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'परमाणु समझौते' की कोई गारंटी नहीं: ईरान

Fri, 10 Apr 2015 03:59 PM IST
Updated Fri, 10 Apr 2015 03:59 PM IST
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no gurantee of nuclear deal: iran

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनई ने कहा है कि इस बात की ‘कोई गारंटी नहीं’ कि परमाणु कार्यक्रम पर विश्व के ताक़तवर देशों के साथ अंतिम समझौता हो जाएगा।

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इससे पहले राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि अंतिम समझौते पर ईरान तब तक हस्ताक्षर नहीं करेगा, जब तक आर्थिक पाबंदियों को ‘पहले दिन ही’ नहीं हटा लिया जाता है। ईरान और विश्व की अहम ताक़तों ने पिछले हफ्ते परमाणु कार्यक्रम पर प्राथमिक समझौता किया है।
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इसके बाद से ईरान और अमरीका अपने यहां के कट्टरपंथियों को समझौते का समर्थन करने के लिए समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

समझौते की शर्तें

no gurantee of nuclear deal: iran

समझौते के तहत ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम के ज़ख़ीरे को कम करेगा। इनका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है। ईरान को अपने सेंट्रिफ़्यूज़ की तादाद में भी दो तिहाई की कमी करनी होगी।

इसके बदले संयुक्त राष्ट्र और अमरीका और यूरोपीय संघ की ओर से अलग से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को धीरे धीरे कम किया जाएगा। ईरान अपने तरफ़ के वादे पूरे कर रहा है या नहीं इस बात की जांच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) करेगी।

खामेनाई की वेबसाइट पर छपे एक बयान में कहा गया है, “ये मुमकिन है कि ग़ैर भरोसेमंद पक्ष (वो छह शक्तियां जिन्होंने समझौते पर बातचीत की है) हमारे मुल्क को बातों में उलझाए रखना चाहते है।“

बयान में आगे कहा गया है, “मुझे अमरीका से बातचीत को लेकर कभी आशा नहीं थी। हालांकि मुझे इस मामले में उम्मीद नहीं थी लेकिन फिर भी मैं इस बातचीत के लिए तैयार हुआ और वार्ताकारों को भी समर्थन दिया।“

प्रतिबंध हटाने पर विवाद

no gurantee of nuclear deal: iran

रूहानी ने भी वैसे समझौते पर हस्ताक्षर की बात कही है जिसमें आर्थिक प्रतिबंध पहले दिन ही हटा लिए जाएंगे। रूहानी की टिपण्णी पश्चिमी देशों से अलग है जो ईरान के सहयोग के आधार पर आर्थिक प्रतिबंधों को धीरे धीरे हटाने की बात कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोस अर्नेस्ट ने कहा है, “हमारा रुख़ ये कभी नहीं था कि ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को पहले दिन ही हटा लिया जाएगा।“

हालांकि समझौते को लेकर ईरान में ख़ुशी मनाई गई लेकिन कुछ लोगों का मानना था कि ईरान ने थोड़ा पाया और बहुत ज़्यादा खोया है। उसी तरह अमरीका के कुछ सांसद भी इसके लेकर शंका में हैं। इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी समझौते का विरोध किया है।

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