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जिम्बाब्वेः चुनाव में 'धांधली' के आरोप
Updated Thu, 01 Aug 2013 09:16 PM IST
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जिम्बाब्वे के प्रधानमंत्री मॉर्गन चांगिराई ने देश में हुए राष्ट्रपति चुनावों में 'भारी धांधली' के आरोप लगाए हैं।
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उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की पार्टी को 'धांधली के लिए जिम्मेदार' बताया है। बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने राष्ट्रपति चुनावों को खारिज किया।
इससे पहले जिम्बाब्वे में सबसे बड़े चुनाव प्रेक्षक समूह ने कहा कि लगभग दस लाख लोगों को मतदान नहीं करने दिया गया। इस चुनाव प्रेक्षक समूह में 7,000 प्रेक्षक हैं ।
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वही मुगाबे की पार्टी ने धांधली के आरोपों से इनकार किया है और चुनाव प्रक्रिया को 'सुगम' बताया। मुगाबे की पार्टी बुधवार को हुए चुनावों में जीत का दावा कर रही है।
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'एमडीसी को दफ़न किया'
रॉबर्ट मुगाबे के दल के एक वरिष्ठ नेता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि, "हमने प्रधानमंत्री मॉर्गन चांगराई की पार्टी मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज को दफ़न कर दिया है।"
जिम्बाब्वे में अनाधिकारिक चुनाव नतीजों को प्रकाशित करना ग़ैरक़ानूनी है। चुनाव आयोग पाँच दिन बाद विजेता की घोषणा करेगा।
पर्यवेक्षक समूह ज़िम्बाब्वे इलेक्शन सपोर्ट नेटवर्क ने एक बयान में कहा कि शहरी इलाक़ो में 82 प्रतिशत मतदान केन्द्रों पर मत डालने आए लोगों को मतदान नहीं करने दिया गया।
ग्रामीण इलाकों में ऐसे मामले 40 प्रतिशत से कम केन्द्रों पर सामने आए।
89 वर्षीय मुगाबे ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी चुनाव हार जाती है तो वो सत्ता छोड़ देंगे। मुगाबे 33 साल से जिम्बाब्वे पर राज कर रहे हैं।
'असहज साथी'
मुगाबे की ज़ानू-पीएफ़ और चांगिराई की एमसीडी 2009 में हुए एक समझौते के तहत राष्ट्रीय एकता वाली सरकार चला रही हैं।
लेकिन इस कई मुद्दों पर उनके मतभेद बराबर बने रहे। पाँच साल पहले हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुई हिंसा को ख़त्म करने के लिए राष्ट्रीय एकता वाली ये सरकार गठित की गई थी।
जिम्बाब्वे में 2008 के राष्ट्रपति चुनाव का पहला दौर शांतिपूर्ण रहा लेकिन नतीजों की घोषणा के बाद तनाव शुरू हो गया। इन नतीजों में मॉर्गन चांगराई को रॉबर्ट मुगाबे से ज़्यादा वोट मिले थे।
दूसरे दौर के चुनाव में चांगिराई ने धांधली की आशंका के मद्देनज़र चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था।