प्यार के लिए प्रचंड के बेटे को छोड़ना पड़ा देश

बीबीसी हिंदी Updated Wed, 05 Dec 2012 02:17 PM IST
prachanda son leaves nepal for love
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के चेयरमैन पुष्प कमल दहाल जिन्हें ज्यादातर लोग प्रचंड के नाम से जानते हैं, आजकल देश की गरमाई राजनीति में व्यस्त हैं लेकिन उनके इकलौते बेटे प्रकाश दहाल पिछले पांच महीने से दिल्ली में रह रहे हैं।

ऐसी ख़बरें आने के बाद कि प्रकाश पार्टी सदस्य और एवरेस्ट पर्वतारोही बीना मगर के साथ भाग गए हैं, प्रचंड ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। प्रकाश का अपनी पहली पत्नी से तलाक हो गया है और दूसरी पत्नी सृजना से एक संतान भी है। बीबीसी नेपाली सेवा के शरद केसी ने दिल्ली में उनसे बात की।

शरद: आप बीना से शादी करने के बाद भारत आए। आपकी नेपाल लौटने की कब योजना है?
प्रकाश: मैं अपने परिवार में हुए तनाव की वजह से यहां हूं। मैं यहां इसलिए आया हूं क्योंकि मैं अपने पिता और पार्टी चेयरमैन के लिए कोई असहज स्थिति पैदा नहीं करना चाहता हूं। मैं यहां तब तक रहूंगा जबतक पार्टी अपना फैसला नहीं बदलती और हालात सामान्य नहीं हो जाते।

शरद: बीना से शादी के बाद पार्टी ने जब आपको छह महीने के लिए निलंबित कर दिया तभी आपने यहां आने का फैसला लिया?
प्रकाश: मैंने ये नहीं कहा कि हमारी शादी हो गई है। हां ये ज़रूर है कि हम एक-दूसरे के बेहद क़रीब हैं। मीडिया ने इस बात को कुछ ज़्यादा ही तूल दे दी है।

ये हमारा निजी मामला है और ये किसी भी परिवार में हो सकता है। इस बात पर ज़्यादा ध्यान इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि मैं चेयरमैन प्रचंड के परिवार से आता हूं। मैं यहां इसलिए रह रहा हूं क्योंकि मेरे क़दम को पार्टी नियमों के खिलाफ़ करार दिया गया है।

शरद: क्या आप छह महीने की निलंबन की अवधि समाप्त होने के बाद नेपाल लौटेंगे?
प्रकाश: पार्टी ने मेरे खिलाफ़ कार्रवाई की है और मुझे छह महीने तक निलंबित करने का फैसला लिया है। जो कुछ भी हुआ है वो मेरा निजी मामला है। निलंबन काल के गुज़रने के बाद मैं निश्चित तौर पर नेपाल जाना चाहूंगा और पार्टी मुझे जो जिम्मेदारी सौंपेगी वो ज़रूर पूरी करूंगा।

शरद: क्या आप अपनी कमज़ोरियों को स्वीकार करते हैं?
प्रकाश: जो कुछ भी मीडिया में रिपोर्ट किया गया है कि प्रकाश बुरा आदमी है, और न जाने क्या क्या - ये सब ग़लत है। देखिए सृजना के साथ मेरा वैवाहिक जीवन ठीक नहीं चल रहा था।

मेरे परिवार में सभी ये बात जानते हैं। जब मैं, बीना और टीम के अन्य सदस्य एवरेस्ट से लौटे तो सृजना ने कहा कि वो मेरे साथ खुश नहीं है और मुझे छोड़कर चली गई। मैं तनाव और दबाव में था। सृजना मेरे साथ रहना नहीं चाहती थी और मैंने उसका इंतज़ार भी नहीं किया। मेरी ग़लती ये है कि मैंने सृजना के साथ रिश्ता औपचारिक रूप से खत्म नहीं किया। मैंने असल में एक प्रक्रियात्मक ग़लती की।

