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म्यांमार के जज ने दो पत्रकारों को सुनाई 7 साल की सजा, संयुक्त राष्ट्र ने की रिहाई की मांग

Mon, 03 Sep 2018 11:31 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 03 Sep 2018 11:31 AM IST
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Myanmar Reuters: Myanmar judge jails Reuters reporters for 7 years

रॉयटर्स के दो पत्रकारों को रोहिंग्या नरसंहार की रिपोर्टिंग करते समय म्यांमार के गोपनीयता कानून के उल्लंघन का दोषी पाते हुए सात साल की सजा सुनाई गई है। इस केस को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले के तौर पर देखा जा रहा है। म्यांमार के नागरिक 32 साल के वा लोन और 28 साल के क्याव सोए ओ यांगोन की जेल में दिसंबर में हुई गिरफ्तारी के बाद से बंद हैं। उन्हें गोपनीयता कानून का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया। यह कानून ब्रिटिश समय का है जिसमें अधिकतम 14 साल की सजा है।

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इस मामले ने पूरे अतंरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। पिछले साल रखाइन राज्य में सुरक्षाबलों ने रोहिंग्या  मुस्लिम अल्पसंख्यकों को मार दिया था। सेना द्वारा शुरू किए गए 'सफाई अभियान' की वजह से 700,000 रोहिंग्याओं को बांग्लादेश जाना पड़ा था। म्यांमार में सुरक्षाबल उनके साथ कई तरह के अत्याचार कर रहे थे जिसमें बलात्कार, हत्या और आगजनी शामिल हैं। शनिवार को 100 पत्रकारों ने यांगोन में दोनों पत्रकारों के समर्थन में मार्च निकाला था।
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आरोपों से इंकार करते हुए दोनों पत्रकारों ने बचाव में कहा कि अपना काम करते समय वह पिछले साल रखाइन जिले में हुई 10 रोहिंग्या की मुस्लिमों की असाधारण हत्या का पर्दाफाश करने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच पुलिस ने उन्हें रात के खाने पर आमंत्रित किया और उनके हाथों में पेपर थमा दिया था। जैसे ही वह रेस्टोरेंट से बाहर निकले उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि जज ये ल्वीन उनके तर्क से सहमत नहीं हुए। उन्होंने कहा, ‘चूंकि उन्होंने गोपनीयता कानून के तहत अपराध किया है, दोनों को सात-सात साल जेल की सजा सुनाई जा रही है।’ संयुक्त राष्ट्र ने दोनों की रिहाई की मांग की है।
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