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फीफा से नाखुश रूसी जनता ने वर्ल्ड कप को बताया 'तमाशा'

Thu, 21 Jun 2018 06:14 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 21 Jun 2018 06:14 PM IST
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Russian general people are not happy with FIFA told World Cup is Tamasha
फीफा वर्ल्ड कप 2018
इस समय पूरे विश्व में फीफा वर्ल्ड कप का खुमार छाया हुआ है। इस वर्ल्ड कप का आयोजन रूस कर रहा है। लगातार चौथी बार राष्ट्रपति का चुनाव जीतने वाले व्लादिमीर पुतिन इस आयोजन से पूरी तरह खुश हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस वर्ल्ड कप के बाद से रूस की लगातार लुढकती अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा। जबकि रूस की जनता ठीक इसके उलट सोचती है। 
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रूस के लोग इस 'तमाशारूपी' वर्ल्ड कप से बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। उनका मानना है कि फुटबॉल के प्रचार के जरिए रूस की वास्तविक परेशानियों को ढंकने की कोशिश की गई है। हां, यह बात सही है कि रूस इस वर्ल्ड कप में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और अपने दो मैचों में उसने एक बड़े अंतर से अपनी विपक्षी टीम को मात दी है। यह खुशी निश्चित तौर पर रूस के लोगों को उत्साहित कर रही है, लेकिन इससे वहां की बुनियादी परेशानियां दूर होने वाली नहीं हैं। 
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वैसे तो आमतौर पर रूस एक विकसित राष्ट्र के रूप में जाना जाता है और किसी भी मामले में यह देश दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका से कम नहीं है। लेकिन पिछले कुछ समय से रूस में कई ऐसी परेशानियां उभरकर सामने आई हैं जो उसकी अर्थव्यवस्था के बढ़ने में रूकावट पैदा कर रहा है। आपको रूस की कुछ ऐसी ही परेशानियों से बताते हैं जिनको अगर दूर कर लिया जाए तो निश्चित तौर पर रूस बाहर ही नहीं बल्कि अंदर से भी एक मजबूत राष्ट्र बन जाएगा। 
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1. वेनेजुएला की तरह रूस लगभग पूरी तरह से तेल निर्यात पर निर्भर हो गया है और अब हालत ये हो गई है कि दुनिया भर में तेल की कीमतें नीचे आ गई हैं।  

2. रूसी मुद्रा रूबल में भी लगातार गिरावट एक चिंता का विषय है। इससे रूसी लोगों को किसी भी तरह के भुगतान में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आज के समय में रूबल एक रद्दी मुद्रा की तरह हो गई है, जिससे लोग न तो घर, कार या टीवी ही खरीद पा रहे हैं बल्कि एक मामूली सा जूता खरीदने के लिए उन्हें कई बार सोचना पड़ रहा है। कुछ लोगों की तो हालत ऐसी है कि वह दो वक्त का खाना भी खरीद पाने में असमर्थ हैं। 

3. रूस की अर्थव्यवस्था पर तो जैसे फुल स्टॉप ही लग गया है। बिजनेसमैन ये नहीं सोच पा रहे हैं कि वो अपनी कंपनी को कैसे आगे बढाएं और अधिक लाभ कमाएं। उनकी हालत ऐसी हो गई है कि वो किसी भी चीज का भुगतान करने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। 

4. अतीत में रूस की अर्थव्यवस्था में गिरावट के काफी बुरे परिणाम देखने को मिले हैं। इस समय रूस में गरीबों की संख्या में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है और वो भी ऐसे गरीब जो बिना शिक्षा के हैं। पुतिन को रूस पर शासन करते 17 साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन उन्होंने वहां के बुनियादी ढांचे और शिक्षा को सुधारने के क्षेत्र में लगभग न के बराबर काम किया है। 


5. क्राइम और करप्शन के मामले में भी रूस कुछ कम नहीं है। राष्ट्रपति बनने से पहले व्लादिमीर पुतिन ने 16 सालों तक एक इंटेलिजेंस ऑफिसर के तौर पर काम किया है, लेकिन फिर भी वो इन दोनों चीजों पर लगाम लगाने में लगभग नाकाम रहे हैं। 

6. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रूस की किरकिरी हो रही है। सीरिया के मौजूदा हालात को लेकर रूस और अमेरिका कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। पिछले कुछ समय से दोनों में युद्ध जैसे हालात भी बने हुए थे। इसकी वजह से कई देशों से उसके रिश्तों पर काफी बुरा असर पड़ा है, जिसे सुधारना बेहद जरूरी है। 
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