शरद: क्या आप यहां काम भी कर रहे हैं?
प्रकाश: शुरुआत में मैंने एक शॉपिंग मॉल में क़रीब डेढ़ महीने तक काम किया। लेकिन बाद में मैं बीमार हो गया और लोगों से मिलने में व्यस्त हो गया। मुझे काम का थोड़ा अनुभव हो गयाहै लेकिन अब मैं काम नहीं कर रहा।

शरद: क्या आप अपने परिवार के संपर्क में हैं?
प्रकाश: परिवार तो सबको प्यारा होता है। मां सबको प्यारी होती है। आप चाहे कुछ भी कर दें आपके माता-पिता हमेशा आपको माफ़ करते हैं। आखिरकार आप उनके ही तो ख़ून हैं। वे हमेशा आपको प्यार करते हैं। मैं अपनी मां और बहनों के संपर्क में हूं, उन्हें नियमित रूप से फ़ोन करता हूं।

शरद: और पिता से?
प्रकाश: नहीं, अपने पिता को मैंने पिछले पांच महीनों से फ़ोन नहीं किया है।

शरद: आपकी मां और बहनों ने आपसे क्या कहा?
प्रकाश: मैंने उनसे कहा था कि सृजना और मेरे संबंध शादी के बाद अच्छे नहीं थे। लेकिन मेरी मां और बहनों ने मुझसे कहा कि सृजना से औपचारिक रूप से संबंध खत्म नहीं करके मैंने ग़लत किया और इसी वजह से ये एक सार्वजनिक सनसनी का मामला बन गया। उन्होंने मुझे सलाह दी कि अब मुझे खुद को बदलना चाहिए, घर लौटना चाहिए और पार्टी संगठन के लिए काम करना चाहिए।

शरद: लेकिन लोग तो ये भी कहते हैं कि आपकी मां के अधिक दुलार की वजह से ही आप आज ये सब झेल रहे हैं?
प्रकाश: ये ग़लत है। देखिए माओवादी सशस्त्र संघर्ष के दौर में मैं चेयरमैन प्रचंड की बंदूक लेकर चला हूं। कई बार मैंने उनकी गाड़ी चलाई है और उनका कैमरा उठाया है। हर परिस्थिति और क्षण में पार्टी ने मुझे जो भी ज़िम्मेदारी दी मैंने उसे पूरी ईमानदारी से पूरा किया। लेकिन अफ़वाह उड़ाने वाले हमेशा मुझे प्रचंड का बेटा ही प्रचारित करते रहे, माओवादी कैडर नहीं।

शरद: आखिर में, आप यहां दिल्ली से अपने पिता और बाकी के पारिवारिक सदस्यों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
प्रकाश: देखिए, मैं मीडिया में ज़्यादा बात नहीं करना चाहता। जब भी मैं मीडिया से बात करता हूं, मेरी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। वो बातें भी कही जाती हैं जो मैंने कही नहीं होती हैं। बात का बतंगड़ बना दिया जाता है।

हां, ये ठीक है कि चेयरमैन और उनके परिवार की देश के प्रति बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। लेकिन लोगों को ये समझना होगा कि चेयरमैन का परिवार भी परिवार होता है, उनकी भी समस्याएं हो सकती हैं।

चेयरमैन के परिवार का मतलब ये नहीं है कि वो पूरी तरह से एक आदर्श परिवार होगा जैसे कि ईश्वर ने उसे बनाया हो। हर परिवार समस्याओं का सामना करता है, उसके कुछ दुख-दर्द होते हैं।

मेरे मामले में हो सकता है कि मेरी कुछ समस्याएं हों और सृजना भी परेशान हो सकती है। लोगों को अब गड़े मुर्दे नहीं उखाड़ना चाहिए। लोगों को ये सोचना चाहिए कि हालात कैसे ठीक हो सकते हैं, आगे कैसे बढ़ा जा सकता है।

ये ठीक है कि मैं क्रांतिकारियों के परिवार से आता हूं। अब मेरी वजह से परिवार ने जो कुछ भी सहा है, मैं उसे ठीक करना चाहता हूं। मैं अपने परिवार को ये संदेश देना चाहता हूं कि मैं इन सब से उबरना चाहता हूं और जल्दी ही पार्टी के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहता हूं।

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