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'ऐसे तबाह किया आईएस ने मेरे परिवार को..'

Thu, 10 Mar 2016 03:59 PM IST
माइक थॉमसन/बीबीसी न्यूज
माइक थॉमसन/बीबीसी न्यूज Updated Thu, 10 Mar 2016 03:59 PM IST
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syria islamic state diary part one
सीरिया में रिपोर्टिंग करना खतरनाक - फोटो : Reuters

इस्लामिक स्टेट के कब्जे में जो इलाका है, वहां चलाए जा रहे शासन की भयावह असलियत का अंदाजा लगाना बाहर के लोगों के लिए बेहद मुश्किल है। सीरिया में अब रिपोर्टिंग करना इतना खतरनाक हो चुका है कि कोई पत्रकार इस्लामिक स्टेट के इलाके में नहीं जा रहा है। लेकिन सीरिया के अंदर कुछ एक्टिविस्ट हैं जो अपने जीवन को खतरे में डालकर दुनिया को वहां का हाल बता रहे हैं। बीबीसी पिछले तीन महीनों से इस्लामिक स्टेट की राजधानी रक्का के एक युवक के संपर्क में है। वो वहां की रोजमर्रा की जिंदगी को अपनी डायरी में दर्ज कर रहे हैं। उनके दिल दहला देने वाले अनुभवों की पहली किस्त पढ़िए:

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वो शुक्रवार का दिन था। पहले इस दिन हम दिन की नमाज के बाद गलियों में एकत्रित होते थे और लंबी बातचीत किया करते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होता। सार्वजनिक जगहों पर बिना इजाजत के एकत्रित होने पर आपको इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ षड्यंत्र करने का दोषी ठहराया जा सकता है। जब मैंने एक सार्वजनिक चौराहे पर भीड़ देखी, मैं उसमें शामिल नहीं होना चाहता था। कारण यह कि वहां आपसे सिर कलम करने की घटना को देखने के लिए रोका जा सकता था। लेकिन खुदा का शुक्र है कि इस बार केवल कोड़े लगाए जा रहे थे। जिसे कोड़ों से पीटा जा रहा था वह आईएस के दल का ही सदस्य था।
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मुझे बताया गया है कि उसने समलैंगिक संबंध बनाने का गुनाह किया है। कल मैं अपने काम पर गया। नए हफ़्ते में आज़ादी की नई उम्मीद लिए। लेकिन मैं आपको उस दिन के बारे में बताना चाहता हूं जिस दिन इस्लामिक स्टेट के लड़ाके पहली बार हमारे शहर में घुसे थे। वो मदर्स डे था, सर्दी की ठिठुराती सुबह। मुझे फाइटर प्लेन की आवाज सुनाई दे रही थी। मैं तैयार हो कर अपने पुश्तैनी घर के लिए निकल पड़ा। मैंने अपने भाईयों और बहनों के साथ पार्टी की योजना बनाई थी। मेरी टैक्सी जब पुश्तैनी घर के नज़दीक पहुंची तब तक आसमान धुंए से भर चुका था। फाइटर विमानों ने हमारे मुहल्ले में हमला किया था।
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हर तरफ एंबुलेंस ही एंबुलेंस दिखाई दे रही थीं। लोग शवों और घायलों को लेकर इधर उधर भाग रहे थे। मेरे एक पड़ोसी ने बताया कि मेरे माता-पिता घायल हो गए हैं और उन्हें जेनरल हॉस्पीटल ले जाया गया है। जब हम अस्पताल पहुंचे तो वहां मौत का आलम पसरा हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे हवा में ही खून है। मुझसे कहा गया कि सामने पड़े शवों में आप अपने माता-पिता को देख लें।।।कहीं वो उनमें तो नहीं। उनमें मेरे डैड थे, उन के शरीर में छर्रे का घाव था। मुझसे किसी ने शांत आवाज़ में कहा, “तुम्हारी मां का इलाज़ किया जा रहा है। लेकिन तुम वहां अभी नहीं जा सकते।”

दो घंटे बीतने के बाद एक डॉक्टर आया। मैंने उन्हें बताया कि मैं अपनी मां का बड़ा बेटा हूं। डॉक्टर ने कहा, “मैं उनकी जान बचाने में कामयाब रहा हूं लेकिन वह काफी बीमार हैं।” हमारे एक पड़ोसी फल और सब्जियों की दुकान चलाते हैं। उन्होंने मदद का भरोसा देते हुए कहा, “अब से तुम हमारे लिए काम करो।” मेरे पास इसके सिवा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। दुकान में काम करते हुए कुछ ही दिन हुए थे कि मैंने बंदूक और भारी हथियारों से गोली चलने की आवाज़ सुनी। गली में हर कोई भाग रहा था। मेरे दोस्त ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, “इस्लामिक स्टेट वालों ने पूरे शहर पर कब्ज़ा कर लिया है।” इसके तुरंत बाद एक आदमी, जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था, मुझ पर चिल्लाया, “अरे, तुम सुनो।।।स्मोकिंग नहीं कर सकते।”

एक दूसरा शख़्स भी चिल्लाया, “अरे, तुम सुनो। तुम्हारी पत्नी ने नकाब क्यों नहीं पहना है। इसकी इजाज़त नहीं है।” फिर मैंने लाउडस्पीकर पर आवाज़ सुनी कि कुछ लोगों का सिर कलम किया जा रहा है। आंखों पर पट्टी बांधे कुछ युवक दिखे जिनके हाथ भी बंधे हुए थे। इसके आगे मास्क पहने एक आदमी पढ़ रहा था- हसन, हमारी सेना से लड़ रहा था। उसकी सजा सिर कलम करना है।


ईसा, मीडिया एक्टविस्ट है। वह विदेशी ताक़तों की बात कर रहा है। उसकी सजा भी सिर कलम करना है। तलवार के साथ खड़े दूसरे शख़्स ने युवाओं का सिर कलम कर दिया। मैं सड़क पर चलते हुए जोर से चीख पड़ा। अचानक से इस्लामिक स्टेट के धार्मिक पुलिस दस्ते ने मुझे पकड़ लिया। वे मुझे अपने मुख्यालय ले गए। मैंने उन्हें अपनी बात समझाने की कोशिश की लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ।
मुझे कहा गया, “तुम जोर से चीखे थे, तुम्हें 40 कोड़े लगाए जाएंगे।”

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