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नेपाल में वाम गठबंधन की सरकार बनना तय, अबतक 86 सीटों पर मिली जीत
अतुल मिश्र/काठमांडू
Updated Sun, 10 Dec 2017 07:59 PM IST
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नेपाल चुनाव की तस्वीर
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नेपाल के प्रतिनिधि सभा चुनाव में वामपंथी गठबंधन की सरकार बनना तय दिख रहा है। रविवार शाम सात बजे तक घोषित नतीजों में गठबंधन को 86 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि 27 पर वह आगे चल रहा था।
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वाम गठबंधन के प्रमुख घटक नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (एमाले) को 62 सीटों पर जीत मिली है, जबकि वह 17 स्थानों पर आगे चल रही है। गठबंधन के दूसरे घटक माओवादी केंद्र ने 24 सीटों पर जीत हासिल की है और 10 सीटों पर उसके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं।
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उधर, कांग्रेस को 13 सीटों पर जीत मिली है और 10 स्थानों पर उसके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। मधेशी दल राष्ट्रिय जनता पार्टी ने 5 सीटों पर जीत हासिल की है और 6 पर उसके उम्मीदवार आगे हैं। अब तक के नतीजों में संघीय समाजवादी फोरम को 4 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 3 सीटों पर जीत मिली है। गौरतलब है कि प्रतिनिधि सभा के लिए प्रत्यक्ष चुनाव में 165 सीट और समानुपातिक चुनाव में 110 सीट अर्थात कुल 275 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को न्यूनतम 138 सीटों की जरूरत होती है। समानुपातिक निर्वाचन का मतगणना भी शुरू हो चुका है।
प्रदेश सभा में भी गठबंधन आगे
- प्रदेश सभा के चुनाव में भी वामपंथी गठबंधन आगे है। एमाले ने 112 सीटों पर जीत हासिल की है और 38 सीटों पर उसके उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। माओवादी केंद्र को 49 सीटों पर जीत मिली है और 21 स्थानों पर वह आगे है। कांग्रेस को 27 सीटों पर जीत मिली है और 15 सीटों पर उसके उम्मीदवार आगे हैं। प्रदेश सभा में संघीय समाजवादी फोरम 10 सीटों पर और राष्ट्रीय जनता पार्टी ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है।
ओली, भट्टराई और ठाकुर विजयी
- एमाले के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली झापा के क्षेत्र नंबर 5 से प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित हो गए है। पूर्व प्रधानमंत्री और नया शक्ति पार्टी के अध्यक्ष डॉ. वावु राम भट्टराई गोरखा 2 नंबर क्षेत्र से विजयी हुए हैं। राष्ट्रीय जनता पार्टि के संयोजक महंथ ठाकुर और राजेंद्र महतो तथा संघीय समाजवादी फोरम के अध्यक्ष उपेंद्र यादव भी चुनाव जीत चुके हैं।
दो चरणों में निर्वाचन
नेपाल चुनाव की तस्वीर
नेपाल में कुल 165 संसदीय और प्रांतीय असेंबली की 330 सीटें हैं। इनमें से नेपाल में संसद की 128 और सात प्रांतीय सभाओं की 256 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ था। पहले चरण में 26 नवंबर को 32 जिलों में चुनाव हुआ। इसमें प्रतिनिधि सभा के लिए 37 निर्वाचन क्षेत्र और प्रदेश सभा के लिए 74 निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदान हुआ था। पहले चरण में 65 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। दूसरे चरण में 45 जिलों में मतदान हुआ। इसमें प्रतिनिधि सभा सदस्य के लिए 128 निर्वाचन क्षेत्र और प्रांतीय असेंबली के लिए 256 निर्वाचन क्षेत्र के लिए वोटिंग हुई। दूसरे चरण में 67 प्रतिशत मतदान हुआ।
2015 में नए संविधान के बाद बने सात राज्य: नेपाल ने 2015 में नए संविधान को अपनाया था। देश में पहली बार सात प्रांतीय सभाओं का गठन हुआ। पर इसके बाद नेपाल में क्षेत्र और अधिकारों को लेकर समुदायों में झड़प शुरू हो गई। इसमें दर्जनों लोग मारे गए। भारतीय मूल के मधेसी समुदाय ने आरोप लगाया कि उसे राज्य में कम हिस्सा मिला और उसके साथ भेदभाव हुआ। यह चुनाव संविधान लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस चुनाव पर दुनिया की नजर: नेपाल के इस चुनाव को संघीय लोकतंत्र की दिशा में आखिरी कदम माना जा रहा है। संसदीय चुनाव में 1663 और प्रादेशिक सीट पर 2,819 प्रत्याशी मैदान में हैं। हालांकि इन चुनावों को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों को उम्मीद है कि इससे हिमालयी देश में राजनीतिक स्थिरता आएगी, क्योंकि पिछले वर्षों में करीब एक दशक तक चले गृहयुद्ध में यहां 16 हजार लोगों की जान जा चुकी हैं। इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर है। यूरोपीय यूनियन ने यहां 100 से ज्यादा अपने आब्जर्वर तैनात किए हैं।
2015 में नए संविधान के बाद बने सात राज्य: नेपाल ने 2015 में नए संविधान को अपनाया था। देश में पहली बार सात प्रांतीय सभाओं का गठन हुआ। पर इसके बाद नेपाल में क्षेत्र और अधिकारों को लेकर समुदायों में झड़प शुरू हो गई। इसमें दर्जनों लोग मारे गए। भारतीय मूल के मधेसी समुदाय ने आरोप लगाया कि उसे राज्य में कम हिस्सा मिला और उसके साथ भेदभाव हुआ। यह चुनाव संविधान लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस चुनाव पर दुनिया की नजर: नेपाल के इस चुनाव को संघीय लोकतंत्र की दिशा में आखिरी कदम माना जा रहा है। संसदीय चुनाव में 1663 और प्रादेशिक सीट पर 2,819 प्रत्याशी मैदान में हैं। हालांकि इन चुनावों को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों को उम्मीद है कि इससे हिमालयी देश में राजनीतिक स्थिरता आएगी, क्योंकि पिछले वर्षों में करीब एक दशक तक चले गृहयुद्ध में यहां 16 हजार लोगों की जान जा चुकी हैं। इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर है। यूरोपीय यूनियन ने यहां 100 से ज्यादा अपने आब्जर्वर तैनात किए हैं।