{"_id":"5b1f04a84f1c1b634d8b5fd7","slug":"mini-india-ready-for-trump-kim-talks-with-tight-security-in-singapore","type":"story","status":"publish","title_hn":"कड़ी सुरक्षा में ट्रंप-किम वार्ता को सिंगापुर का ‘मिनी इंडिया’ तैयार, 1800 गोरखा जवान रहेंगे मौजूद","category":{"title":"Rest of World","title_hn":"अन्य देश","slug":"rest-of-world"}}
कड़ी सुरक्षा में ट्रंप-किम वार्ता को सिंगापुर का ‘मिनी इंडिया’ तैयार, 1800 गोरखा जवान रहेंगे मौजूद
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, सिंगापुर
Updated Tue, 12 Jun 2018 04:54 AM IST
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Trump-Kim jong
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ट्रंप-किम के बीच मंगलवार को होने वाली शिखर वार्ता के लिए आकाश से पाताल तक इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। देश के सेंटोसा आइलैंड नामक जिस इलाके में इस मुलाकात की संभावना है उसे मिनी इंडिया भी कहा जाता है जहां भारतीयों के आवास और सैकड़ों दुकानें हैं। वार्ता के चलते आइलैंड के सभी रेस्त्रां-दुकानें बंद कर दी गई हैं। इस व्यवस्था का संबंध भारत-नेपाल से भी है क्योंकि नेताओं की सुरक्षा में गोरखा जवान तैनात हैं। परंपरा के मुताबिक इनकी खुकरी म्यान से बाहर निकलती है तो खून पीकर ही वापस जाती है।
मुलाकात को लेकर दोनों नेता सिंगापुर पहुंच चुके हैं जिनके चलते चप्पे-चप्पे पर चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था है। यहां उत्तर कोरियाई नेता ट्रंप के साथ पूर्णत: शांति स्थापित करने के तरीके पर बात करेंगे तो अमेरिकी राष्ट्रपति किम-जोंग को निरस्त्रीकरण व दक्षिण कोरिया और जापान के साथ तनाव खत्म करने पर चर्चा करेंगे। शिखर वार्ता को लेकर की गई सुरक्षा व्यवस्था से यहां रह रहे भारतीय सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि यहां दो किलोमीटर के दायरे में 300 से अधिक भारतीय रेस्त्रां हैं और सैकड़ों दुकानें हैं जो बंद हैं। देश की 55 लाख की आबादी में भारतीय सात फीसदी हैं।
यहां का तीसरा बड़ा समुदाय तमिलों का है, जबकि भारतीय मूल के तेलुगु और पंजाबी भी मिनी इंडिया की बड़ी पहचान हैं। ट्रंप-किम वार्ता में सुरक्षा व्यवस्था का गोरखा कनेक्शन भी इसका भारत और नेपाल से रिश्ता जोड़ता है। बता दें कि भारत में गोरखा रेजिमेंट है और गोरखा लोग नेपाल के मूल निवासी हैं। सिंगापुर में भूरे रंग की टोपी में तैनात गोरखा टुकड़ी बैठक स्थल समेत सड़कों और होटलों की सुरक्षा देख रही है। गोरखा जवानों को सिंगापुर में खास मौकों पर जिम्मेदारी सौंपी जाती है। हालांकि ट्रंप और किम के निजी सुरक्षाकर्मी भी यहां तैनात रहेंगे।
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वार्ता सफल रही तो दुनिया को ये होंगे फायदे
परमाणु कार्यक्रम के चलते संयुक्त राष्ट्र व अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया पर लगाए आर्थिक प्रतिबंधों के चलते दुनिया के बाजार प्रभावित हुए हैं। चूंकि उत्तर कोरिया के श्रम का मूल्य दुनिया में सबसे सस्ता है इसलिए कई देश यहां उत्पादन केंद्र खोल सकेंगे। चीन यहां से सस्ता माल आयात कर मेड इन चायना का लेबल लगाकर विश्व को सस्ते में बेच सकेगा। उत्तर कोरिया के कपड़े, कोयला और खनिजों का निर्यात यूरोप, अमेरिका, जापान, कनाडा व रूस में बढ़ जाएगा, जिससे बाजार को बेहतर मार्जिन मिल सकेगा। उत्तर कोरिया को तेल सप्लाई करने वाले देशों को भी बड़ा बाजार मिलेगा।
भारत को होंगे तीन बड़े फायदे
भारतीय उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप-किम वार्ता से भारत के निर्यात उद्योग को एक उभरता बाजार मिल सकेगा। इससे भारत को उत्तर कोरिया में एक्ट-ईस्ट नीति आगे बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी। यदि वार्ता सफल रहती है तो भारत को सबसे पहला फायदा कोरियाई क्षेत्र में चीन की निर्भरता कम होने का मिलेगा और भारत यहां अपने द्विपक्षीय रिश्ते बनाकर बाजार विकसित कर सकेगा। प्रतिबंध हटने का दूसरा फायदा भारत को यहां बुनियादी ढांचे के विकास के कांट्रेक्ट मिलने से होगा। भारत को तीसरा लाभ तेल व प्राकृतिक गैस का उत्तर कोरिया को निर्यात करने से मिलेगा।
शायद पहली मुलाकात में न हो पाए कोई समझौता
