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'किराए के घर में रहने वाले प्रधानमंत्री'

Tue, 11 Feb 2014 09:27 AM IST
Updated Tue, 11 Feb 2014 09:27 AM IST
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prime minister live on rent

महज तीन साल पहले सुशील कोइराला ने देश के सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी के नेपाली कांग्रेस की कमान संभाली थी और अब वे देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं।

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कोइराला का राजनीतिक अनुभव करीब छह दशक पुराना हो चुका है और वे उन चुनिंदा राजनीतिज्ञों में शामिल हैं जो साफ सुथरी की राजनीति में यकीन रखते हैं। वे सामान्य जीवनशैली के लिए भी जाने जाते हैं।
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वैसे सुशील कोइराला अपनी युवावस्था में हॉलीवुड हीरो बनने का सपना देखा करते थे। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। अब 75 साल की उम्र में उन्हें नेपाल के अधूरे संविधान को पूरा करने के लिए किसी हीरो की माफिक ही काम करना होगा।
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प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद कोइराला ने कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता नेपाली संविधान को पूरा करने की होगी।
उनका जन्म नेपाल के कोइराला परिवार हुआ था, जिसकी प्रतिष्ठा ठीक उसी तरह की है जैसी पाकिस्तान में भुट्टो परिवार की है या फिर भारत में गाँधी परिवार की।

युवावस्था से ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी पैदा हो चुकी थी। उनकी मां गिरजा प्रसाद कोइराला की मां की छोटी बहन थीं।

किराए के घर में क्यों रहेंगे प्रधानमंत्री?

prime minister live on rent

गिरिजा प्रसाद कोइराला और नेपाली राजनीति के दूसरे अजीम शख़्सियत बीपी कोइराला से नजदीकी के चलते वे लोकतांत्रिक आंदोलन में शामिल हो गए। 21 साल की उम्र में उन्हें भारत में निर्वासित जीवन बिताना पड़ा। यह वह दौर था जब किंग महेंद्र ने देश के पहले चुने हुए प्रधानमंत्री बीपी कोइराला को 1960 में बर्ख़ास्त कर दिया था। उन्होंने निर्वासन के 20 साल भारत में गुजारे।

कोइराला अविवाहित जीवन व्यतीत करते रहे हैं और इस दौरान वे कई बार नेपाली सांसद बने। लेकिन हर बार उन्होंने मंत्री बनने से इनकार कर दिया। गिरिजा प्रसाद कोइराला ने तो 1990 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें उपप्रधानमंत्री पद की पेशकश भी की थी।

इतना ही नहीं नेपाल के इस प्रधानमंत्री का अपना कोई घर तक नहीं है, नेपाली राजनीति में यह किसी अचरज से कम नहीं है। सुशील कोइराला काठमांडू में अपने रिश्तेदारों के घर ही रहते रहे। गिरिजा प्रसाद कोइराला की 2010 की मौत के बाद सुशील किराए के मकान में रहने चले गए।

जब गिरिजा प्रसाद कोइराला प्रधानमंत्री थे और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तब सुशील उनके निकट सहयोगी की भूमिका निभाते रहे। हालांकि उन्होंने तब कोई भी लाभ का पद नहीं लिया था। इसके लिए उनकी आलोचना भी होती रही कि वे सिर्फ डार्क रूम राजनीति में दिलचस्पी लेते रहते हैं।

हालांकि उनकी आलोचना करने वाले ये भी कहते हैं कि गिरिजा प्रसाद कोइराला की वजह से उन्हें पार्टी में इतना रूतबा हासिल था। लेकिन हकीकत यही है कि गिरिजा प्रसाद कोइराला के नेतृत्व में जो पार्टी पहले संविधान सभा चुनाव में 2008 में दूसरी बड़ी पार्टी बनी थी वह सुशील कोइराला के नेतृत्व में पहले स्थान पर आ गई।

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