फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Rest of World ›   PM Modi meets Myanmar State Counsellor Aung San Suu Kyi in Nay Pyi Taw

म्यांमार: साझा बयान में बोले PM मोदी, रोहिंग्या मुसलमानों का भारत आना बड़ी समस्या

Wed, 06 Sep 2017 12:53 PM IST
अमर उजाला, डिजिटल ब्यूरो
अमर उजाला, डिजिटल ब्यूरो Updated Wed, 06 Sep 2017 12:53 PM IST
विज्ञापन
PM Modi meets Myanmar State Counsellor Aung San Suu Kyi in Nay Pyi Taw
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आंग सान सू की - फोटो : PIB

म्यांमार दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यहां के स्टेट काउंसलर आंग सान सू की से मुलाकात की। इस मौके पर दोनों देशों के बीच डेलिगेशन लेवल की बातचीत हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने रोहिंग्या मुसलमानों का जिक्र करते हुए कहा कि म्यांमार की चिंता में हम भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि म्यांमार में शांति के लिए भारत हर संभव मदद करेगा।

विज्ञापन

 
रोहिंग्या मुसलमानों का भी मुद्दा
इस दौरान पीएम मोदी ने रोहिंग्या मुसलमानों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों का क्षेत्र रखाइन है। रोहिंग्या मुसलमान भारत में अवैध रुप से घुसपैठ कर रहे हैं, जो भारत के लिए बड़ी समस्या है। आपको बता दें कि म्यांमार के रखाइन क्षेत्र में ही सरकार और रोहिंग्या मुसलमानों के बीच तनाव चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

  म्यामांर के 40 कैदियों को छोड़ने का फैसला
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा, ''म्यांमार के जो नागरिक भारत की सैर करना चाहते हैं, उन्हें ग्रेटिस वीजा दिया जाएगा और भारत की जेलों में बंद 40 म्यामांरवासियों को छोड़ दिया जाएगा।''
 

रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन से हम भी चिंतित
पीएम मोदी ने कहा, ''रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन से हम भी चिंतित हैं। रोहिंग्या गैर कानूनी रूप से भारत में घुसते हैं। रोहिंग्या मुसलमानों का भारत आना बड़ी समस्या है। पड़ोसी होने के नाते हमारे हित एक समान है इसलिए म्यांमार में शांति के लिए भारत उसकी हर संभव मदद करेगा।''

इस मौके पर दोनों देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई।पीएम मोदी और स्टेट काउंसलर आंग सान के बीच हुई डेलिगेशन लेवल की बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए। खबरों के मुताबिक इस दौरान भारत और म्यामांर के बीच आपसी सहयोग पर भी बातचीत हुई।

 


 

इस मुलाकात से पहले ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि पीएम मोदी और आंग सान सू के बीच भारत में अवैध ढंग से रह रहे 40000 रोहिंग्या मुसलमानों पर भी चर्चा हो सकती है।
 

रिश्तों को और मजबूत करने पर चर्चा
इससे पहले पीएम मोदी ने मंगलवार को म्यांमार के प्रेसिडेंट से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि म्यांमार के राष्ट्रपति हिन क्याव से मुलाकात काफी सुखद रही। दोनों पड़ोसियों के बीच ऐतिहासिक रिश्ते को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

 




राष्ट्रपति हिन क्याव से की मुलाकात

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को पहली बार द्विपक्षीय यात्रा पर म्यांमार पहुंचे और तुरंत वहां के राष्ट्रपति हिन क्याव से मुलाकात की। उन्होंने ट्विटर के जरिये मुलाकात की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं।
 

2014 में आसियान बैठक में हिस्सा लेने म्यांमार आए थे PM मोदी
आपको बता दें कि इससे पहले मोदी 2014 में आसियान बैठक में हिस्सा लेने म्यांमार आए थे। म्यांमार से भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों की 1640 किलोमीटर की सीमा लगती है और सामरिक दृष्टि से यह काफी संवेदनशील है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति हिन क्याव को सालवीन नदी का 1841 का एक मानचित्र और एक बोधि वृक्ष भेंट किए। मोदी चीन में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद सीधे म्यांमार पहुंचे। दोनों नेताओं ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया।
 
शरणार्थियों से बर्ताव पर हमें कोई न सिखाए: रिजिजू
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या पर कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि दुनिया में जितने भी शरणार्थी हैं, उनका एक बड़ा हिस्सा भारत में है और इसलिए हमें शरणार्थियों के बारे में कोई नसीहत नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि वह विश्व समुदाय को बताना चाहते हैं कि रोहिंग्या संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के तहत पंजीकृत हों या न हों, लेकिन भारत में वह अवैध शरणार्थी हैं। उन्हें भारत से जाना ही पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed