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दक्षिण कोरिया ने उतारे किम जोंग-उन के खिलाफ प्रचार करनवाले स्पीकर
बीबीसी हिंदी
Updated Wed, 02 May 2018 03:10 PM IST
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South Korea propaganda loudspeakers
- फोटो : EPA
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उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर लगे लाउडस्पीकर दक्षिण कोरिया ने हटाना शुरू कर दिया है और कहा है कि उत्तर कोरिया भी शायद ऐसा ही कर रहा है। दोनों देश सीमा पर लगे इन लाउडस्पीकर्स के जरिए वर्षों से एक-दूसरे के खिलाफ प्रचार करते रहे हैं।
पिछले हफ्ते दोनों देशों के नेताओं की ऐतिहासिक मुलाकात और शांति स्थापना की कोशिशों के बीच इसे सांकेतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
बीते शुक्रवार को उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई नेता मून जे इन दोनों देशों के बीच तनाव घटाने और प्रायद्वीप को परमाणु हथियार से मुक्त करने पर सहमत हुए थे। परमाणु मुद्दे पर बात करने के लिए किम जोंग-उन के कुछ हफ्तों के भीतर ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मिलने की संभावना है।
दक्षिण कोरिया के लाउडस्पीकर 1960 के दशक में लगाए गए थे और तभी से सीमा पर पॉप म्युजिक से लेकर खबरों का प्रसारण किया जाता रहा है। वे खासकर उत्तर कोरियाई सैनिकों को ध्यान में रखकर प्रसारित किए जाते थे ताकि उनके भीतर अपने नेता किम जोंग-उन के प्रति संदेह पैदा किया जा सके।
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दक्षिण कोरिया ने कभी इस बात की पुष्टि नहीं की कि कहां और कितने स्पीकर लगाए गए थे, हालांकि शुक्रवार की वार्ता से पहले दोनों देशों ने इन लाउडस्पीकर्स पर प्रसारण बंद कर दिया था। मंगलवार को दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनकी तरफ के स्पीकर्स को उतारने का काम शुरू कर दिया गया है।
दक्षिण कोरिया का कहना है कि उत्तर कोरिया की तरफ से भी ऐसा ही कदम उठाए जाने के संकेत मिले हैं। दक्षिण कोरिया ने पहले कहा था कि ऐसा करने का फैसला दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए किया गया है।
इंटर-कोरियन समिट एक दशक से भी अधिक समय के बाद दोनों कोरियाई नेताओं के बीच मुलाकात थी जिसके आखिर में एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया गया।
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पिछले हफ्ते दोनों देशों के नेताओं की ऐतिहासिक मुलाकात और शांति स्थापना की कोशिशों के बीच इसे सांकेतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
बीते शुक्रवार को उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरियाई नेता मून जे इन दोनों देशों के बीच तनाव घटाने और प्रायद्वीप को परमाणु हथियार से मुक्त करने पर सहमत हुए थे। परमाणु मुद्दे पर बात करने के लिए किम जोंग-उन के कुछ हफ्तों के भीतर ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मिलने की संभावना है।
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दक्षिण कोरिया के लाउडस्पीकर 1960 के दशक में लगाए गए थे और तभी से सीमा पर पॉप म्युजिक से लेकर खबरों का प्रसारण किया जाता रहा है। वे खासकर उत्तर कोरियाई सैनिकों को ध्यान में रखकर प्रसारित किए जाते थे ताकि उनके भीतर अपने नेता किम जोंग-उन के प्रति संदेह पैदा किया जा सके।
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दक्षिण कोरिया ने कभी इस बात की पुष्टि नहीं की कि कहां और कितने स्पीकर लगाए गए थे, हालांकि शुक्रवार की वार्ता से पहले दोनों देशों ने इन लाउडस्पीकर्स पर प्रसारण बंद कर दिया था। मंगलवार को दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उनकी तरफ के स्पीकर्स को उतारने का काम शुरू कर दिया गया है।
दक्षिण कोरिया का कहना है कि उत्तर कोरिया की तरफ से भी ऐसा ही कदम उठाए जाने के संकेत मिले हैं। दक्षिण कोरिया ने पहले कहा था कि ऐसा करने का फैसला दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए किया गया है।
इंटर-कोरियन समिट एक दशक से भी अधिक समय के बाद दोनों कोरियाई नेताओं के बीच मुलाकात थी जिसके आखिर में एक संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया गया।
किम उन जोंग की ट्रंप से मुलाकात
किम जोंग उन, डोनाल्ड ट्रंप
किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मुलाकात जून में होने की उम्मीद जताई जा रही है। ये पहली बार होगा कि उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता और अमरीकी राष्ट्रपति एक साथ बैठक करेंगे।
अभी तक कोई तारीख, एजेंडा या स्थान तय नहीं हुआ है, हालांकि दोनों नेताओं की बैठक के लिए मंगोलिया और सिंगापुर का नाम आगे चल रहा है।
सोमवार को ट्रंप ने अपने ट्वीट में बैठक के लिए उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर किसी स्थल का सुझाव दिया था।
उन्होंने कहा, शांति सभा वहां होगी जो 'प्रतिनिधि, मुख्य और स्थायी' जगह होगी।
अभी तक कोई तारीख, एजेंडा या स्थान तय नहीं हुआ है, हालांकि दोनों नेताओं की बैठक के लिए मंगोलिया और सिंगापुर का नाम आगे चल रहा है।
सोमवार को ट्रंप ने अपने ट्वीट में बैठक के लिए उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा पर किसी स्थल का सुझाव दिया था।
उन्होंने कहा, शांति सभा वहां होगी जो 'प्रतिनिधि, मुख्य और स्थायी' जगह होगी।