{"_id":"6115ec96036ae42ca66d2e1c","slug":"taliban-capture-kandhar-12th-provincial-capital-inches-close-to-afghanistan-capital-kabul","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गहराया संकट: काबुल से महज 50 किमी दूर रह गया तालिबान, अफगानिस्तान के 18 प्रांतों पर किया कब्जा","category":{"title":"Rest of World","title_hn":"अन्य देश","slug":"rest-of-world"}}
गहराया संकट: काबुल से महज 50 किमी दूर रह गया तालिबान, अफगानिस्तान के 18 प्रांतों पर किया कब्जा
Fri, 13 Aug 2021 10:39 AM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 13 Aug 2021 10:39 AM IST
सार
- कंधार पर कब्जा करने से पहले गुरुवार को तालिबान ने दो और प्रांतीय राजधानी गजनी और हेरात पर कब्जा कर लिया था।
- तालिबानी काबुल से महज 50 किलोमीटर दूर है, उसने अब तक 18 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया है।
विज्ञापन
तालिबान
- फोटो : PTI
विस्तार
तालिबान तेजी से अफगानिस्तान के प्रमुख शहरों पर कब्जा जमाता जा रहा है। अब वह अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से महज 50 किमी दूर रह गया है। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, तालिबान ने काबुल से 50 किमी दूर स्थित प्रांत पर भी कब्जा कर लिया है। इस तरह कुल 18 प्रांत अब तालिबान के कब्जे में जा चुके हैं। दरअसल, तालिबान द्वारा कंधार और लश्कर गाह पर भी कब्जा जमाने की खबरें आ रही हैं। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, तालिबान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने एक और प्रांतीय राजधानी कंधार पर कब्जा कर लिया। इसके बाद लश्कर गाह भी उसके कब्जे में आ गया।
अब सिर्फ राजधानी काबुल उससे बची हुई है। काबुल के बाद कंधार ही अफगानिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। अब तालिबान का अगला टारगेट काबुल हो सकता है। बता दें कि कंधार में ही बीते दिनों तालिबानियों ने भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश की हत्या कर दी थी। कंधार पर कब्जा करने से पहले गुरुवार को तालिबान ने दो और प्रांतीय राजधानी गजनी और हेरात पर कब्जा कर लिया था। तालिबानी काबुल से महज 130 किलोमीटर दूर है। इस तरह से उसने अब तक 13 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया है।
विज्ञापन
अब तक इन पर कब्जा
1. जरांज
2. शेबरगान
3.सर-ए-पुल
4. कुंदुज
5. तालोकान
6. ऐबक
7. फराह
8. पुल ए खुमारी
9. बदख्शां
10. गजनी
11. हेरात
12. कंधार
13. लश्कर गाह
14. कलत
15. पुल-ए-आलम
16. तेरेनकोट
17. फेरुज कोह
18. काला-ए-नाव
कब्जाए शहरों से हजार से ज्यादा कैदी छुड़ाए
तालिबान के कब्जाए छह अफगानिस्तानी शहरों से उसने 1,000 से ज्यादा कैदी छुड़ा लिए हैं। जेल प्रशासन के निदेशक सफीउल्लाह जलालजई ने कहा कि इनमें से ज्यादातर को नशीली दवाओं की तस्करी, अपहरण और सशस्त्र डकैती के लिए सजा सुनाई गई थी। तालिबान ने जिन छह शहरों की जेलों में नशीली दवाओं की तस्करी, सशस्त्र डकैती और अपहरण के दोषियों को तालिबान ने छुड़ाया है, उनमें कई तालिबान आतंकी भी थे। कुंदुज में रिहा कराए गए 630 कैदियों में 180 तालिबान आतंकी थे। इनमें से 15 को अफगान सरकार ने मौत की सजा सुनाई थी। निमरोज प्रांत के जरांज शहर से छुड़ाए गए 350 कैदियों में से 40 तालिबान आतंकी थे। हालांकि अफगान सरकार ने कहा है कि आतंकियों को पकड़ने के बाद जेल से छुड़ाए गए सभी कैदी दोबारा पकड़े जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
