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तस्करी के शुक्राणुओं से जन्म ले रहे फलस्तीनी
Updated Sat, 16 Mar 2013 07:15 PM IST
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मुहन्नद जिबेन को दुनिया में आए कुछ ही सेकेंड हुए हैं लेकिन एक शिशु के तौर उसकी आवाज बेहद बुलंद है। इस बीच एक झटके में दाई ने उनकी नाल काटी और अस्पताल के कमरे में जश्न का माहौल पसर गया।
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जिबेन का जन्म पिछले साल अगस्त में नब्लूस अल-अरेबिया अस्पताल में हुआ।
जन्म के कुछ घंटों बाद अपनी मां दल्लाल के हाथों में पहुंचकर जिबेन की हालत स्थिर हो गई, लेकिन उनके पिता का कोई अता-पता नहीं।
मुहन्नद जिबेन के पिता अम्मार जिबेन 1997 में यरुशलम में हुए एक बम धमाके के आरोप में इसराइल की एक जेल में 32 साल की सज़ा काट रहे हैं।
दल्लाल कहती हैं कि ऐसे में वो गर्भवती हो पाईं क्योंकि उनके पति के शुक्राणु तस्करी के जरिए जेल से उन तक पहुंच पाए।
शुक्राणुओं की तस्करी
बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि मुहन्नद ईश्वर का तोहफा है, लेकिन ये सच है कि मेरे पति जब तक मेरे पास नहीं होंगे तब तक ये खुशी अधूरी है।
दल्लाल का मामला कई दिनों कर सुर्खियों में छाया रहा था। इसके बाद से अब तक बीबीसी गजा पट्टी में मौजूद दो गर्भाधान केंद्रों में डॉक्टरों से बात कर चुकी है और उनका कहना है कि अब तक दस से ज्यादा फलस्तीनी महिलाएं तस्करी के जरिए उन तक पहुंचाए गए जेलों में बंद अपने पतियों के शुक्राणुओं से गर्भवती हुई हैं।
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डॉक्टर सालेम अबु खैजरान कहते हैं, ''सच कहूं तो मुझे नहीं पता कि वो लोग ये कैसे करते हैं, और मैं जानना भी नहीं चाहता। मैं ये सब केवल मानवता के नाते कर रहा हूं। कैदियों पर हर किसी की नज़र रहती है लेकिन इन औरतों के दुख के बारे में कोई नहीं सोचता।''
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डॉक्टरों का कहना है कि ये महिलाएं प्लास्टिक का शीशियों से लेकर कांच के कप तक मैं अपने पति का वीर्य लेकर हमारे पास आती हैं।
डॉक्टर खैजरान कहते हैं कि आईवीएफ तकनीक के जरिए गर्भाधान के लिए शुक्राणु 48 घंटों तक सुरक्षित रह सकते हैं। इसके बाद उन्हें जमाकर सुरक्षित रखा जा सकता है।
कई सावधानियां
कई बार ऐसा भी होता है कि शुक्राणु डॉक्टर की क्लीनिक तक पहुंचने से पहले खराब हो जाते हैं और ऐसे में इन महिलाओं को दोबारा कोशिश करनी पड़ती है।
इस तरह की क्लीनिक आमतौर पर उन महिलाओं के इलाज से बचती है जिनके पास पहले से दो या तीन बच्चे हों। इसके अलावा आईवीएफ से पहले महिला को कुछ ऐसे साक्ष्य भी जुटाने होते हैं जिनसे साबित हो जाए कि ये शुक्राणु उसके पति के ही हैं।
लेकिन बरतने के लिए सावधानियां और भी हैं। डॉक्टर खैजरान कहते हैं कि जब पूरा गांव ये जानता हो कि महिला का पति 10 से 15 साल से जेल में है, तो हम ये नहीं चाहते कि अचानक लोगों को ये पता चले कि वो गर्भवती है।
हम महिला को सलाह देते हैं कि वो कुछ लोगों को यह बताए कि अपने पति के वीर्य से ही वो गर्भ-धारण कर रही है। हालांकि इसराइली जेल सेवा (आईपीएस) क्लिक करें तस्करी के इन मामलों को संदेह की नजर से देखती है।
कैदियों को मिले अधिकार
जेल प्रशासन के प्रवक्ता सिवान विजमान के मुताबिक, हम ये तो नहीं कह सकते कि ऐसा कभी नहीं हुआ है। लेकिन ये जरूर है कि आमतौर पर ऐसा होना बेहद मुश्किल है क्योंकि कैदियों के रिश्तेदारों से मिलने के दौरान बेहद कड़ी निगरानी रखी जाती है।
हालांकि कैदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों का मानना है कि जिस तरह इसराइली कैदियों अलग-अलग अधिकार हासिल हैं, उसी तरह फलस्तीनी कैदियों को भी अपने परिवारों से मिलने और पत्नियों के साथ वक्त गुजारने का मौका मिलना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर शुक्राणुओं की ये तस्करी जारी रहेगी।
जो भी हो डॉक्टर खैजरान इस बात से बेहद खुश हैं कि आने वाले महीनों में उनके पास आई कई और महिलाएं बच्चों को जन्म देने वाली हैं।
जॉन डॉनिसन
बीबीसी न्यूज, गजा