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उत्तर कोरिया ने दुनिया को दिखाई ताकत मगर अमेरिका को आंखें दिखाने से बचा
एजेंसी, प्योंगयांग
Updated Mon, 10 Sep 2018 01:56 AM IST
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बेकडू पर्वत पर खड़े हुए उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन
- फोटो : KCNA
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अपनी 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर परमाणु सम्पन्न उत्तर कोरिया ने एक विशाल सैन्य परेड का आयोजन कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई। हालांकि इस दौरान अमेरिका के मुख्य भूभाग तक मार करने में सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (आईसीबीएम) का प्रदर्शन न करके वह अमेरिका को आंखें दिखाने से बचता नजर आया।
इस परेड में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने हिस्सा लिया लेकिन वहां जुटे लोगों को संबोधित नहीं किया। किम के सामने जवानों, तोपों और टैंकों का प्रदर्शन किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ जून में हुई ऐतिहासिक वार्ता के बाद पहली बार इस तरह का कार्यक्रम हुआ है। इसीलिए परेड में दिखाई गई सबसे बड़ी मिसाइलें छोटी दूरी की बैटलफील्ड डिवाइसें थीं।
उत्तर कोरिया ने लगभग आधी परेड घरेलू अर्थव्यवस्था का निर्माण करने के असैन्य प्रयासों को समर्पित किया। अर्थव्यवस्था पर अधिक जोर देना किम की आर्थिक विकास मोर्चे पर नई रणनीति को दिखाता है। कार्यक्रम में चीनी संसद के प्रमुख और उन देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद थे जिनके उत्तर कोरिया से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।
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तो चीन के लिए पैदा हो जाती मुसीबतें
कोरिया रिस्क ग्रुप के विशेषज्ञ एंड्री लंकोव ने कहा कि अगर उत्तर कोरिया आईसीबीएम दिखाते तो यह अमेरिका को बड़ा उकसावा होता और उसके के चेहरे पर थप्पड़ होता। वहीं यदि ऐसा होता तो इससे वहां मौजूद चीनी प्रतिनिधिमंडल के लिए भी मुसीबतें पैदा हो जाती।
70 सालों से राज कर रहा किम का परिवार
डेमोक्रेट्रिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की स्थापना 1948 में हुई और इसे आधिकारिक तौर पर उत्तर कोरिया कहा जाता है। उत्तर कोरिया के मौजूदा तानाशाह किम जोंग-उन का परिवार ही पिछले 70 साल से वहां शासन कर रहा है। उत्तर कोरिया लगभग हर साल सैन्य परेड निकालता है और उसने इस साल फरवरी में दक्षिण कोरिया में शुरू हुए ओलंपिक से पहले भी सैन्य परेड निकाली थी।
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इस परेड में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने हिस्सा लिया लेकिन वहां जुटे लोगों को संबोधित नहीं किया। किम के सामने जवानों, तोपों और टैंकों का प्रदर्शन किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ जून में हुई ऐतिहासिक वार्ता के बाद पहली बार इस तरह का कार्यक्रम हुआ है। इसीलिए परेड में दिखाई गई सबसे बड़ी मिसाइलें छोटी दूरी की बैटलफील्ड डिवाइसें थीं।
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उत्तर कोरिया ने लगभग आधी परेड घरेलू अर्थव्यवस्था का निर्माण करने के असैन्य प्रयासों को समर्पित किया। अर्थव्यवस्था पर अधिक जोर देना किम की आर्थिक विकास मोर्चे पर नई रणनीति को दिखाता है। कार्यक्रम में चीनी संसद के प्रमुख और उन देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद थे जिनके उत्तर कोरिया से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।
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तो चीन के लिए पैदा हो जाती मुसीबतें
कोरिया रिस्क ग्रुप के विशेषज्ञ एंड्री लंकोव ने कहा कि अगर उत्तर कोरिया आईसीबीएम दिखाते तो यह अमेरिका को बड़ा उकसावा होता और उसके के चेहरे पर थप्पड़ होता। वहीं यदि ऐसा होता तो इससे वहां मौजूद चीनी प्रतिनिधिमंडल के लिए भी मुसीबतें पैदा हो जाती।
70 सालों से राज कर रहा किम का परिवार
डेमोक्रेट्रिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की स्थापना 1948 में हुई और इसे आधिकारिक तौर पर उत्तर कोरिया कहा जाता है। उत्तर कोरिया के मौजूदा तानाशाह किम जोंग-उन का परिवार ही पिछले 70 साल से वहां शासन कर रहा है। उत्तर कोरिया लगभग हर साल सैन्य परेड निकालता है और उसने इस साल फरवरी में दक्षिण कोरिया में शुरू हुए ओलंपिक से पहले भी सैन्य परेड निकाली थी।