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खतरनाक दुनिया बना रहे हैं नेताओं के भड़काऊ भाषण
बीबीसी हिंदी. कॉम के लिए
Updated Wed, 22 Feb 2017 12:35 PM IST
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मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी नीतियों की आलोचना को रोकने के लिए दमनकारी कानूनों का इस्तेमाल किया गया।
संगठन का कहना है कि सरकार ने बहुत से गैर सरकारी संगठनों के विदेश से चंदा लेने पर रोक लगा दी है। इसे इन संगठनों को परेशान करने के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को सरकार और नॉन स्टेट एक्टर्स की धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा।
इसमें पत्रकार करुण मिश्र और राजदेव रंजन की हत्या का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट कहती है कि भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक और गैरजरूरी बल प्रयोग किया। पूरी घाटी में दो महीने से अधिक तक कर्फ्यू लगा दिया गया, निजी कंपनियों की संचार सेवाओं को ठप कर दिया गया।
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इससे लोगों को परेशानी हुई, यहां तक की उन्हें जरूरी मेडिकल सेवाओं के लिए भी परेशान होना पड़ा। इसमें गुजरात में दलितों पर गोरक्षकों की ओर से किए गए हमले और उसके बाद हुए प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया है।
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संगठन का कहना है कि सरकार ने बहुत से गैर सरकारी संगठनों के विदेश से चंदा लेने पर रोक लगा दी है। इसे इन संगठनों को परेशान करने के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को सरकार और नॉन स्टेट एक्टर्स की धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ा।
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इसमें पत्रकार करुण मिश्र और राजदेव रंजन की हत्या का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट कहती है कि भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक और गैरजरूरी बल प्रयोग किया। पूरी घाटी में दो महीने से अधिक तक कर्फ्यू लगा दिया गया, निजी कंपनियों की संचार सेवाओं को ठप कर दिया गया।
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इससे लोगों को परेशानी हुई, यहां तक की उन्हें जरूरी मेडिकल सेवाओं के लिए भी परेशान होना पड़ा। इसमें गुजरात में दलितों पर गोरक्षकों की ओर से किए गए हमले और उसके बाद हुए प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया है।
ट्रंप और भेदभाव की राजनीति
डोनाल्ड ड्रंप का जिक्र करते हुए एमनेस्टी ने कहा है कि बांटने वाला और अमानवीय भाषण देने वाले नेता एक बंटे हुए और खतरनाक दुनिया बना रहे हैं। एमनेस्टी की सालाना रिपोर्ट में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को खीजा हुआ और अधिक भेदभाव वाली राजनीति करने वाला बताया गया है।
इसमें तुर्की, हंगरी और फिलीपींस के नेताओं की भी आलोचना की गई है। इन पर भी भय, आरोप-प्रत्यारोप और बंटवारे को बढ़ाव देने वाला भाषण देने का आरोप लगाया गया है। संगठन का यह भी कहना है कि सरकारें राजनीतिक फायदे के लिए शरणार्थियों का इस्तेमाल कर रही हैं। एमनेस्टी की इस रिपोर्ट में 159 देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अमरीका और यूरोप में शरणार्थियों को निशाना बनाते हुए नफरत फैलाने वाली बातें बढ़ी हैं।
रिपोर्ट कहती है कि इसे लोगों पर जाति, लिंग, राष्ट्रीयता और धर्म के नाम पर होने वाले हमलों में आई बढ़ोतरी के रूप में देखा जा सकता है। इन देशों की रिपोर्ट में इस बात के लिए आलोचना की गई है कि ये दुनिया में खुद को मानवाधिकारों का समर्थक बताते हैं। लेकिन अपने यहां ये उसे छीन रहे हैं।
इसमें तुर्की, हंगरी और फिलीपींस के नेताओं की भी आलोचना की गई है। इन पर भी भय, आरोप-प्रत्यारोप और बंटवारे को बढ़ाव देने वाला भाषण देने का आरोप लगाया गया है। संगठन का यह भी कहना है कि सरकारें राजनीतिक फायदे के लिए शरणार्थियों का इस्तेमाल कर रही हैं। एमनेस्टी की इस रिपोर्ट में 159 देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अमरीका और यूरोप में शरणार्थियों को निशाना बनाते हुए नफरत फैलाने वाली बातें बढ़ी हैं।
रिपोर्ट कहती है कि इसे लोगों पर जाति, लिंग, राष्ट्रीयता और धर्म के नाम पर होने वाले हमलों में आई बढ़ोतरी के रूप में देखा जा सकता है। इन देशों की रिपोर्ट में इस बात के लिए आलोचना की गई है कि ये दुनिया में खुद को मानवाधिकारों का समर्थक बताते हैं। लेकिन अपने यहां ये उसे छीन रहे हैं।
हम बनाम वो
एमनेस्टी इंटरनेशनल के सचिव सलिल शेट्टी ने एक बयान में कहा, ''लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने की जगह बहुत से नेताओं ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए अमानवीय एजेंडा अपना लिया है।''
संगठन ने रिपोर्ट में पिछले महीने ट्रंप की ओर से दिए गए उस कार्यकारी आदेश का खासतौर पर जिक्र किया है, जिसके जरिए सात मुस्लिम बहुल देशों के प्रवासियों और शरणार्थियों के अमरीका आने पर रोक लगाई गई है। एमनेस्टी की इस रिपोर्ट के मुताबिक 36 देशों ने शरणार्थियों को उन देशों में वापस भेजकर, जहां उनके हित खतरे में था, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है।
रिपोर्ट में एमनेस्टी ने फिलिपिंस के राष्ट्रपति रॉड्रिगो डुटार्टे, तुर्की के राष्ट्रपति रेचैप तैयप अर्दोआन और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन का इसलिए जिक्र है कि ये नेता भी हम बनाम वो की बात कह रहे हैं। शेट्टी कहते हैं कि हम बनाम वो का इस्तेमाल 2016 में अधिक किया गया। ऐसा 1930 के बाद से नहीं देखा गया था, जब एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी की सत्ता संभाली थी।
संगठन ने रिपोर्ट में पिछले महीने ट्रंप की ओर से दिए गए उस कार्यकारी आदेश का खासतौर पर जिक्र किया है, जिसके जरिए सात मुस्लिम बहुल देशों के प्रवासियों और शरणार्थियों के अमरीका आने पर रोक लगाई गई है। एमनेस्टी की इस रिपोर्ट के मुताबिक 36 देशों ने शरणार्थियों को उन देशों में वापस भेजकर, जहां उनके हित खतरे में था, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है।
रिपोर्ट में एमनेस्टी ने फिलिपिंस के राष्ट्रपति रॉड्रिगो डुटार्टे, तुर्की के राष्ट्रपति रेचैप तैयप अर्दोआन और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन का इसलिए जिक्र है कि ये नेता भी हम बनाम वो की बात कह रहे हैं। शेट्टी कहते हैं कि हम बनाम वो का इस्तेमाल 2016 में अधिक किया गया। ऐसा 1930 के बाद से नहीं देखा गया था, जब एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी की सत्ता संभाली थी।