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भारत और चीन के बीच पुल बनाना चाहता है नेपाल
एजेंसी/ काठमांडू
Updated Mon, 17 Oct 2016 08:17 AM IST
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मोदी और प्रचंड
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नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने भारत और चीन के बीच नेपाल को एक सक्रिय सेतु बनाने की पैरवी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान प्रचंड ने त्रिपक्षीय रणनीतिक भागीदारी का प्रस्ताव रखते हुए यह बात कही।
नेपाली अखबार हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, ब्रिक्स सम्मेलन से इतर इस त्रिपक्षीय वार्ता में प्रचंड ने दोनों महान एशियाई शक्तियों के बीच सक्रिय सेतु बनने और इस भूमिका में अहम लाभ उठाने की इच्छा जताई। प्रचंड के निजी सचिव और उनके पुत्र प्रकाश दहल ने मीडिया को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस 20 मिनट की वार्ता में साझा हितों पर चर्चा हुई।
चीन और भारत के नेताओं ने नेपाल के इस रणनीति भागीदारी के प्रस्ताव को महत्वपूर्ण बताया और इस पर सहमति जताई। बयान के मुताबिक, प्रचंड ने मुलाकात के दौरान कहा, ‘हम (नेपाल) दोनों महान देशों के बीच अवस्थित हैं। हम इसका लाभ लेने के लिए दोनों के बीच सक्रिय सेतु बनना चाहते हैं। मैंने जोर देकर इस रणनीतिक भागीदारी के मुद्दे को उठाया। दोनों देश इस पर सहमत थे।’
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उन्होंने कहा कि नेपाल, भारत और चीन को बुद्ध, पशुपतिनाथ और जानकी आपस में जोड़ते हैं। लिहाजा भारत और चीन के बीच नेपाल अहम भूमिका निभा सकता है और उनके बीच अच्छे रिश्ते बना सकता है। नेपाल विकास लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है और दोनों पड़ोसियों के साथ एक संतुलित, मैत्रीपूर्ण तथा रणनीतिक संबंध कायम करना चाहता है। नेपाली प्रधानमंत्री ने यह उम्मीद भी जताई कि त्रिपक्षीय वार्ता तीनों देशों के बीच महत्वपूर्ण संबंध स्थापित कर सकती है।
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नेपाली अखबार हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, ब्रिक्स सम्मेलन से इतर इस त्रिपक्षीय वार्ता में प्रचंड ने दोनों महान एशियाई शक्तियों के बीच सक्रिय सेतु बनने और इस भूमिका में अहम लाभ उठाने की इच्छा जताई। प्रचंड के निजी सचिव और उनके पुत्र प्रकाश दहल ने मीडिया को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस 20 मिनट की वार्ता में साझा हितों पर चर्चा हुई।
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चीन और भारत के नेताओं ने नेपाल के इस रणनीति भागीदारी के प्रस्ताव को महत्वपूर्ण बताया और इस पर सहमति जताई। बयान के मुताबिक, प्रचंड ने मुलाकात के दौरान कहा, ‘हम (नेपाल) दोनों महान देशों के बीच अवस्थित हैं। हम इसका लाभ लेने के लिए दोनों के बीच सक्रिय सेतु बनना चाहते हैं। मैंने जोर देकर इस रणनीतिक भागीदारी के मुद्दे को उठाया। दोनों देश इस पर सहमत थे।’
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उन्होंने कहा कि नेपाल, भारत और चीन को बुद्ध, पशुपतिनाथ और जानकी आपस में जोड़ते हैं। लिहाजा भारत और चीन के बीच नेपाल अहम भूमिका निभा सकता है और उनके बीच अच्छे रिश्ते बना सकता है। नेपाल विकास लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है और दोनों पड़ोसियों के साथ एक संतुलित, मैत्रीपूर्ण तथा रणनीतिक संबंध कायम करना चाहता है। नेपाली प्रधानमंत्री ने यह उम्मीद भी जताई कि त्रिपक्षीय वार्ता तीनों देशों के बीच महत्वपूर्ण संबंध स्थापित कर सकती है।