नोबेल पुरस्कार 2018 : रसायन विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए इन तीन शख्सियतों को सम्मान
रसायन विज्ञान के क्षेत्र में इस साल जिन तीन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है, उनमें अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हेमिल्टन अरनॉल्ड भी शामिल हैं। रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पाने वाली वह पांचवीं महिला हैं।
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी में प्रोफेसर अरनॉल्ड ने ऐसे एंजाइम को विकसित किया है, जिससे जीवाश्म ईंधन जैसे जहरीले रसायनों की समस्या से निपटने में काफी मदद मिलेगी। स्वीडिश रॉयल साइंस अकादमी ने अरनॉल्ड के योगदान को देखते उन्हें पुरस्कार की आधी राशि देने की घोषणा की है। बाकी की राशि जॉर्ज पी. स्मिथ और सर ग्रेगरी विंटर में बंटेगी। नोबेल पुरस्कार की कुल राशि 10 लाख डॉलर है।
डार्विन के सिद्धांत को परखनली में उतारा
अकादमी की नोबेल रसायन कमेटी के प्रमुख क्लेस गुस्तफसन ने कहा कि तीनों वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रोटीन के इस्तेमाल के लिए क्रम विकास के उसी सिद्धांत का इस्तेमाल किया, जिसके जरिये आनुवांशिक बदलाव और चयन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि 2018 के नोबेल विजेताओं ने डार्विन के सिद्धांत को परखनली में उतारा। साथ ही आण्विक स्तर पर क्रमविकास की प्रक्रियाओं की समझ का इस्तेमाल कर अपनी प्रयोगशाला में उसे मूर्त रूप दिया।
तीनों वैज्ञानिकों में अरनॉल्ड को मिलेगी पुरस्कार की आधी राशि
फ्रांसिस हेमिल्टन अरनॉल्ड (62) - 25 जुलाई, 1956 को जन्मीं और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में प्रोफेसर हैं। उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काफी काम किया है। इस क्षेत्र में शानदार काम के लिए उन्हें नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन सहित कई पुरस्कार पुरस्कार मिल चुके हैं। 2016 में मिनेनियम टेक्नोलॉजी पुरस्कार जीतने वाली वह पहली महिला हैं।
जॉर्ज पी स्मिथ (79)- 1 सितंबर, 1939 को इंडियाना में जन्मे जॉर्ज पी स्मिथ ने फेज डिसप्ले नामक अनूठा तरीका विकसित किया है, जिसके जरिये बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस बैक्टेरियोफेज का इस्तेमाल नए प्रोटीन के इस्तेमाल हो सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिसूरी के जॉर्ज स्मिथ स्कॉलर, शोधार्थी और प्रोफेसर होने के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में स्थित आर्कन्सा राज्य के गवर्नर भी रह चुके हैं।
सर ग्रेगरी विंटर (67)- 14 अप्रैल, 1951 को जन्मे सर ग्रेगरी विंटर ने नई दवाइयों के उत्पादन को ध्यान में रखते हुए एंटीबॉडीज के विकास के सिद्धांत का इस्तेमाल किया। कैंब्रिज में एमआरसी लेबोरेटरी ऑफ मॉलीक्यूलर बॉयोलॉजी के सर ग्रेगरी ने कैंब्रिज एंटीबॉडीज टेक्नोलॉजी नामक संगठन की स्थापना की थी। 1990 में उन्हें फेलो ऑफ द रॉयल सोसायटी चुना गया था। 2011 में उन्हें रॉयल मेडल सम्मान से सम्मानित किया गया।