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एक मुस्लिम महिला का मुस्लिप पुरुष के लिए पत्र

Fri, 01 Apr 2016 05:05 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Apr 2016 05:05 PM IST
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open letter to Muslim men from an Muslim woman
- फोटो : Getty Images

प्रिय मुस्लिम पुरुष,

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मुझे अब भी वो दिन याद है जब मेरी मां ने मुझे बताया कि उनकी जिंदगी  खतरे में थी। उनसे उनके धरती पर अस्तित्व के लिए पूछताछ की जा रही थी क्योंकि उन्होंने निर्णय ले लिया था कि वो थक गई हैं। वो उन सभी माताओं, बहनों और बेटियों के लिए थक गई हैं जिनका जन्म  एक्स और वाई गुणसूत्र की वजह से हो गया। 

उनकी मांग क्या क्या थी? केवल मस्जिद में प्रार्थना करने के लिए जगह मांग रही है। बावजूद इसके कि  वो खुद को संभवतः खुद को एक लाइन पर डाल रही थी, वो उस जमीन पर खड़ी थी जहां से वो हमसे छीने गए हक पर दावा कर रही थी। यह किसी दूसरी जगह नहीं हुआ बल्कि यह इसी ब्रिटेने की जमीन पर हुआ। मेरी मां के साथ यह घृणित  अपराध हुआ जब उसने अपने ईश्वर प्रदत्त अधिकारों की मांग कर रही थी। 
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हालांकि वो समझदार थी, वो वह नहीं पूछना चाहती थी जो कोई बड़ी धमकी दे, जिसे ध्यान से बनाया गया है, जो धार्मिक रूप से बैठ बनाया गया गै जिसका उद्गगम सदियों पहले पुरुषवादी मानसिकता द्वारा किया गया था। एक अपमानजनक इच्छा के तहत वो चाहती थी कि वो उस मस्जिद में जाकर प्रार्थना कर सके जिसे इस बात के प्रदर्शन के लिए बनाया गया है कि वो केवल पुरुषों के लिए है।
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हम एक मस्जिद की मीटिंग में शामिल हुए। जिसे 'सबके (पब्लिक के) लिए खुला' कह कर प्रचारित कराया गया था। लेकिन वहां जैसे ही मेरी मां ने कुछ सहयोग करने के लिए कहा उन पर गलत तरीके से चिल्ला कर उन्हें चुप करा दिया गया। हमे किसी ने यह भी नहीं बताया कि 'सब में' महिलाएं शामिल नहीं है।

पुलिस के हस्तक्षेप से हमें प्रार्थना करने के लिए थोड़ी सी जगह दे दी गई। इसके बावजूद भी हमें भय लगता था। प्रार्थना करने के दौरान हम पर वयंग्तामक कमेंट किए जाते थे। हम खुद को असुरक्षित महसूस करते थे।


आसानी से कहूं तो हमें तुम्हारी तरह बुद्धिजीवी, आधायत्मिक और सामाजिक रूप से बराबरी का हक है। हम विरोधाभास की विशालता को समझते हैं जिसे तुममें से कुछ लोग प्रोपैगैण्डा के तहत जारी रखोगे। बावजूद इसके कि तुम्हारे कुछ उत्कट प्रयासों के और शास्त्र की व्याख्याओं का गलत उपयोग करने से भी, हम तु्म्हारा यकीन नहीं करते। हमें मजबूत बनाने की जरूरत नहीं है। हमारी उन चीजों की मान्यता को प्रदान करने की जरूरत है जो हमारी मजबूती से बाहर आती है।

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