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ट्रंप के संरक्षणवाद के खिलाफ भारत समेत 16 देश बनाएंगे नया कारोबारी गुट
एजेंसी, टोक्यो
Updated Mon, 02 Jul 2018 07:44 AM IST
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Donald Trump
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डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में तेजी से बढ़ रहे अमेरिका के संरक्षणवाद के खिलाफ भारत और जापान समेत दुनिया के 16 देश इस साल के अंत तक बड़ा कारोबारी गुट बना सकते हैं। इस दिशा में रविवार को एशियाई देशों के वाणिज्य मंत्रियों ने एक और कदम आगे बढ़ाया। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में मुक्त व्यापार समझौते पर इन सभी देशों के बीच आम सहमति बन सकती हैं।
जापान के टोक्यों में रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनामिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) के तौर पर 16 देशों के मंत्रियों ने बैठक की। इसमें आपसी मतभेदों को खत्म करने की कोशिश की गई। इस गुट भारत, चीन, जापान के साथ ही दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं। इसमें अमेरिका शामिल नहीं है। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने जल्द क्षेत्रीय व्यापार समझौते पर पहुंचने को कहा ताकि अमेरिकी संरक्षणवाद से निपटने के लिए मुक्त और नियम आधारित कारोबार को सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक के बाद सिंगापुर के वाणिज्य मंत्री के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जापानी वाणिज्य मंत्री हिरोशिगे सेको ने कहा कि समझौता का रास्ता साफ हो चुका है। दुनिया में जैसे जैसे संरक्षणवाद बढ़ रहा है, एशियाई देशों के लिए मुक्त व्यापार के रास्ते पर बढ़ना महत्वपूर्ण हो गया है। 16 देशों का यह गुट आकार लेता है तो यह दुनिया की एक तिहाई अर्थव्यवस्था और करीब आधी आबादी को कवर करेगा।
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इन देशों के बीच मतभेद को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें भारत की वह मांग भी शामिल है जिसके तहत वह वस्तु एवं सेवाओं पर टैरिफ घटाने के किसी भी करार में लोगों को बिना किसी बाधा के आवाजाही की इजाजत चाह रहा है। नई दिल्ली अपने उच्च कुशल आईटी क्षेत्र के लोगों के लिए मुक्त आवाजाही चाहता है।
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जापान के टोक्यों में रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनामिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) के तौर पर 16 देशों के मंत्रियों ने बैठक की। इसमें आपसी मतभेदों को खत्म करने की कोशिश की गई। इस गुट भारत, चीन, जापान के साथ ही दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं। इसमें अमेरिका शामिल नहीं है। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने जल्द क्षेत्रीय व्यापार समझौते पर पहुंचने को कहा ताकि अमेरिकी संरक्षणवाद से निपटने के लिए मुक्त और नियम आधारित कारोबार को सुनिश्चित किया जा सके।
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बैठक के बाद सिंगापुर के वाणिज्य मंत्री के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जापानी वाणिज्य मंत्री हिरोशिगे सेको ने कहा कि समझौता का रास्ता साफ हो चुका है। दुनिया में जैसे जैसे संरक्षणवाद बढ़ रहा है, एशियाई देशों के लिए मुक्त व्यापार के रास्ते पर बढ़ना महत्वपूर्ण हो गया है। 16 देशों का यह गुट आकार लेता है तो यह दुनिया की एक तिहाई अर्थव्यवस्था और करीब आधी आबादी को कवर करेगा।
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इन देशों के बीच मतभेद को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें भारत की वह मांग भी शामिल है जिसके तहत वह वस्तु एवं सेवाओं पर टैरिफ घटाने के किसी भी करार में लोगों को बिना किसी बाधा के आवाजाही की इजाजत चाह रहा है। नई दिल्ली अपने उच्च कुशल आईटी क्षेत्र के लोगों के लिए मुक्त आवाजाही चाहता है।