ट्रंप की मौजूदगी में शरीफ को नहीं मिला बोलने का मौका, पाक में हाय-तौबा
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पाक पीएम विपक्षी दलों से लेकर मीडिया तक के निशाने पर आ गए हैं। डेली पाकिस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सम्मेलन में शरीफ को शर्मसार होना पड़ा जब आतंकवाद पर उन्हें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि शरीफ ने सऊदी के लिए अपनी फ्लाइट के दौरान दो घंटे लगाकर लंबा भाषण तैयार किया था। गौर करने वाली बात यह है कि इस सम्मेलन में उन देशों के नेताओं को भी बोलने का मौका मिला जो आतंकवाद से ज्यादा प्रभावित नहीं हैं। जबकि नवाज शरीफ की पूरी तरह अनदेखी की गई।
इतना ही नहीं, ट्रंप ने एक बार भी अपने भाषण में नवाज शरीफ या पाकिस्तान का जिक्र तक नहीं किया। शरीफ के सामने ही उन्होंने भारत को आतंकवाद से पीड़ित मुल्क बताया। इस बैठक में ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं से अपील की कि वे मिलकर आतंकवाद का मुकाबला करें।
द नेशन में भी प्रकाशित लेख में नवाज शरीफ की इस बेइज्जती का जिक्र किया गया है। इसमें लिखा है, ‘कुछ बहुत ही गलत हुआ है। रियाद में रविवार को आयोजित यूएस-अरब इस्लामिक समिट में हिस्सा लेने पीएम नवाज शरीफ की अगुआई में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई घटना के बारे में ऐसा ही कहा जा सकता है’। ज्यादातर पाकिस्तानी मीडिया में ये बात की जा रही है कि इकलौते परमाणु ताकत वाले इस्लामिक राष्ट्र की पूरी बेइज्जती हुई है।
द नेशन के लेख में जिक्र है कि किस तरह ट्रंप ने आतंकवाद के पीड़ित के तौर पर भारत, रूस, चीन और ऑस्ट्रेलिया का नाम तो लिया, लेकिन 70 हजार आम लोगों को गंवाने वाले पाकिस्तान का एक बार भी जिक्र नहीं लिया।
इसके मुताबिक आतंकवाद के पीड़ित के तौर पर भारत की चर्चा ऐसे समय में पाक के लिए बेहद चुभने वाली है, जब वह कुलभूषण जाधव के केस के जरिए भारत के खिलाफ अपनी बात को साबित करना चाहता है।
इमरान ने की आलोचना
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान ने कहा कि शरीफ ने देश को शर्मसार किया है। सवाल पूछे जा रहे हैं कि शरीफ आखिर रियाद गए ही क्यों थे। इमरान ने आरोप लगाया कि पूरे सम्मेलन के दौरान नवाज शरीफ मूकदर्शक बने रहे।
आगे कहा कि नवाज शरीफ को कश्मीर और फलस्तीन के बारे में बात करनी चाहिए थी। इमरान ने कहा कि पीएम नवाज शरीफ को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को उनके भाषण के लिए निशाने पर लेना चाहिए था, जिसमें उन्होंने ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की बात कही है।