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नेपाल की ओली सरकार पर ‘प्रचंड’ संकट टला

Fri, 06 May 2016 04:44 AM IST
अतुल मिश्र/अमर उजाला, काठमांडू
अतुल मिश्र/अमर उजाला, काठमांडू Updated Fri, 06 May 2016 04:44 AM IST
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prachand u turn on the matter of forming government in nepal
प्रचंड ने सरकार बनाने के फैसले पर लिया यूटर्न

एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड ने खुद के नेतृत्व में सरकार गठन करने की अपील से 24 घंटे के भीतर ही यू-टर्न ले लिया है। एमाओवादी ने फिलहाल के लिए सरकार को दिए अपने समर्थन को वापस न लेने की घोषणा की है। इससे ओली सरकार पर बना संकट फिलहाल के लिए टल गया है।

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प्रचंड ने बृहस्पतिवार को कार्ल मार्क्स की जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि कांग्रेस के एमाओवादी को राष्ट्रीय सरकार का नेतृत्व करने के लिए आग्रह करने के बाद भी कई पार्टियां इसके लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में सरकार बनाना उचित नहीं है । प्रचंड ने कहा कि फिलहाल मौजूदा सरकार का ही वह समर्थन करेंगे। सूत्रों की मानें तो नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार के साथ स्थानीय चुनाव तक माओवादी अपना समर्थन बनाए रखेंगे। बुधवार रात को इस संबंध में मौखिक समझौता हुआ।
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नेपाल की घटनाओं पर भारत की सतर्क नजर

भारत ने बृहस्पतिवार को कहा है कि वह नेपाल में बदल रहे हालात पर नजर रखे हुए है। माओवादियों के ओली सरकार से समर्थन वापस लेने के एलान के बाद से तेजी से बदल रहे घटनाक्रम पर भारत करीब से नजर रख रहा है। यह कहना है भारतीय विदेश मंत्रालय का। मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, ‘यह नेपाल की अंदरूनी राजनीति गतिविधियों का मामला है। इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। मगर, एक पड़ोसी होने के नाते भारत नेपाल में हो रही गतिविधियों पर करीब से निगाह रख रहा है।’

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संविधान फिर से लिखने की मांग ओली ने ठुकराई

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फिर से संविधान लिखने की मांग ठुकराई

वहीं, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आंदोलनरत मधेसियों की मांगों के मद्देनजर कहा कि अब संविधान को फिर से लिखा नहीं जा सकता।  इसमें सिर्फ संशोधन ही संभव है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि संविधान को फिर से लिखा जा सके। क्योंकि इसे बनाने वाली संविधान सभा संसद में तब्दील हो चुकी है। जिसे संविधान दोबारा से लिखने का हक नहीं है। हालांकि हम संविधान में संशोधन कर सकते हैं और दोबारा से असंतुष्ट लोगों को साथ लाने की कोशिश करेंगे।

ओली ने कहा कि उनकी सरकार मधेसियों की मांगों के प्रति खासा गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत के जरिए मधेसियों की सभी मांगों का हल निकालना चाहती है। सात प्रांतीय मॉडल वाले नए संविधान को लेकर मधेसी आंदोलन कर रहे हैं। ओली ने यह भी कहा कि जब तक संसद नहीं कहेगी, तब तक वह सरकार नहीं छोड़ेंगे। ओली बृहस्पतिवार को संसद को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार को संसद ने बनाया है और ऐसे में जब तक संसद चाहेगी, तब तक उनकी सरकार चलती रहेगी। पीएम ओली के संबोधन के दौरान माओवादी अध्यक्ष प्रचंड संसद में उपस्थित नहीं थे।

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