'भीड़ मारती रही, पुलिस देखती रही'
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अफगानिस्तान में पिछले गुरुवार को भीड़ के हाथों मारी गई युवती के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसे बचाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किया।
फरखंदा नामक युवती को क्रोधित भीड़ ने तब मार डाला जब काबुल की एक मस्जिद के एक मुल्ला ने उसपर क़ुरान जलाने का आरोप लगाया। लेकिन जांच अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है। फरखंदा को डंडे, स्टंप, लात-घूंसों इत्यादि से पीटने के बाद कार में बांधकर घसीटा गया। बाद में उसे जला दिया गया।
फरख़ंदा के पिता के अनुसार जब भीड़ फ़रख़ंदा को पीट-पीटकर मार रही थी तब पुलिस खड़ी देख रही थी।घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फ़रख़ंदा की मुल्ला से इस बात को लेकर बहस हुई थी कि मुल्ला उन महिलाओं को तावीज बेचते हैं जिनके बच्चे नहीं हैं। पिछले हफ्ते मध्य काबुल में घटी इस घटना को रोक पाने में असमर्थ रहे 13 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
हत्या के विराध में सड़कों पर उतरे लोग
अफग़ानिस्तान में सैकड़ों लोगों ने फरखंदा को मारने और जलाए जाने के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में न्याय की मांग की और उसकी स्मृति स्वरूप वृक्षारोपण किया।
जनरल मोहम्मद ज़हीर ने उनके अंतिम संस्कार के वक़्त संवाददाताओं से कहा, ''पिछली रात मैनें सभी दस्तावेज़ों को खंगाला और सभी सबूतों को फिर से जांचा लेकिन ऐसे कोई सबूत नहीं मिले जिससे ये कहा जा सके कि फरखंदा ने पवित्र कुरान जलाया था। वो पूरी तरह से निर्दोष थीं।'' अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इस हत्या की जांच के आदेश दिए हैं।