नेपाली पीएम ओली ने दिया इस्तीफा, नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू
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नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश में जारी राजनीतिक संकट के बीच रविवार शाम को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। रविवार को नेपाल की संसद में अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए ओली ने कहा, ‘मैंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी को भेज दिया है। मुझे मालूम है कि यहां मेरे पक्ष में बहुमत नहीं आएगा।’ ओली ने अविश्वास प्रस्ताव को रहस्यमय और अप्रत्याशित करार दिया। उन्होंने 11 अक्तूबर 2015 को नेपाल के 38वें प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता संभाली थी। प्रधानमंत्री के चुनाव में ओली को 338 मत मिले थे।
ओली की सरकार में तत्कालीन एकीकृत नेपाल कम्यूनिस्ट माओवादी, राष्ट्र प्रजातंत्र पार्टी नेपाल, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, मधेसी जनाधिकार फोरम लोकतांत्रिक, नेपाल मजदूर किसान पार्टी, राष्ट्रीय जनमोर्चा और नेपाल परिवार दल जैसी राजनीतिक पार्टियां शामिल थीं। पीएम ओली के खिलाफ संसद में पेश अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में सत्तारूढ़ सहयोगी एकीकृत नेपाल कम्यूनिस्ट माओवादी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और मधेसी जनाधिकार फोरम जैसी राजनीतिक पार्टियां आ गई थीं, जिसके बाद ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
वहीं, ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल के सबसे बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी केंद्र और अन्य छोटे दल मिलकर नई सरकार गठित करने की कवायद शुरू कर दी है। कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी केंद्र की ओर से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद मधेसी जनाधिकार फोरम और राष्ट्र प्रजातंत्र पार्टी नेपाल ने सरकार का साथ देने का निर्णय लिया था, लेकिन इन दोनों दलों ने संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस शुरू होने के बाद एन वक्त पर सरकार का साथ छोड़ दिया।
संसद में कमजोर हो गया था ओली सरकार का पक्ष
ओली के इस्तीफा देने के पीछे संसद में सहयोग का गणित भी है। दरअसल 598 सदस्यों की नेपाल संसद में अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में नेपाली कांग्रेस के 183 सांसद, सीपीएन-एमसी के 70 और सीपीएन-यूनाइटेड के तीन सांसद उतर गए थे। वहीं, ओली की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के पास संसद में 175 सीटें थीं, जो संसद में जीत हासिल करने के लिए जरूरी आंकड़े 299 से काफी कम थे। ऐसे में संसद में भी किसी भी स्थिति में पीएम ओली को जीत मिलना मुश्किल था।
करीब साढ़े छह महीनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही मधेसी पार्टियां भी ओली सरकार के खिलाफ उतर गईं थीं। छह मधेसी पार्टियों ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे नेपाली कांग्रेस के साथ मिलकर अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। दरअसल मधेसी ओली सरकार से इसलिए नाराज हैं कि उन्होंने उनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। पिछले हफ्ते ही मधेसी पार्टियों ने एलान किया कि वह नई सरकार बनाने में नेपाली कांग्रेस की मदद करेंगे। हालांकि वह सरकार में शामिल नहीं होंगे।
अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के दौरान पीएम ओली ने कहा कि उनके सत्ता हासिल करने से पहले भारत-नेपाल के बीच संबंध ज्यादा अच्छे नहीं थे, लेकिन जब उन्होंने पीएम पद संभाला, तो दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर हुए। उन्होंने इस दौरान भारत के साथ हाल ही में कुछ करारों पर बनी सहमति का भी जिक्र किया। हालांकि इस दौरान उन्होंने अपने देश के आंतरिक मामलों में पड़ोसी देशों के हस्तक्षेप का भी विरोध किया। अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों को हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करना चाहिए।