अब सिर्फ राजधानी काबुल उससे बची हुई है। काबुल के बाद कंधार ही अफगानिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। अब तालिबान का अगला टारगेट काबुल हो सकता है। बता दें कि कंधार में ही बीते दिनों तालिबानियों ने भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश की हत्या कर दी थी। कंधार पर कब्जा करने से पहले गुरुवार को तालिबान ने दो और प्रांतीय राजधानी गजनी और हेरात पर कब्जा कर लिया था। तालिबानी काबुल से महज 130 किलोमीटर दूर है। इस तरह से उसने अब तक 13 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया है।
विज्ञापन
अब तक इन पर कब्जा
1. जरांज
2. शेबरगान
3.सर-ए-पुल
4. कुंदुज
5. तालोकान
6. ऐबक
7. फराह
8. पुल ए खुमारी
9. बदख्शां
10. गजनी
11. हेरात
12. कंधार
13. लश्कर गाह
14. कलत
15. पुल-ए-आलम
16. तेरेनकोट
17. फेरुज कोह
18. काला-ए-नाव
कब्जाए शहरों से हजार से ज्यादा कैदी छुड़ाए
तालिबान के कब्जाए छह अफगानिस्तानी शहरों से उसने 1,000 से ज्यादा कैदी छुड़ा लिए हैं। जेल प्रशासन के निदेशक सफीउल्लाह जलालजई ने कहा कि इनमें से ज्यादातर को नशीली दवाओं की तस्करी, अपहरण और सशस्त्र डकैती के लिए सजा सुनाई गई थी। तालिबान ने जिन छह शहरों की जेलों में नशीली दवाओं की तस्करी, सशस्त्र डकैती और अपहरण के दोषियों को तालिबान ने छुड़ाया है, उनमें कई तालिबान आतंकी भी थे। कुंदुज में रिहा कराए गए 630 कैदियों में 180 तालिबान आतंकी थे। इनमें से 15 को अफगान सरकार ने मौत की सजा सुनाई थी। निमरोज प्रांत के जरांज शहर से छुड़ाए गए 350 कैदियों में से 40 तालिबान आतंकी थे। हालांकि अफगान सरकार ने कहा है कि आतंकियों को पकड़ने के बाद जेल से छुड़ाए गए सभी कैदी दोबारा पकड़े जाएंगे।
हताहतों की जानकारी नहीं
हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्करगाह के पुलिस मुख्यालय पर कब्जे के बाद यहां मौजूद अफगान बलों ने तालिबान के आगे समर्पण कर दिया और पास स्थित अन्य गवर्नर के दफ्तर में चले गए। यहां अब भी सरकारी बलों का नियंत्रण है। सांसद नसीमा नियाजी ने बताया कि अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि इस हमले में कितने लोग हताहत हुए हैं। उन्हें इस हमले में कई लोगों के हताहत होने की आशंका है।
तालिबान ने सत्ता साझा करने का प्रस्ताव ठुकराया
इस बीच अफगानिस्तान की सरकार ने तालिबान को सत्ता में भागीदारी का प्रस्ताव दिया था। इसके बदले में अफगानिस्तान सरकार ने तालिबान से शहरों पर हमले बंद करने के लिए कहा था, लेकिन तालिबान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिससे अमेरिकी गठबंधन की सेनाओं की वापसी के बाद जबरदस्त गृहयुद्ध की चपेट में आ गए अफगानिस्तान में शांति की उम्मीद फिलहाल खत्म हो गई है।
तालिबान ने सत्ता साझा करने का प्रस्ताव ठुकराया
इस बीच अफगानिस्तान की सरकार ने तालिबान को सत्ता में भागीदारी का प्रस्ताव दिया था। इसके बदले में अफगानिस्तान सरकार ने तालिबान से शहरों पर हमले बंद करने के लिए कहा था, लेकिन तालिबान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिससे अमेरिकी गठबंधन की सेनाओं की वापसी के बाद जबरदस्त गृहयुद्ध की चपेट में आ गए अफगानिस्तान में शांति की उम्मीद फिलहाल खत्म हो गई है।
इमरान का दर्द : अमेरिका की पसंद है भारत
पाक पीएम इमरान खान ने अपने घर पर विदेशी पत्रकारों से बात करते हुए अपना दर्द बयां किया। उन्होंने अमेरिका पर कटाक्ष करते हुए कहा, वाशिंगटन पाकिस्तान को 20 साल तक अफगानिस्तान में छेड़े गए युद्ध में इस्तेमाल करने के रूप में देखता है और जब रणनीतिक साझेदारी की बात आती है तो वह भारत को पसंद करता है। उन्होंने कहा, अमेरिका ने पाक को सिर्फ अफगानिस्तान में फैली गंदगी को साफ करने के लिए फायदेमंद समझता है। खान ने कहा, मैं समझता हूं कि अमेरिकियों ने फैसला कर लिया है कि उनका रणनीतिक साथी अब भारत है और इसी वजह से वे पाक के साथ अलग बर्ताव कर रहे हैं।