यद्यपि किम जोंग-उन कह चुके हैं कि जो काम उनके दादा और पिता नहीं कर पाए हैं, वो काम वह करके दिखाएंगे। ट्रंप चाहते हैं कि पूरा कोरियाई प्रायद्वीप परमाणु मुक्त हो, लेकिन उत्तर कोरिया के पास पहले से मौजूद हथियारों को खत्म करने की अब तक कोई योजना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि मंगलवार को होने वाली वार्ता यदि सफल भी रहती है तो ट्रंप-किम की इस पहली मुलाकात में कोई बड़ा समझौता होने की संभावना बेहद कम होगी। फिर भी यदि यह सम्मेलन कारगर रहा तो ऐतिहासिक होगा और आगामी बैठकों में एजेंडे को सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
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मुलाकात को लेकर दोनों नेता सिंगापुर पहुंच चुके हैं जिनके चलते चप्पे-चप्पे पर चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था है। यहां उत्तर कोरियाई नेता ट्रंप के साथ पूर्णत: शांति स्थापित करने के तरीके पर बात करेंगे तो अमेरिकी राष्ट्रपति किम-जोंग को निरस्त्रीकरण व दक्षिण कोरिया और जापान के साथ तनाव खत्म करने पर चर्चा करेंगे। शिखर वार्ता को लेकर की गई सुरक्षा व्यवस्था से यहां रह रहे भारतीय सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि यहां दो किलोमीटर के दायरे में 300 से अधिक भारतीय रेस्त्रां हैं और सैकड़ों दुकानें हैं जो बंद हैं। देश की 55 लाख की आबादी में भारतीय सात फीसदी हैं।
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यहां का तीसरा बड़ा समुदाय तमिलों का है, जबकि भारतीय मूल के तेलुगु और पंजाबी भी मिनी इंडिया की बड़ी पहचान हैं। ट्रंप-किम वार्ता में सुरक्षा व्यवस्था का गोरखा कनेक्शन भी इसका भारत और नेपाल से रिश्ता जोड़ता है। बता दें कि भारत में गोरखा रेजिमेंट है और गोरखा लोग नेपाल के मूल निवासी हैं। सिंगापुर में भूरे रंग की टोपी में तैनात गोरखा टुकड़ी बैठक स्थल समेत सड़कों और होटलों की सुरक्षा देख रही है। गोरखा जवानों को सिंगापुर में खास मौकों पर जिम्मेदारी सौंपी जाती है। हालांकि ट्रंप और किम के निजी सुरक्षाकर्मी भी यहां तैनात रहेंगे।
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वार्ता सफल रही तो दुनिया को ये होंगे फायदे
परमाणु कार्यक्रम के चलते संयुक्त राष्ट्र व अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया पर लगाए आर्थिक प्रतिबंधों के चलते दुनिया के बाजार प्रभावित हुए हैं। चूंकि उत्तर कोरिया के श्रम का मूल्य दुनिया में सबसे सस्ता है इसलिए कई देश यहां उत्पादन केंद्र खोल सकेंगे। चीन यहां से सस्ता माल आयात कर मेड इन चायना का लेबल लगाकर विश्व को सस्ते में बेच सकेगा। उत्तर कोरिया के कपड़े, कोयला और खनिजों का निर्यात यूरोप, अमेरिका, जापान, कनाडा व रूस में बढ़ जाएगा, जिससे बाजार को बेहतर मार्जिन मिल सकेगा। उत्तर कोरिया को तेल सप्लाई करने वाले देशों को भी बड़ा बाजार मिलेगा।
भारत को होंगे तीन बड़े फायदे
भारतीय उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप-किम वार्ता से भारत के निर्यात उद्योग को एक उभरता बाजार मिल सकेगा। इससे भारत को उत्तर कोरिया में एक्ट-ईस्ट नीति आगे बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी। यदि वार्ता सफल रहती है तो भारत को सबसे पहला फायदा कोरियाई क्षेत्र में चीन की निर्भरता कम होने का मिलेगा और भारत यहां अपने द्विपक्षीय रिश्ते बनाकर बाजार विकसित कर सकेगा। प्रतिबंध हटने का दूसरा फायदा भारत को यहां बुनियादी ढांचे के विकास के कांट्रेक्ट मिलने से होगा। भारत को तीसरा लाभ तेल व प्राकृतिक गैस का उत्तर कोरिया को निर्यात करने से मिलेगा।
शायद पहली मुलाकात में न हो पाए कोई समझौता
यद्यपि किम जोंग-उन कह चुके हैं कि जो काम उनके दादा और पिता नहीं कर पाए हैं, वो काम वह करके दिखाएंगे। ट्रंप चाहते हैं कि पूरा कोरियाई प्रायद्वीप परमाणु मुक्त हो, लेकिन उत्तर कोरिया के पास पहले से मौजूद हथियारों को खत्म करने की अब तक कोई योजना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि मंगलवार को होने वाली वार्ता यदि सफल भी रहती है तो ट्रंप-किम की इस पहली मुलाकात में कोई बड़ा समझौता होने की संभावना बेहद कम होगी। फिर भी यदि यह सम्मेलन कारगर रहा तो ऐतिहासिक होगा और आगामी बैठकों में एजेंडे को सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।