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अफगानिस्तान चुनावः जगह-जगह हिंसा, धमाकों के चलते 30 से ज्यादा की मौत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 21 Oct 2018 02:37 AM IST
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Afghanistan
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अफगानिस्तान में करीब तीन साल की देरी से हो रहे संसदीय चुनावों के दौरान शनिवार को जमकर हिंसा हुई। राजधानी काबुल के एक मतदान केंद्र पर आत्मघाती हमलावर के खुद को बम से उड़ा लेने पर 10 नागरिकों और 5 पुलिसकर्मियों समेत कुल 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
उत्तरी शहर कुंदूज में हमलावरों ने 20 से ज्यादा रॉकेट दागे, जिनमें स्वतंत्र चुनाव आयोग (आईईसी) के एक कर्मचारी समेत 3 लोगों के मरने और करीब 39 लोगों के घायल होने की खबर है। वहीं 7 लोग अभी तक लापता बताए जा रहे हैं। पूरे देश में हुई हिंसक घटनाओं में 130 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबरें हैं। तालिबान ने शनिवार को देश में करीब 318 हमले करने की जिम्मेदारी ली है।
आईईसी के राज्य निदेशक मोहम्मद रसूल उमर ने बताया कि कुंदूज के पास एक मतदान केंद्र पर हमले के दौरान तालिबान ने सभी बैलेट बॉक्स भी नष्ट कर दिए हैं। तालिबान की तरफ से ही मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन खतरे के बावजूद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मतदाताओं से मताधिकार के प्रयोग की अपील की थी। राष्ट्रपति की अपील के चलते मतदाता मतदान केंद्रों लेकिन धमाकों के बाद कुछ मतदान केंद्रों को बंद करना पड़ा।
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धमकी के मद्देनजर देश भर में एहतियात के बतौर हजारों सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, लेकिन इसका लाभ नहीं हुआ। इस बीच कई जगह अपूर्ण मतदाता सूचियों और बायोमेट्रिक मतदाता सत्यापन उपकरणों में तकनीकी गड़बड़ी के चलते कई जगह मतदान केंद्रों में वोटिंग के लिए देरी भी हुई। आईईसी ने कहा है कि जो मतदान केंद्र शनिवार को प्रभावित हुए हैं, ऐसे करीब 360 केंद्रों पर रविवार को दोबारा मतदान जारी रहेगा।
हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के कार्यवाहक प्रवक्ता मोहिबुल्ला जीर ने काबुल में हुए विभिन्न बम विस्फोटों में महज 4 लोगों के मरने और 78 से ज्यादा के घायल होने की ही पुष्टि की है। नांगरहार के गवर्नर के प्रवक्ता ने बताया कि राज्य में करीब 8 धमाके हुए हैं, जिनमें 2 के मरने और 5 के घायल होने की खबर है। पश्चिमी प्रांत हेरात में भी एक मतदान केंद्र के पास रॉकेट हमला हुआ जिसमें कुछ लोग घायल हुए हैं। इस माह चुनाव होने से पूर्व आतंकी हिंसा में सैकड़ों लोग या तो जान गंवा चुके हैं या घायल हुए हैं।
प्रभावित हो सकता है परिणाम
चुनावों का परिणाम10 नवंबर को आना है, लेकिन विभिन्न जगह पर मतदान के बाद बायोमेट्रिक मशीनों के टूट जाने या नष्ट हो जाने के कारण सही गणना संभव नहीं लग रही है। आईईसी ने कहा है कि बिना मशीनों के परिणाम घोषित करने पर विवाद हो सकता है। अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक से पहले ये चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं, जहां देश में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर चर्चा होनी है।
मतदाताओं के मन में रहा आतंकियों का डर
अफगानिस्तान में हुए संसदीय चुनावों के दौरान कई मतदाता केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ियों के चलते मतदान में देरी हुई। इस कारण बड़ी तादाद में यहां आए मतदाताओं की लंबी लाइनें लग गईं। मतदाताओं में चुनाव को लेकर उत्साह था, लेकिन मतदान केंद्रों पर घंटों तक लाइन में लगे रहने के कारण उनमें इस बात का डर देखा गया कि कहीं मौके का लाभ उठाकर आतंकी कोई बड़ी वारदात को अंजाम न दे दें।
हिंसा को खत्म करना चाहते हैं अफगानी
देश में भले ही आतंकी वारदातें बढ़ रही हैं लेकिन आम नागरिक शांति और हिंसा का खात्मा चाहता है। मजार-ए-शरीफ में एक बुर्का पहने 57 वर्षीय महिला हाफिजा ने कहा कि वह चिंतित है लेकिन मतदान करेगी, क्योंकि हमें हिंसा को परास्त करना है। इसी प्रकार 42 वर्षीय मुस्तफा ने भी कहा कि वह हिंसा खत्म करने के लिए मतदान करना चाहते हैं लेकिन डर है कि कहीं खुद हिंसा के शिकार न हो जाएं।
आंकड़ों की नजर से
