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'भारत से निवेश न मिलने पर नेपाल ने किया चीन का रुख'
एजेंसी, काठमांडू
Updated Sun, 25 Mar 2018 09:14 PM IST
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नेपाल चीन समर्थक नहीं है, लेकिन भारत से निवेश न मिलने पर उसे विकल्प तलाशने पड़े। जबकि भारत उसका लंबे समय से प्राकृतिक साथ रहा है। सॉर्क सीआईआई के प्रेसिडेंट सूरज वैद्य ने यह बात कही है।
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नेपाल के स्व उद्यमी वैद्य ने कहा, नेपाल हमेशा भारत के साथ काम करना चाहता है, लेकिन मैं समझता हूं कि इस वक्त भारत अपने देश में निवेश के लिए पर ध्यान दे रहा है। इससे नेपाल में निवेश का निर्वात उत्पन्न हो गया है। वैद्य ने कहा कि नेपाल के लोगों को भी नौकरियों की जरूरत है। उन्हें निवेश की जरूरत है। पर भारत से निवेश का लंबे समय से सूखा पड़ा हुआ है।
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अगर भारत से निवेश नहीं आएगा, हमें दूसरे निवेशकों की ओर देखना ही पड़ेगा। वहीं चीन दुनिया का सबसे बड़ा निवेशक बनने की कोशिश कर रहा है। हम भारत को बताना चाहते हैं कि नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी है। पर हम चीन समर्थक नहीं हैं। वैद्य 16 से 18 मार्च के बीच आयोजित बिजनेस लीडर सम्मेलन से इतर यह बात कही है।
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विद्या के मुताबिक नेपाल श्रीलंका की तरह नहीं है, जो चीन के जाल में फंसता जा रहा है। हम नेपाल को भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाला क्षेत्र नहीं बनने देंगे। नेपाल के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि हम भारत के साथ काम करना चाहते हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, अप्रैल, 2015 को आए भूकंप के बाद नेपाल को निवेश की काफी जरूरत थी, पर नेपाल भारत और चीन के बीच पीस कर रहा गया। 1980 के मध्य दशक के बाद से भारतीय निवेशक आ ही नहीं रहे हैं। जबकि पहले डाबर, आईटीसी और यूनिलीवर ने अच्छा निवेश किया था।