अफगानिस्तान में निर्णायक दौर के लिए मतदान शुरू
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अफगानिस्तान में चल रहे राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान शुरू हो चुका है। इस चरण के मतदान से तय होना है कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई की जगह देश की सत्ता कौन संभालेगा।
अफ़ग़ानिस्तान के समयानुसार सुबह 7 बजे से और भारतीय समयानुसार 8 बजे से मतदान शुरू हो गया है।
अफ़ग़ानिस्तान के मतदाताओं को इस चुनाव में पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला और वर्ल्ड बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री अशरफ ग़नी में से किसी एक को चुनना है।
अप्रैल के चुनाव में नहीं निकला कोई हल
अप्रैल में हुए चुनाव के शुरुआती नतीजों के अनुसार कोई भी उम्मीदवार 50 फ़ीसदी मत पाने में नाकाम रहा।
इसी वजह से दूसरे दौर के चुनाव के ज़रिए विजेता का फ़ैसला करने का निर्णय किया गया जिसमें दो सबसे ज़्यादा मत पाने वाले उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हो रहा है।
पहले चरण के मतदान में अब्दुल्ला अब्दुल्ला को 45 फ़ीसदी मत मिले जबकि उनके नज़दीकी प्रतिद्वंदी ग़नी ने 31.6 फ़ीसदी मत हासिल किए। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से चुनाव में धांधली के आरोप लगाए गए।
तालिबान की धमकी के बावजूद मतदान
तालिबान ने मतदान केंद्रों को निशाना बनाने की धमकी दी है और ऐसी चिंता जताई जा रही है कि अगर चुनाव में धांधली होती है तो इससे विवादास्पद नतीजे आ सकते हैं।
इस चुनाव के साथ ही देश में पहली बार लोकतांत्रिक तरीक़े से सत्ता का हस्तांतरण होगा।
इस साल के अंत तक अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सुरक्षा बलों की वापसी की तैयारियां चल रही हैं ऐसे में देश की सत्ता संभालने वाले नेता को देश की सुरक्षा, कमज़ोर अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
अफगातिस्तान के लिए ऐतिहासिक होगा यह चुनाव
पूर्व राष्ट्रपति नज़ीबुल्लाह के सोवियत रूस समर्थित शासन के वक़्त से ही विनाशकारी युद्धों का दौर झेलने वाले अफ़गानों को उम्मीद है कि यह चुनाव उनके मुश्किल इतिहास के पन्ने को पलट देगा।
अफ़ग़ानिस्तान के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब एक नेता से दूसरे निर्वाचित नेता को शांतिपूर्ण तरीक़े से सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा।
महीनों तक चले ज़ोरदार चुनावी अभियान और पहले चरण में प्रभावकारी मतदान से यह अंदाज़ा मिला कि यह देश तालिबान की धमकियों और हिंसा के बावजूद आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
2001 के बाद की निराशा और असफलताओं के दौर के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान अब बदल चुका है।
दूसरे दौर के इस महत्वपूर्ण मतदान में अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के साथ-साथ चुनावी संस्थानों की भी एक परीक्षा होगी।