2,564 उम्मीदवार चुनाव में आजमा रहे हैं अपनी किस्मत, 16 फीसदी महिलाएं शामिल
2014 में आतंकरोधी अभियान खत्म करने के बाद पहली बार हो रहा मतदान
54,000 सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए
90 लाख मतदाताओं के लिए देश में बनाए गए थे 5000 के करीब मतदान केंद्र
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उत्तरी शहर कुंदूज में हमलावरों ने 20 से ज्यादा रॉकेट दागे, जिनमें स्वतंत्र चुनाव आयोग (आईईसी) के एक कर्मचारी समेत 3 लोगों के मरने और करीब 39 लोगों के घायल होने की खबर है। वहीं 7 लोग अभी तक लापता बताए जा रहे हैं। पूरे देश में हुई हिंसक घटनाओं में 130 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबरें हैं। तालिबान ने शनिवार को देश में करीब 318 हमले करने की जिम्मेदारी ली है।
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आईईसी के राज्य निदेशक मोहम्मद रसूल उमर ने बताया कि कुंदूज के पास एक मतदान केंद्र पर हमले के दौरान तालिबान ने सभी बैलेट बॉक्स भी नष्ट कर दिए हैं। तालिबान की तरफ से ही मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन खतरे के बावजूद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मतदाताओं से मताधिकार के प्रयोग की अपील की थी। राष्ट्रपति की अपील के चलते मतदाता मतदान केंद्रों लेकिन धमाकों के बाद कुछ मतदान केंद्रों को बंद करना पड़ा।
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धमकी के मद्देनजर देश भर में एहतियात के बतौर हजारों सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, लेकिन इसका लाभ नहीं हुआ। इस बीच कई जगह अपूर्ण मतदाता सूचियों और बायोमेट्रिक मतदाता सत्यापन उपकरणों में तकनीकी गड़बड़ी के चलते कई जगह मतदान केंद्रों में वोटिंग के लिए देरी भी हुई। आईईसी ने कहा है कि जो मतदान केंद्र शनिवार को प्रभावित हुए हैं, ऐसे करीब 360 केंद्रों पर रविवार को दोबारा मतदान जारी रहेगा।
हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के कार्यवाहक प्रवक्ता मोहिबुल्ला जीर ने काबुल में हुए विभिन्न बम विस्फोटों में महज 4 लोगों के मरने और 78 से ज्यादा के घायल होने की ही पुष्टि की है। नांगरहार के गवर्नर के प्रवक्ता ने बताया कि राज्य में करीब 8 धमाके हुए हैं, जिनमें 2 के मरने और 5 के घायल होने की खबर है। पश्चिमी प्रांत हेरात में भी एक मतदान केंद्र के पास रॉकेट हमला हुआ जिसमें कुछ लोग घायल हुए हैं। इस माह चुनाव होने से पूर्व आतंकी हिंसा में सैकड़ों लोग या तो जान गंवा चुके हैं या घायल हुए हैं।
प्रभावित हो सकता है परिणाम
चुनावों का परिणाम10 नवंबर को आना है, लेकिन विभिन्न जगह पर मतदान के बाद बायोमेट्रिक मशीनों के टूट जाने या नष्ट हो जाने के कारण सही गणना संभव नहीं लग रही है। आईईसी ने कहा है कि बिना मशीनों के परिणाम घोषित करने पर विवाद हो सकता है। अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक से पहले ये चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं, जहां देश में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर चर्चा होनी है।
मतदाताओं के मन में रहा आतंकियों का डर
अफगानिस्तान में हुए संसदीय चुनावों के दौरान कई मतदाता केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ियों के चलते मतदान में देरी हुई। इस कारण बड़ी तादाद में यहां आए मतदाताओं की लंबी लाइनें लग गईं। मतदाताओं में चुनाव को लेकर उत्साह था, लेकिन मतदान केंद्रों पर घंटों तक लाइन में लगे रहने के कारण उनमें इस बात का डर देखा गया कि कहीं मौके का लाभ उठाकर आतंकी कोई बड़ी वारदात को अंजाम न दे दें।
हिंसा को खत्म करना चाहते हैं अफगानी
देश में भले ही आतंकी वारदातें बढ़ रही हैं लेकिन आम नागरिक शांति और हिंसा का खात्मा चाहता है। मजार-ए-शरीफ में एक बुर्का पहने 57 वर्षीय महिला हाफिजा ने कहा कि वह चिंतित है लेकिन मतदान करेगी, क्योंकि हमें हिंसा को परास्त करना है। इसी प्रकार 42 वर्षीय मुस्तफा ने भी कहा कि वह हिंसा खत्म करने के लिए मतदान करना चाहते हैं लेकिन डर है कि कहीं खुद हिंसा के शिकार न हो जाएं।
आंकड़ों की नजर से
2,564 उम्मीदवार चुनाव में आजमा रहे हैं अपनी किस्मत, 16 फीसदी महिलाएं शामिल
2014 में आतंकरोधी अभियान खत्म करने के बाद पहली बार हो रहा मतदान
54,000 सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए
90 लाख मतदाताओं के लिए देश में बनाए गए थे 5000 के करीब मतदान केंद्र