{"_id":"56da73cd4f1c1bb3048b4b76","slug":"turkish-police-raids-opposition-paper-hours-after-take-over","type":"story","status":"publish","title_hn":"तुर्की: अखबार पर पुलिस छापा, मचा बवाल","category":{"title":"Rest of World","title_hn":"बाकी दुनिया","slug":"rest-of-world"}}
तुर्की: अखबार पर पुलिस छापा, मचा बवाल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 05 Mar 2016 11:21 AM IST
विज्ञापन
अखबार जमन के समर्थक बड़ी तादाद में दफ्तर के बाहर जमा हो गए
- फोटो : Reuters
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तुर्की में पुलिस ने विपक्ष के अखबार जमन के दफ्तरों पर छापे मारे हैं। शुक्रवार को एक अदालत ने इस अखबार को सरकार के अधीन करने का फैसला सुनाया था। यह फैसला आने के कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने इस्तांबुल में अखबार के दफ्तर में घुसी जमन के समर्थक बड़ी तादाद में दफ्तर के बाहर जमा हो गए और प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। मरीका में बसे इस्लामी धर्मगुरु फतउल्ला गुलन के हिजमत आंदोलन से इस अखबार का नजदीकी रिश्ता है। तुर्की सरकार हिजमत को 'चरमपंथी' गुट मानती है, जिसका मकसद राष्ट्रपति रीचेप तैयप एर्दोआन की सरकार को उखाड़ फेकना है। गुलन किसी समय एर्दोआन के सहयोगी थी, पर बाद में उनके रास्ते अलग-अलग हो गए।
पत्रकारों के साथ सलूक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्की सरकार की काफी आलोचना होती रही है। पत्रकार इमरे सोनकैन ने ट्वीट किया, "तुर्की सरकार ने देश की अंतिम विरोधी आवाज जमन पर कब्जा कर लिया है। यह लोकतंत्र का अंत है।" उनके सहयोगी अब्दुल्लाह आयसुन ने भी ट्वीट किया, "दंगाविरोधी पुलिस ज़मन के दफ़्तर के अंदर है। उन्होंने मुझे बाहर निकाल दिया।"
पुलिस ने पिछले साल नवंबर में जम्हूरियत अखबार के लिए काम करने वाले पत्रकार कैन दंदर और इरदम गुल को हिरासत में लिया था। उन्होंने एक खबर छापी थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि तुर्की सरकार ने सीरिया के इस्लामी कट्टरपंथियों को हथियार भेजने की कोशिश की थी। उनके मुकदमे की सुनवाई 25 मार्च को होनी है और उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है। रिपोर्टर्स बिदआउट बॉर्डर्स के मुताबिक, प्रेस की आजादी के लिहाज़ से बनी 180 देशों की सूची में तुर्की 149वें स्थान पर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पत्रकारों के साथ सलूक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्की सरकार की काफी आलोचना होती रही है। पत्रकार इमरे सोनकैन ने ट्वीट किया, "तुर्की सरकार ने देश की अंतिम विरोधी आवाज जमन पर कब्जा कर लिया है। यह लोकतंत्र का अंत है।" उनके सहयोगी अब्दुल्लाह आयसुन ने भी ट्वीट किया, "दंगाविरोधी पुलिस ज़मन के दफ़्तर के अंदर है। उन्होंने मुझे बाहर निकाल दिया।"
विज्ञापन
पुलिस ने पिछले साल नवंबर में जम्हूरियत अखबार के लिए काम करने वाले पत्रकार कैन दंदर और इरदम गुल को हिरासत में लिया था। उन्होंने एक खबर छापी थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि तुर्की सरकार ने सीरिया के इस्लामी कट्टरपंथियों को हथियार भेजने की कोशिश की थी। उनके मुकदमे की सुनवाई 25 मार्च को होनी है और उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है। रिपोर्टर्स बिदआउट बॉर्डर्स के मुताबिक, प्रेस की आजादी के लिहाज़ से बनी 180 देशों की सूची में तुर्की 149वें स्थान पर है।
विज्ञापन