फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   Tales of sexual violence in Syria

वो चीखता रहा.....मुझे छोड़ दो

Wed, 26 Sep 2012 03:13 PM IST
दमिश्क/बीबीसी
दमिश्क/बीबीसी Updated Wed, 26 Sep 2012 03:13 PM IST
विज्ञापन
Tales of sexual violence in Syria
सीरिया से ऐसी रिपोर्टें लगातार आ रही हैं कि वहां जेल में बंद कैदियों के साथ यौन हिंसा की जा रही है। जेल में बंद लोगों के साथ हो रही यौन हिंसा की भी कुछ ऐसी दिल दहलाने वाली कहानियां लागातार सामने आ रही हैं। बीबीसी के फरगल कीन ने ऐसे ही पूर्व में हिरासत में लिए गए लोगों से बात की जिनकी कहानियां काफी दर्दनाक थी।
विज्ञापन


इनमें से एक व्यक्ति ने एक महिला को तहखाने के किनारे पर देखा, 'वो लोग इस महिला का बलात्कार कर रहे थे। उसके शरीर के खून आ रहा था।' ये प्रत्यक्षदर्शी एक मानवाधिकार समूह में काम करता था और इसे पिछले साल नवंबर के महीने में गिरफ्तार किया गया था।
विज्ञापन


दूसरी कहानी एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी की थी। इस प्रत्यक्षदर्शी का कहना था कि उसे पकड़ने वाले लोगों ने ये मांग की कि वो हथियारों की तस्करी और विदेशी मीडिया को प्रदर्शनों का फुटेज देने की बात स्वीकार करें।  उन्होंने अपने अनुभव बताते हुए कहा, 'वो मुझे पीटते थे, थप्पड़ मारते थे और कई अपमानजनक चीज़े मेरे साथ करते थे। मुझे पता है जब किसी को गिरफ्तार किया जाता है तो उसके साथ क्या होता है।'
विज्ञापन
विज्ञापन


जानवरों जैसा सलुक
पूर्व में कैदी रहे इस व्यक्ति का कहना था जो अधिकारी बलात्कार करते थे, वो जानवरों की तरह सलूक करते थे। उन्होंने बताया, 'पहले मुझे एक सुरक्षा अधिकारी ने गलत मंशा से छूने की कोशिश की। ये सारी गतिविधि दूसरा अधिकारी देख रहा था लेकिन वो चुप था। इसके बाद मुझ पर तीन अधिकारियों ने हमला कर दिया।'

इस व्यक्ति ने कहा कि वो तीनों जानवरों की तरह बर्ताव कर रहे थे, 'मैंने अपने आप को बचाने की कोशिश की लेकिन मैं उनके सामने छोटा पड़ गया। जब उन्होंने मेरा बलात्कार किया तो मैंने कहा कि कृपया मुझे छोड़ दो, मेरे साथ ऐसा मत करो।' जब उनका बलात्कार हो रहा था तो उनकी नकल करते हुए कुछ हमलावर कह रहे थे कि, 'तुम चाहते हो असद पद से हट जाए? तुम ये कहना चाहते हो कि तुम बशर अल-असद को पंसद नहीं करते हो।'

अनसुनी
जेल में ही एक किशोर लड़के को भी लाया गया। उसका भी बलात्कार किया गया। उसके साथ दुराचार होता रहता था और ये लड़का अपनी मां को याद करता रहता था। इन जेलों या यातना गृह से जो लोग जीवित निकल कर आ पाए हैं वो कहते है कि सीरिया में ये एक ऐसी जगहें है जहां आपकी आवाज़ कोई नहीं सुनता और कोई आपसे मिलने नहीं आता है।  
एक और महिला प्रत्यदर्शी ने बताया कि उन्हें दो महीने तक दमिश्क में फलस्तीन की खुफिया सैन्य इकाई में रखा गया। इस महिला को पिछले साल के अंत में होम्स के एक नाका से गिरफ्तार किया गया था। महिला ने अपने अनुभव बांटते हुए कहा, महिलाओं से पूछताछ के दौरान चूहों का इस्तेमाल किया जाता था।

योनि में चूहा
एक दूसरी महिला को दी गई एक यातना के बारे में उन्होंने बताया,' उन्होंने उस महिला की योनि में चूहे को डाल दिया था। वो चिल्ला रही थी। उसके बाद हमने फर्श पर खून बिखरा देखा। इसके बाद उससे पूछा गया कि क्या ये तुम्हारे लिए काफी है? वो उसे चिढ़ा रहे थे। वो बहुत दुखी थी। हम उसे देख सकते थे। इस घटना के बाद वो हिल भी नहीं पा रही थी।'

सीरिया में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ता को जाने की अनुमति नहीं दिए जाने और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों की गैरमौजूदगी में बलात्कार होने के दावों की पड़ताल करना असंभव है। इसका आकलन करना भी मुश्किल है कि बलात्कार के कितने मामले हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि ऐसे मामलों में लोगों को कलंक लगने का डर लगता है इसलिए पीड़ित सामने भी नहीं आते हैं।

अपमानित करने के लिए
कुछ मामलों में पीड़ित कहते है कि उनके साथ दुर्व्यवहार फलस्तीन की खुफिया सैन्य इकाई में हुआ, तो कई मामलों में पीड़ित शर्म के मारे ये नहीं चाहता कि उसके साथ जो घटा है वो लोग या परिजन जाने। इस संस्था का कहना है कि यौन हिंसा अपमानित करने के लिए की जाती है। हालांकि इन पीड़ितों ने और न ही संयुक्त राष्ट्र ने विद्रोहियों पर इस तरह के आरोप लगाए हैं। सयुंक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार सीरिया में मानवता के खिलाफ हो रहे अपराधों में यौन हिंसा भी की जाती है।


सीरिया की सरकार खुद पर लगे इन आरोपों को खारिज करती रही है। संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लै ने सीरिया सरकार पर लगे आरोपों को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायलय को भेजने की बात कही है। इनमें यौन हिंसा के आरोप भी शामिल हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के दुश्मनों और समर्थकों को लेकर जो मतभेद है, उसे देखते हुए ये कार्रवाई होना मुश्किल ही लगता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed