल के सालों में बहुत ज्यादा बढ़ा है। ये मध्यपूर्व का अहम इलाका है, जिसमें अरब देश ईरान के प्रभाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि कई जगह से आतंकवाद को समर्थन और पैसा भी मिल जाता है। ईरान समर्थित 'हिजबुल्लाह' खुले तौर पर सीरिया में लड़ रहा है और वहां इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा के खिलाफ उसने कई अभियान भी चलाए हुए हैं।

सऊदी अरब और अन्य देश आतंकवाद का तो खुलकर समर्थन नहीं करते, लेकिन उनकी चिंता ये है कि इस क्षेत्र में ईरान समर्थित गुटों का प्रभाव बढ़ रहा है जो उनके लिए स्वीकार्य नहीं है मध्य पूर्व में सऊदी अरब और ईरान दो शक्तिशाली देश हैं। सऊदी अरब आर्थिक तौर पर बहुत मजबूत है। सऊदी के साथ सैन्य गठबंधन में 50 मुस्लिम देश हैं। दूसरी ओर ईरान मध्य पूर्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ईरान तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और खुद हथियार विकसित करते हुए आत्मनिर्भर हो रहा है।
ईरान के पास क्षेत्र में सबसे बड़ी सेना भी है. ईरान के पास कैश भी बहुत है।

 
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सऊदी अरब की मुश्किल-

Video: first Terrorist Attacks in Iran, Start of confrontation
ईरान के हसन रूहानी - फोटो : bbc
इस क्षेत्र में, खासतौर से सीरिया और इराक में तेल के बड़े भंडार हैं। यहां ईरान के बढ़ते प्रभाव, खासतौर से यमन में अपनी सीमा तक सऊदी अरब नहीं बर्दाश्त करेगा। मध्य पूर्व बंटा हुआ है और इसी का फायदा कभी-कभी चरमपंथी समूह उठा लेते हैं। इस हमले के बाद ईरान के दोबारा राष्ट्रपति बने हसन रूहानी की विदेश नीति पर शायद ही कोई असर हो।

ईरान ने बाहरी देशों, खासतौर से पश्चिमी देशों से बेहतर संबंध बनाने का रणनीतिक फैसला लिया है। यूरोप से ईरान के संबंध बेहतर हो रहे हैं। अमरीका से आर्थिक प्रतिबंध हटे हैं। पश्चिमी देशों में ईरान का तेल भी जाने लगा है। इसे लेकर ईरान में दोनों पक्ष सहमत हैं। ईरान खाड़ी के देशों से भी अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन ये फिलहाल मुश्किल लगता है क्योंकि अमरीका के साथ रिश्तों में अभी तनाव है।

भारत से रणनीतिक साझेदारी?
ईरान जंग नहीं लड़ सकता, ऐसे में वह कूटनीतिक रूप से ही आगे बढ़ेगा। ईरान के भारत से भी संबंध बेहतर हो रहे हैं. हमारे ईरान के साथ मनभेद भी हैं और सहयोग भी। समस्या ये है कि ईरान भारत के साथ अपनी शर्तों पर रिश्ते रखता है। लेकिन आने वाले समय में भारत और ईरान में आतंकवाद को लेकर सहयोग काफी बढ़ेगा। 
अफगानिस्तान, ईरान, भारत और बांग्लादेश चारों ही पाकिस्तान से आने वाले आतंकवाद से पीड़ित हैं, ऐसे में इन चारों के बीच गठबंधन होने या गुट बनने की संभावना नज़र आती है। यही नहीं मध्य एशिया के देश भी पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में आने वाले समय में आतंकवाद को लेकर सहयोग और बढ़ेगा। 
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