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समंदर में इंटरनेट डाटा चुराने पहुंचीं रूसी पनडुब्बियां, अमेरिका समेत पूरा नाटो बेचैन

Sun, 24 Dec 2017 09:02 AM IST
एजेंसी / वाशिंगटन
एजेंसी / वाशिंगटन Updated Sun, 24 Dec 2017 09:02 AM IST
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Russian submarines reached to steal Internet data in the sea, America Restless 
पनडुब्बी
रूस की कई पनडुब्बियां नाटकीय रूप से उत्तरी अटलांटिक में समंदर के नीचे मौजूद डाटा केबल के पास गश्त कर रही हैं। इन केबल से ही अमेरिका और यूरोपीय देशों का इंटरनेट और संचार का डाटा गुजरता है। इसलिए रूस की हरकत से अमेरिका समेत सभी नाटो देशों में बेचैनी बढ़ गई है। उन्हें डर है कि इन केबल से रूस उनका संवेदनशील डाटा चुरा सकता है। 
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अमेरिकी नौसेना के एडमिरल एंड्र लेनन के मुताबिक रूस की नौसेना का यह कदम बेहद आक्रामक है।

इससे नाटो को भी उस क्षेत्र में अपनी पोस्ट मजबूत करनी होगी। यह एकदम शीत युद्ध जैसी स्थिति होगी। शीत युद्ध के बाद रूसी पनडुब्बियां यहां कभी नहीं आई थीं। एंड्रू के मुताबिक रूस नाटो देशों और नाटो देशों के समंदर के नीचे मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर में बेहद दिलचस्पी ले रहा है। ब्रिटेन की सेना के कमांडरों ने भी चेतावनी दी है कि रूस इन केबल को संकट में डाल सकता है। यह आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। 1858 में डाली गई पहली टेलीग्राफ वायर के साथ ही यहां कई निजी इंटरनेट और संचार की लाइन हैं। अगर रूस ने इन लाइन को काट दिया तो इंटरनेट बंद हो सकता है और अगर उन्होंने इसमें सेंध लगाई तो रूस को विश्व इंटरनेट ट्रैफिक का डाटा मिल जाएगा। 
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आसमान और जमीन पर भी नाटो को चुनौती

Russian submarines reached to steal Internet data in the sea, America Restless 
नाटो
ब्रिटिश एयर चीफ मार्शल स्टुअर्ट पिच के मुताबिक रूस यहां सक्रिय है और यह खतरनाक है। सोचिए अगर रूस केबल को नुकसान पहुंचाता है तो क्या होगा। अर्थव्यवस्था के साथ ही हमारी रोजमर्रा की जिंदगी भी बाधित हो जाएगी। 

रूस सिर्फ समंदर में अति सक्रिय नहीं है। क्रेमलिन आसमान और जमीन पर भी लगातार नाटो को चुनौती दे रहा है। बाल्टिक क्षेत्र में रूस के युद्धक विमान लगातार नाटो की वायु सीमा का उल्लंघन कर रहे हैं। वहीं इस सात सितंबर में जमीनी सेना ने नाटो सीमा के नजदीक ड्रिल की थी। 
 
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