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बाल यौन उत्पीड़न, पोर्नोग्राफी पर कानूनन बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय यूएन संधि की जरूरत सत्यार्थी

Mon, 08 Oct 2018 02:28 PM IST
वल्ड डेस्क ,अमर उजाला
वल्ड डेस्क ,अमर उजाला Updated Mon, 08 Oct 2018 02:28 PM IST
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Satyarthi said Child sexual abuse, legal binding on pornography needs international UN treaty
कैलाश सत्यार्थी

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने बच्चों के यौन उत्पीड़न पर कानूनी रूप से बाध्यकारी संयुक्त राष्ट्र की एक अंतरराष्ट्रीय संधि की मांग की है। बाल यौन उत्पीड़न को ‘‘नैतिक महामारी’’ करार देते हुए सत्यार्थी ने कहा कि ऑनलाइन बाल पोर्नोग्राफी आठ अरब अमेरिकी डॉलर का बड़ा उद्योग बन चुकी है। हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें उच्च-स्तरीय सत्र में शिरकत करने वाले सत्यार्थी ने कहा कि ऑनलाइन बाल पोर्नोग्राफी पर कोई नियंत्रण नहीं है। 

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सत्यार्थी ने यहां पीटीआई को बताया, ‘‘हम बाल यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी पर संयुक्त राष्ट्र की एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि पर जोर दे रहे हैं। कुछ देशों में कानून तो है, लेकिन ऑनलाइन बाल पोर्नोग्राफी पर कोई नियंत्रण नहीं है। कानूनी तौर पर बाध्यकारी संधि का अभाव है।’’  उन्होंने कहा कि बाल यौन उत्पीड़न दुनिया भर में फैल रही ‘‘नैतिक महामारी’’ है और ऑनलाइन बाल पोर्नोग्राफी आठ अरब अमेरिकी डॉलर का बड़ा उद्योग बन चुकी है। 
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सत्यार्थी (64) ने कहा कि ‘लॉरेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन’ नाम के समूह ने ऑनलाइन बाल यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी रूप से बाध्यकारी वैश्विक संधि की मांग की है। ‘लॉरेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रन’ सत्यार्थी द्वारा स्थापित एक समूह है जो बच्चों की हिफाजत के प्रयासों के लिए नोबेल पुरस्कार विजेताओं, वैश्विक नेताओं और युवाओं को एक साथ लाने का काम करता है।  उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए कानूनी तौर पर बाध्यकारी कोई संधि नहीं होने के कारण इस पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा जितना दिया जाना चाहिए। सत्यार्थी ने कहा कि बाल पोर्नोग्राफी का मुद्दा ‘‘भारत और अमेरिका सहित कई अन्य देशों में कई बुरी चीजें पैदा कर रहा है।’’ 

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