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'उत्तर कोरिया जा नहीं सकता, दक्षिण कोरिया रखने को तैयार नहीं'

Fri, 05 Jan 2018 06:04 PM IST
नितिन श्रीवास्तव, बीबीसी हिंदी
नितिन श्रीवास्तव, बीबीसी हिंदी Updated Fri, 05 Jan 2018 06:04 PM IST
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Story of a man Kim sok chol who fled North Korea but South Korea not ready to give him citizenship
किम सोक-चोल - फोटो : BBC
बीस साल पहले उत्तर कोरिया के नागरिक किम सोक-चोल अपना देश छोड़कर इस आस में भागे थे कि दक्षिण कोरिया में शरण मिलेगी। लेकिन उत्तर कोरिया के बहुत ही कम ऐसे नागरिक होंगे जिन्हें इतनी नाउम्मीदी का सामना करना पड़ा हो। दक्षिण कोरिया के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 1990 के दशक में उत्तर कोरिया में आए जबरदस्त सूखे और भुखमरी के प्रकोप से बचने के लिए 30 हजार से ज्यादा लोगों ने भागकर शरण ली। इनमें से ज्यादातर इसके लिए उत्तर कोरिया में किम परिवार के 'कड़े और तानाशाही' वाले प्रशासन को भी जिम्मेदार मानते हैं। लेकिन किम सोक-चोल इस कोशिश में आज भी नाकाम हैं। उन्होंने बीबीसी हिंदी से आपबीती बयान की। 
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'मां महीनों जेल में रहीं' 

मेरा जन्म उत्तर कोरिया के सा-रयु-वॉन शहर में हुआ था और मैं वहां तीस साल रहा। दक्षिण कोरिया भागकर आए तीन साल हो चुके हैं लेकिन एक कागज न होने की वजह से मुझे धक्के खाने पड़ रहे हैं।
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चार साल का था जब मेरे पिता, परिवार को लेकर चीन की तरफ भागे थे। एक भाई और बहन के साथ वो तो सीमा पार कर गए लेकिन अपनी मां और बड़े भाई के साथ मैं पकड़ा गया।
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मां को महीनों जेल में रहना पड़ा और स्कूल में मुझे 'गद्दार' होने के ताने सुनने पड़े। 

'मुझे नौकरी से निकाल दिया गया'

ग्रेजुएशन के बाद मैं हा-रियोंग शहर की ट्रेन फैक्ट्री में काम करने लगा। कुछ साल बाद उत्तर कोरियाई सरकार ने मेरा तबादला एक वीरान इलाके की एक फैक्ट्री में कर दिया। 

मैं वहां नहीं जाना चाहता था लेकिन काम न करने पर सरकार मेरा राशन-पानी बंद कर देती। आखिरकार, मुझे नौकरी से निकाल दिया गया और मेरी हालत बिगड़ने लगी।

चीन में रह रहे बुजुर्ग पिता दूसरी शादी कर अपना नया परिवार बसा चुके थे। 

'दक्षिण कोरिया में मैं बाहरी हूं'

Story of a man Kim sok chol who fled North Korea but South Korea not ready to give him citizenship
किम सोक-चोल और उनकी पत्नी - फोटो : BBC
'भागकर चीन पहुंचा, लेकिन मन नहीं लगा'

तरस खाकर,उन्होंने किसी तरह 'रिश्वत' देकर मेरे परिवार के लिए वहां की नागरिकता खरीदी। किसी तरह, छिपते-छिपाते, हम चीन के यांबियान शहर पहुंचकर रहने लगे। मैंने उत्तर कोरिया से भागकर आई एक महिला से शादी कर ली और हमें एक बेटा हुआ।

सच यह है कि चीन में मेरा दिल कभी नहीं लगा और मैंने दक्षिण कोरिया में शरण लेनी की ठानी। इंसानों की तस्करी कराने वाले एक ग्रुप ने हमें चीन से थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक पहुंचाया। 

'दक्षिण कोरिया का शरण देने से इंकार'

लेकिन दक्षिण कोरियाई दूतावास ने मुझे शरण देने से मना कर दिया क्योंकि मेरे पास उत्तर कोरिया के कागजात नहीं थे। 

दक्षिण कोरिया की नीति उन्हीं लोगों को शरण और नागरिकता देने की रही है जिनके पास अपने पुराने इतिहास के कागज हों और चीनी नागरिकों को वे इसमें शामिल नहीं करते।

हां, मेरी पत्नी और उसके साथ-साथ मेरे बेटे को शरण मिल गई क्योंकि उसका परिवार जब भागकर चीन आया था तब उनके पास पूरे प्रमाण थे।

मुझे फिर से चीन भेज दिया गया। इस बीच दक्षिण कोरिया के अनसन शहर में अपनी मां के साथ रह रहा मेरा बेटा बड़ा हो रहा था। 

'दक्षिण कोरिया में मैं बाहरी हूं'

उसने उत्तर कोरिया से भागकर आई एक लड़की से शादी कर ली और मेरी एक पोती भी है। 2015 में मुझे दक्षिण कोरिया आने का वीजा इसलिए मिल सका क्योंकि मेरी पत्नी और बेटे अब यहां के नागरिक हैं।

लेकिन अफसोस कि मैं आज भी यहां के लोगों के लिए 'बाहरी' हूं और वे मुझे कम इज्जत देते हैं। न मैं नौकरी कर सकता हूं और न ही किसी तरह से पैसे कमा सकता हूं।

मेरी पत्नी बेटे की ट्रैवेल एजेंसी में मदद करती है जिससे घर चलता है और दक्षिण कोरिया की सरकार ने मेरी नागरिकता की गुहारों को खारिज कर रखा है।

अब मैंने एक वकील की मदद ली है और आगे चलकर अदालत का दरवाजा भी खटखटाऊंगा।

मैं वापस उत्तर कोरिया जा नहीं सकता और दक्षिण कोरिया मुझे रखने को तैयार नहीं। आखिर जाऊं तो जाऊं कहां? 
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