गनी के राष्ट्रपति रहते समझौता नहीं करेगा तालिबान
अफगानिस्तान में जारी संघर्ष के बीच पाक पीएम इमरान खान ने कहा है कि जब तक अशरफ गनी देश के राष्ट्रपति रहेंगे तब तक आतंकी गुट अफगानिस्तान सरकार से बात नहीं करेगा। उन्होंने अपने मन की बात रखते हुए कहा कि मौजूदा हालात में राजनीतिक समझौता मुश्किल दिख रहा है। उन्होंने कहा, मैंने तालिबान को मनाने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने कहा कि गनी के होते हम बात नहीं कर सकते।
हेरात में गवर्नर, पुलिस प्रमुख, उप आंतरिक सुरक्षा मंत्री ने किया समर्पण
उधर, सूत्रों ने खबर दी है कि हेरात प्रांत पर तालिबान के कब्जे के बाद सभी सरकारी अधिकारियों ने सरेंडर कर दिया। टोलोन्यूज के अनुसार समर्पण करने वालों में गवर्नर, पुलिस प्रमुख, पूर्व मुजाहिदीन नेता मोहम्मद इस्माइल खान, उप आंतरिक सुरक्षा मंत्री और 207 जफर कॉर्प्स के कमांडार शामिल हैं।
गनी के राष्ट्रपति रहते समझौता नहीं करेगा तालिबान
अफगानिस्तान में जारी संघर्ष के बीच पाक पीएम इमरान खान ने कहा है कि जब तक अशरफ गनी देश के राष्ट्रपति रहेंगे तब तक आतंकी गुट अफगानिस्तान सरकार से बात नहीं करेगा। उन्होंने अपने मन की बात रखते हुए कहा कि मौजूदा हालात में राजनीतिक समझौता मुश्किल दिख रहा है। उन्होंने कहा, मैंने तालिबान को मनाने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने कहा कि गनी के होते हम बात नहीं कर सकते।
हेरात में गवर्नर, पुलिस प्रमुख, उप आंतरिक सुरक्षा मंत्री ने किया समर्पण
उधर, सूत्रों ने खबर दी है कि हेरात प्रांत पर तालिबान के कब्जे के बाद सभी सरकारी अधिकारियों ने सरेंडर कर दिया। टोलोन्यूज के अनुसार समर्पण करने वालों में गवर्नर, पुलिस प्रमुख, पूर्व मुजाहिदीन नेता मोहम्मद इस्माइल खान, उप आंतरिक सुरक्षा मंत्री और 207 जफर कॉर्प्स के कमांडार शामिल हैं।
गनी ने की नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की नियुक्ति
अफगानिस्तान में तालिबान के तेजी से बढ़ते कदमों पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रपति अशरफ गनी ने नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में हैबतुल्लाह अलीजई की नियुक्ति की है। गनी ने यह नियुक्ति वली मोहम्मद अहमदजई की जगह की है। अफगानिस्तान टाइम्स ने बताया कि अलीजई ने इससे पहले अफगान नेशनल आर्मी कमांडो के कमांडर के रूप में काम किया है।
अफगान नेतृत्व तय करे उसमें लड़ने की इच्छाशक्ति है या नहीं : व्हाइट हाउस
वाशिंगटन। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों को अपने कब्जे में लेने के बीच व्हाइट हाउस ने कहा कि यह अफगान नेतृत्व को तय करना है कि क्या उनके पास जवाबी कार्रवाई की राजनीतिक इच्छाशक्ति है या नहीं। प्रवक्ता जेन साकी ने कहा, अमेरिका ने दो दशकों तक अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सेना को प्रशिक्षण दिया है और उनके पास तालिबान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की क्षमता व हथियार हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका युद्धग्रस्त देश में बिगड़े सुरक्षा हालात पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, हम अफगान बलों के साथ हवाई हमले करते रहेंगे।
इस साल करीब चार लाख लोग विस्थापित हुए : संयुक्त राष्ट्र
अफगानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच इस साल की शुरुआत से करीब चार लाख लोग विस्थापित हुए हैं, खासकर मई में बड़ी संख्या में लोग विस्थापन के लिए मजबूर हुए हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरस के प्रवक्ता ने दी है। प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, इस साल की शुरुआत से करीब 3,90,000 लोग देश में संघर्ष के कारण विस्थापित हुए हैं जिनकी संख्या मई में एकाएक बढ़ी है। एक जुलाई से पांच अगस्त, 2021 के बीच मानवीय समुदाय ने सत्यापित किया है कि आंतरिक रूप से विस्थापित 5,800 लोग काबुल पहुंचे जो संघर्ष एवं अन्य खतरों से बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
अफगान नेतृत्व तय करे उसमें लड़ने की इच्छाशक्ति है या नहीं : व्हाइट हाउस
वाशिंगटन। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों को अपने कब्जे में लेने के बीच व्हाइट हाउस ने कहा कि यह अफगान नेतृत्व को तय करना है कि क्या उनके पास जवाबी कार्रवाई की राजनीतिक इच्छाशक्ति है या नहीं। प्रवक्ता जेन साकी ने कहा, अमेरिका ने दो दशकों तक अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सेना को प्रशिक्षण दिया है और उनके पास तालिबान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की क्षमता व हथियार हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका युद्धग्रस्त देश में बिगड़े सुरक्षा हालात पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, हम अफगान बलों के साथ हवाई हमले करते रहेंगे।
इस साल करीब चार लाख लोग विस्थापित हुए : संयुक्त राष्ट्र
अफगानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच इस साल की शुरुआत से करीब चार लाख लोग विस्थापित हुए हैं, खासकर मई में बड़ी संख्या में लोग विस्थापन के लिए मजबूर हुए हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरस के प्रवक्ता ने दी है। प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, इस साल की शुरुआत से करीब 3,90,000 लोग देश में संघर्ष के कारण विस्थापित हुए हैं जिनकी संख्या मई में एकाएक बढ़ी है। एक जुलाई से पांच अगस्त, 2021 के बीच मानवीय समुदाय ने सत्यापित किया है कि आंतरिक रूप से विस्थापित 5,800 लोग काबुल पहुंचे जो संघर्ष एवं अन्य खतरों से बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
भारत ने जारी की एडवाइजरी
अफगानिस्तान में बचे भारतीयों के लिए भारत सरकार ने गुरुवार को एक और एडवाइजरी जारी की। काबुल स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से जारी इस एडवाइजरी में सभी भारतीयों को सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। इसके अलावा भारतीयों को काबुल स्थित भारतीय दूतावास में रजिस्टर करवाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही भारत से अफगानिस्तान जाने वाले मीडियाकर्मियों को भी आगाह किया गया है। इसमें कहा गया है कि उड़ानें बंद होने से पहले भारतीय नागरिक वतन लौटने के तुरंत इंतजाम करें। भारतीय कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को वापस भेज दें।
अमेरिका अपने लोगों को वापस बुला रहा
अमेरिका अपने लोगों को वापस बुला रहा
- अफगानिस्तान में तेजी से बदल रहे हालात के मद्देनजर अमेरिका काबुल में दूतावास से कुछ और कर्मियों को वापस लाने के लिए अतिरिक्त सैनिक भेजने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के नेतृत्व वाली सरकार के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी थी।
- पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने बताया था कि अमेरिकी रक्षा विभाग काबुल से दूतावास के कर्मचारियों को निकालने के लिए अफगानिस्तान में सेना भेजेगा। अगले 24-48 घंटों में काबुल हवाई अड्डे पर तीन पैदल सेना की बटालियनों को उतारा जाएगा। इनमें सैनिकों की संख्या 3,000 है।
- साथ ही कहा कि कतर में 3500 सैनिक स्टैंडबाई पर रहेंगे ताकि अफगानिस्तान से अमेरीकियों की वापसी को लेकर कोई भी दिक्कत होने पर एक्शन में आ जाएंगे।